PM MODI in Varanasi: काशी को मिलेगी नई सौगात, पहली वंदेभारत ट्रेन जोड़ेगी काशी, विंध्याचल और चित्रकूट को

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी का दौरा करेंगे, और इस दौरान विभिन्न विभागों द्वारा तैयारियाँ जोरों से चल रही हैं। खासतौर पर बरेका में हेलीपैड का निर्माण किया जा रहा है। इस यात्रा के दौरान वे बनारस को आठवीं वंदे भारत एक्सप्रेस का तोहफा भी देंगे।

काशी को मिलेगी आठवीं वंदेभारत की सौगात – 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 नवंबर को वाराणसी से खजुराहो के बीच नई वंदेभारत एक्सप्रेस का शुभारंभ करेंगे। यह ट्रेन काशी को सीधे विंध्यवासिनी धाम और चित्रकूट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों से जोड़ेगी। भारतीय रेल के इतिहास में यह वंदेभारत ट्रेन न केवल काशी के लिए, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के यात्रियों के लिए नई शुरुआत साबित होगी। धार्मिक पर्यटन को नई रफ्तार देने वाली यह हाई-स्पीड ट्रेन यात्रियों को तेज़, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव कराएगी। अब तक यूपी, बिहार, झारखंड और दिल्ली के लिए सात वंदेभारत ट्रेनों का संचालन हो रहा है, जबकि यह आठवीं ट्रेन खास तौर पर धार्मिक यात्रियों को ध्यान में रखकर शुरू की जा रही है।

काशी

काशी से खजुराहो तक धर्म और तकनीक का संगम – 

यह पहली वंदेभारत एक्सप्रेस होगी जो वाराणसी से खजुराहो तक चलेगी और रास्ते में विंध्याचल, मिर्जापुर और चित्रकूट जैसे आस्था स्थलों को जोड़ेगी। इससे मां विंध्यवासिनी, भगवान राम और भगवान शिव के भक्तों को एक ही मार्ग में दर्शन करने का अवसर मिलेगा। रेलवे के मुताबिक, इस ट्रेन में कुल आठ कोच होंगे, जिनमें सात चेयर कार और एक एक्जीक्यूटिव क्लास कोच शामिल है। इन कोचों में आधुनिक सुविधाएं, फुल एयर कंडीशनिंग, आरामदायक सीटें और तेज़ गति वाली तकनीक उपलब्ध होगी। इस ट्रेन के शुरू होने से वाराणसी और आसपास के शहरों में धार्मिक पर्यटन और व्यापार दोनों को गति मिलेगी।

उद्घाटन दिवस पर प्रधानमंत्री दिखाएंगे हरी झंडी – 

प्रधानमंत्री मोदी के हाथों उद्घाटन होने वाले इस कार्यक्रम में रेल मंत्री, रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। उद्घाटन के दिन यह ट्रेन बनारस रेलवे स्टेशन से सुबह 8 बजे रवाना होगी, जिसमें रेल मंत्री, रेलवे अधिकारी और कुछ चुनिंदा लोग यात्रा करेंगे। आम यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग बाद में शुरू की जाएगी। फिलहाल किराए की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन रेलवे सूत्रों के अनुसार जल्द ही इसका किराया तय कर लिया जाएगा। नियमित दिनों में यह ट्रेन सुबह 5:25 बजे बनारस स्टेशन से रवाना होगी।

वाराणसी से चलने वाली अन्य वंदेभारत सेवाएं भी सफल – 

रेलवे विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वाराणसी-खजुराहो वंदेभारत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 26422/26421) फिलहाल आठ कोच के साथ चलेगी, जिसे यात्रियों की संख्या के अनुसार भविष्य में 16 कोच तक बढ़ाया जाएगा। इस ट्रेन के शुरू होने से काशी के साथ-साथ बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में धार्मिक और आर्थिक गतिविधियों को नया बल मिलेगा। खजुराहो, जो अपने ऐतिहासिक मंदिरों और विश्व धरोहर स्थलों के लिए प्रसिद्ध है, अब काशी से सीधी वंदेभारत सेवा से जुड़ जाएगा।

धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल – 

नई वंदेभारत एक्सप्रेस के संचालन से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका सकारात्मक असर होगा। विंध्याचल और चित्रकूट जैसे धार्मिक स्थल सालभर हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। अब इन स्थलों तक यात्रियों को पहले की तरह लंबा सफर तय नहीं करना पड़ेगा। तेज़ रफ्तार और आरामदायक यात्रा सुविधा के कारण यह ट्रेन पर्यटकों और श्रद्धालुओं दोनों के लिए पहली पसंद बनेगी। इसके साथ ही होटल, परिवहन और स्थानीय व्यापारियों को भी आर्थिक लाभ मिलेगा।

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काशी के विकास में मोदी सरकार का एक और कदम – 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से काशी के विकास को लेकर विशेष दृष्टिकोण रखते हैं। वाराणसी में पहले से ही विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशन, रोड कनेक्टिविटी और पर्यटन सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। अब वंदेभारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेनों के जरिए काशी को देश के प्रमुख शहरों और तीर्थस्थलों से जोड़ने का लक्ष्य पूरा किया जा रहा है। मोदी सरकार का यह कदम “धार्मिक पर्यटन” को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा आधार देने वाला साबित होगा।

कुल मिलाकर, वाराणसी से खजुराहो तक की नई वंदेभारत एक्सप्रेस न सिर्फ दो धार्मिक और ऐतिहासिक शहरों को जोड़ेगी, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक भी बनेगी। यात्रियों के लिए यह सफर अब पहले से ज्यादा सुविधाजनक, तेज़ और यादगार होगा। आने वाले समय में जैसे-जैसे वंदेभारत ट्रेनों का विस्तार होगा, वैसे-वैसे भारत का रेल नेटवर्क और मजबूत तथा आधुनिक बनता जाएगा। काशी से खजुराहो तक वंदेभारत का सफर अब श्रद्धा और तकनीक का संगम बनकर भारत के विकास की नई गाथा लिखने जा रहा है।

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