उत्तर प्रदेश के Kanpur शहर से एक काफी परेशान करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के एक पुराने इलाके में अचानक एक मकान ढह गया, जिससे वहां मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई। यह हादसा सोमवार की रात को हुआ जब लोग रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे। पुराने शहरों के घनी आबादी वाले इलाकों में ऐसी घटनाएं अक्सर एक बड़ा खतरा बनकर सामने आती हैं, और इस बार Kanpur के बेकनगंज इलाके में यह अनहोनी हो गई।
यह दुखद घटना Kanpur के बेकनगंज इलाके की है, जहाँ एक करीब 100 साल पुराना मकान भरभराकर नीचे आ गिरा। बताया जा रहा है कि यह इमारत काफी समय से जर्जर हालत में थी। इस मकान के नीचे के हिस्से में एक चाय की दुकान और एक मोबाइल की दुकान भी चलती थी। चूँकि यह इलाका काफी व्यस्त रहता है, इसलिए दुकान होने की वजह से यहाँ हमेशा लोगों की भीड़ बनी रहती थी। Kanpur प्रशासन की टीम अब इस बात की जांच कर रही है कि आखिर इतने पुराने और जर्जर मकान को रहने या दुकान चलाने के लिए कैसे इस्तेमाल किया जा रहा था।

मलबे के नीचे दबे कई लोग
हादसे के वक्त रात के करीब दस बज रहे थे। Kanpur के इस पुराने घर के नीचे बनी चाय की दुकान पर कुछ लोग बैठकर चाय पी रहे थे। तभी अचानक छत से मलबा गिरने लगा। कुछ समझदार लोग तो वहां से तुरंत भाग निकले, लेकिन कुछ लोगों को लगा कि यह मामूली बात है। तभी अचानक मकान का एक बड़ा हिस्सा नीचे गिर गया। इस मलबे में दुकान चलाने वाला मंजूर, वहां काम करने वाला सलीम और कुछ अन्य लोग जैसे तारिक और रियाज दब गए। Kanpur के स्थानीय लोगों ने जैसे ही यह देखा, उन्होंने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को इसकी जानकारी दी।
रेस्क्यू ऑपरेशन और पुलिस की कार्रवाई
सूचना मिलते ही बजरिया पुलिस थाने की टीम और दमकल कर्मी मौके पर पहुँच गए। Kanpur पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश के लिए काफी सावधानी से पत्थर और ईंटें हटाई गईं। अब तक टीम ने चार लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इन सभी घायलों को इलाज के लिए पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। Kanpur की इस घटना के बाद पुलिस अब मलबे को हटाने और यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि कोई और अंदर न फंसा हो।
पुरानी इमारतों का बढ़ता खतरा
जानकारी के मुताबिक, इस मकान को करीब 20 साल पहले अयूब नाम के व्यक्ति ने खरीदा था। कानपुर जैसे औद्योगिक और ऐतिहासिक शहर में ऐसे कई मकान हैं जो अब रहने लायक नहीं बचे हैं, लेकिन फिर भी वहां लोग रह रहे हैं। जर्जर मकानों की मरम्मत न होना या उन्हें समय पर खाली न करना बड़े हादसों को न्योता देता है। कानपुर के नगर निगम और संबंधित विभाग को ऐसे मकानों को चिन्हित कर उन पर कार्रवाई करने की जरूरत है ताकि भविष्य में बेकनगंज जैसा मंजर दोबारा न देखना पड़े।
कानपुर की यह घटना हम सबके लिए एक सबक है कि पुरानी और कमजोर इमारतों को नजरअंदाज करना कितना भारी पड़ सकता है। प्रशासन की सतर्कता और स्थानीय लोगों की सूझबूझ से चार लोगों की जान बचाई जा सकी, जो एक राहत की बात है। उम्मीद है कि अस्पताल में भर्ती घायल लोग जल्द ही स्वस्थ होकर अपने घर लौटेंगे। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी है कि हम अपने आसपास की जर्जर इमारतों के प्रति जागरूक रहें और प्रशासन को इसकी जानकारी दें। सुरक्षित रहिए और सतर्क रहिए।
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