भारत ने श्रीलंका में बनाया 100 फीट बेली ब्रिज, मदद तेज

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कैंडी, श्रीलंका: श्रीलंका में चक्रवात दितवाह के बाद तबाह हुए इलाकों में कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए भारत की ओर से लगातार राहत और पुनर्निर्माण कार्य जारी है। रविवार को भारतीय उच्चायोग ने जानकारी दी कि भारतीय सेना के इंजीनियरों ने कैंडी क्षेत्र में 100 फुट लंबा बेली ब्रिज बनाना शुरू कर दिया है। यह पुल बी-492 हाईवे पर केएम-21, कैंडी में तैयार किया जा रहा है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क दोबारा स्थापित किया जा सके। यह पूरा कार्य भारत के मानवीय मिशन ऑपरेशन सागर बंधु के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य चक्रवात दितवाह से प्रभावित श्रीलंका को हर संभव सहायता देना है।

भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि ऑपरेशन सागर बंधु के तहत न केवल पुल निर्माण का काम चल रहा है, बल्कि श्रीलंकाई सड़क विकास प्राधिकरण की मदद के लिए अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्य भी किए जा रहे हैं। चक्रवात दितवाह के कारण कई अहम सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिससे आम जनजीवन, राहत पहुंचाने और आर्थिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा था। ऐसे में बेली ब्रिज को अस्थायी लेकिन तेज़ समाधान के रूप में देखा जा रहा है, ताकि लोगों की आवाजाही जल्द से जल्द सामान्य हो सके।

इससे पहले दिसंबर महीने में श्रीलंका यात्रा के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चक्रवात के बाद श्रीलंका के पुनर्निर्माण प्रयासों में भारत की बड़ी भूमिका को रेखांकित किया था। कोलंबो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष दूत के रूप में बोलते हुए जयशंकर ने घोषणा की थी कि भारत ने श्रीलंका के लिए 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापक सहायता पैकेज प्रस्तावित किया है। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी की ओर से सौंपा गया पत्र भारत की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत भारत संकट के समय अपने पड़ोसी देशों के लिए पहली प्रतिक्रिया देने वाला देश बनकर खड़ा रहता है।

जयशंकर ने बताया था कि शुरुआती राहत प्रयासों के तहत भारत ने लगभग 1100 टन राहत सामग्री श्रीलंका भेजी, जिसमें भोजन, जरूरी सामान और अन्य मानवीय सहायता शामिल थी। इसके अलावा करीब 14.5 टन दवाएं और चिकित्सा उपकरण भी श्रीलंका को उपलब्ध कराए गए, ताकि चक्रवात के बाद स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़े दबाव को कम किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा था कि पीएम मोदी ने भारतीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे श्रीलंकाई सरकार के साथ मिलकर पुनर्निर्माण की प्राथमिकताओं को तय करें और उसी के अनुरूप सहयोग आगे बढ़ाया जाए।

विदेश मंत्री ने प्रस्तावित सहायता पैकेज का विवरण देते हुए बताया था कि 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर की इस योजना में 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर की रियायती लाइन ऑफ क्रेडिट और 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान शामिल है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि यह पैकेज अभी श्रीलंका सरकार के साथ मिलकर अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि धनराशि का इस्तेमाल सबसे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और रिकवरी से जुड़े कार्यों में ही किया जाए।

श्रीलंका दौरे के दौरान जयशंकर ने देश के शीर्ष नेतृत्व से भी मुलाकात की थी। उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री हारिनी अमारासुरिया और विपक्ष के नेता सजित प्रेमदासा के साथ अलग-अलग बैठकें कर द्विपक्षीय सहयोग, आर्थिक सहायता और पुनर्निर्माण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी।

भारत की इस मदद पर श्रीलंका सरकार की ओर से भी आभार जताया गया है। श्रीलंका के विदेश मामलों के मंत्री विजिता हेरथ ने एक मीडिया बयान में ऑपरेशन सागर बंधु की तारीफ करते हुए भारत को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि चक्रवात दितवाह के बाद भारत ने जिस तरह से 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापक सहायता पैकेज दिया है, वह श्रीलंका के लिए बेहद अहम है।

मंत्री हेरथ ने यह भी बताया कि भारत ने इससे पहले भी क्रेडिट लाइन के जरिए श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को करीब 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता दी है। इसके अलावा आपातकालीन वित्तपोषण, विदेशी मुद्रा सहायता और पहले से चल रही क्रेडिट लाइनों के तहत पूरे हो चुके प्रोजेक्ट्स के बकाया भुगतान को निपटाने के लिए 20.66 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद भी की गई है। उन्होंने कहा कि श्रीलंका भारत की इस निरंतर आर्थिक और मानवीय सहायता को बहुत महत्व देता है।

ऑपरेशन सागर बंधु के तहत चल रहे कार्यों को श्रीलंका में भारत की एक अहम मानवीय पहल के रूप में देखा जा रहा है। राहत सामग्री भेजने से लेकर सड़कों और पुलों के जरिए कनेक्टिविटी बहाल करने तक, इस अभियान का उद्देश्य चक्रवात दितवाह से प्रभावित लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को जल्द से जल्द पटरी पर लाना है। कैंडी में बेली ब्रिज का निर्माण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और राहत कार्यों को और गति मिलने की उम्मीद है।

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