कुछ ही देर में 2025 इतिहास होगा, लेकिन भारत के लिए आर्थिक नजरिए से ये साल हमेशा खास रहेगा। ये वही साल है जब भारत एक टिमटिमाते जुगनू से आर्थिक दुनिया का ध्रुवतारा बनकर उभरा है जब पूरी दुनिया मंदी की आहट और तनाव के बीच जूझ रही है जब दुनिया भर के निवेशकों के अंदर डर का माहौल है, तब भारत निडरता के साथ अर्थव्यव्स्था के शिखर की ओर तेजी से बढ़ा है। भारत ने अब वो कर दिखाया है जिसकी उम्मीद तो थी, लेकिन इतनी जल्दी नहीं, इस बार भारत ने आर्थिक मोर्चे पर ऐसी ऐतिहासिक छलांग लगाई है। जिसने जापान को भी पिछे छोड़ दिया है। भारत अब पांचवी से दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और ये महज आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि ग्लोबल पावर शिफ्ट का एक बड़ा संकेत है।
दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बना भारत
– (सरकारी आंकड़ों के मुताबिक) भारत की GDP 4.18 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गई है
– (अनुमान है कि) भारत 2030 तक जर्मनी को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बन जाएगा
– वर्तमान में अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है
– इसके बाद चीन दूसरे स्थान पर है, तीसरे पर जर्मनी है
भारत के लिए ये उपलब्धि इसलिए बड़ी है क्योंकि जापान दशकों तक एशिया और दुनिया की आर्थिक महाशक्ति रहा है लेकिन पिछले कुछ समय से जापान की अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ी है, जबकि मंदी के बाद भी भारत की ग्रोथ मशीन पूरी रफ्तार में है।
भारत की ‘ग्रोथ मशीन’ तेज रफ्तार से दौड़ रही!
– भारत की GDP वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत की दर से बढ़ी है
– (ये आंकड़ा इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि) पहली तिमाही में ये 7.8 प्रतिशत था यानी रफ्तार कम होने के बजाय और तेज हो गई है
– (ये ग्रोथ दिखाती है कि) वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारतीय इकोनॉमी न सिर्फ स्थिर है बल्कि तेजी से आगे बढ़ रही है
इकोनॉमी के मोर्चे पर भारत का डंका पूरी दुनिया में बज रहा है अमेरिका, चीन जैसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की रफ्तार भी आर्थिक मंदी के आगे धीमी हो गई, लेकिन भारत नहीं रुका और आगे भी नहीं रुकेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था की इस ग्रोथ में निजी खपत और मजबूत घरेलू मांग का बड़ा हाथ माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि देश में बेरोजगारी दर में गिरावट आ रही है और महंगाई भी नियंत्रण के दायरे में बनी हुई है, भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर वर्ल्ड बैंक, IMF और मूडीज जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी सकारात्मक अनुमान जता चुके हैं और ये हो इसलिए रहा है क्योंकि भारत अब हर मोर्चे पर बेहतर कर रहा है।
भारत हर मोर्चे पर बेहतर!
– आम जनता के लिए सबसे बड़ी राहत महंगाई के मोर्चे पर देखने को मिली
– साल 2025 की शुरुआत में खुदरा महंगाई 4.26% थी
– (लेकिन) नवंबर तक आते-आते ये खुदरा महंगाई 0.71% पर आ गई
– (नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस के आंकड़ों के मुताबिक) देश की कुल बेरोजगारी दर अक्टूबर के 5.2% से घटकर नवंबर में 4.7% पर आ गई है
– ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद भारत का एक्सपोर्ट बढ़ा है
– नवंबर 2025 में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 38.13 बिलियन डॉलर रहा
– जो साल की शुरुआत में 36.43 बिलियन डॉलर था
भारत 2047 तक उच्च मध्यम-आय वाला देश बनने के लक्ष्य की ओर तेजी बढ़ रहा है इसके लिए आर्थिक वृद्धि, संरचनात्मक सुधार और सामाजिक प्रगति को आधार बनाया जा रहा है, महंगाई अभी नियंत्रण में है और तय सीमा से नीचे है….बेरोजगारी धीरे-धीरे कम हो रही है और देश के निर्यात में लगातार सुधार हो रहा है। इसके साथ ही आर्थिक हालत भी ठीक हैं। कारोबारियों को बैंकों से आसानी से कर्ज मिल रहा है। बाजार में मांग बनी हुई है और शहरों में लोगों के खर्च बढ़ने से खरीद-फरोख्त को सहारा मिल रहा है हालांकि इन सबके बीच ये भी समझना जरुरी है कि GDP कैसे बढ़ती घटती है।
GDP घटने या बढ़ने के लिए कौन जिम्मेदार..?
– GDP को घटाने या बढ़ाने के लिए 4 महत्वपूर्ण इंजन होते हैं
– पहला है, आप और हम, आप जितना खर्च करते हैं, वो हमारी इकोनॉमी में योगदान देता है
– दूसरा है, प्राइवेट सेक्टर की बिजनेस ग्रोथ, ये GDP में 32% योगदान देती है
– तीसरा है, सरकारी खर्च
– (इसका मतलब है) गुड्स और सर्विसेस प्रोड्यूस करने में सरकार कितना खर्च कर रही है
– इसका GDP में 11% योगदान है
– (और) चौथा है, नेट डिमांड, इसके लिए भारत के कुल एक्सपोर्ट को कुल इम्पोर्ट से घटाया जाता है (क्योंकि भारत में एक्सपोर्ट के मुकाबले इम्पोर्ट ज्यादा है, इसलिए इसका इम्पैक्ट GPD पर निगेटिव ही पड़ता है)
वहीं अब भविष्य के लिए अनुमान है कि भारत 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बन जाएगा…वैसे भारत पहले से ही दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है इसीलिए माना जा रहा है कि ये तो बस शुरुआत है…अगले कुछ सालों में भारत जर्मनी को भी पीछे छोड़ देगा और 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बन जाएगा…
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