ब्रह्मोस से भी घातक भारत की नई मिसाइल… समंदर में दुश्मन के लिए काल बनेगी LR-AShM

LR-AShM

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ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह अब केवल रक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आधुनिक और आक्रामक सैन्य क्षमताओं के साथ भविष्य के युद्धों के लिए खुद को पूरी तरह तैयार कर रहा है। इसी रणनीति के तहत भारत रक्षा तकनीक के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है, जहां हाइपरसोनिक हथियार उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुके हैं। इस कड़ी में हाइपरसोनिक LR-AShM (Long Range Anti-Ship Missile) को भारत का अगला प्रमुख समुद्री आक्रमण हथियार माना जा रहा है।

भारत की यह नई लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM) अपनी गति और मारक क्षमता के कारण ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइलों से भी अधिक घातक हो सकती है। उनकी मानें तो इसकी हाइपरसोनिक स्पीड इसे असाधारण रूप से विनाशकारी बनाती है।

LR-AShM

केवल विस्फोटक नहीं, काइनेटिक एनर्जी है

LR-AShM की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी घातक शक्ति केवल इसके वारहेड पर निर्भर नहीं करती। इसकी बेहद तेज गति से उत्पन्न होने वाली काइनेटिक एनर्जी इसे और भी खतरनाक बना देती है।
हाइपरसोनिक गति पर उड़ती मिसाइल इतनी जबरदस्त ऊर्जा के साथ लक्ष्य से टकराती है कि वह दुश्मन के युद्धपोत के मजबूत पतवार और सुरक्षा ढांचे को भेद सकती है, कई बार विस्फोट से पहले ही भारी नुकसान पहुंचा देती है।

दुश्मन को प्रतिक्रिया का मौका तक नहीं

LR-AShM की रफ्तार आवाज की गति से कई गुना अधिक बताई जा रही है। इसका सीधा असर दुश्मन की रक्षा प्रणालियों पर पड़ता है। जहाजों पर लगे रडार सिस्टम, वायु रक्षा बैटरी और नजदीकी हथियार प्रणालियां (CIWS) इस मिसाइल का पता लगाने, उसका पीछा करने और उसे नष्ट करने के लिए केवल कुछ सेकंड ही पा सकेंगी।
सबसोनिक और सुपरसोनिक मिसाइलों की तुलना में हाइपरसोनिक मिसाइलें दुश्मन को प्रतिक्रिया का लगभग कोई मौका नहीं देतीं।

स्मार्ट मैनूवरिंग और लो-एल्टीट्यूड उड़ान

हाइपरसोनिक LR-AShM उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदलने में सक्षम होगी। यह क्षमता दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भ्रमित कर देती है। बैलिस्टिक मिसाइलें जहां ऊंची उड़ान भरती हैं और आसानी से ट्रैक हो जाती हैं, वहीं हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें अपेक्षाकृत नीची उड़ान, तेज गति और घुमावदार रास्ता अपनाती हैं। यही वजह है कि इन्हें रोकना आधुनिक नौसेनाओं के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

लंबी रेंज, दूर से सटीक हमला

LR-AShM की अनुमानित मारक क्षमता लगभग 1500 किलोमीटर बताई जा रही है। इसका मतलब यह है कि भारत अब समुद्र में दूर मौजूद दुश्मन के युद्धपोतों, विध्वंसकों और यहां तक कि एयरक्राफ्ट कैरियर को भी सुरक्षित दूरी से निशाना बना सकेगा। यह क्षमता समुद्री क्षेत्र में भारत को निर्णायक रणनीतिक बढ़त देती है।

स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भर भारत

यह मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित की जा रही है, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
DRDO के अनुसार, LR-AShM के अब तक दो परीक्षण सफल हो चुके हैं, जिनमें एक सफल नाइट ट्रायल भी शामिल है। तीसरा परीक्षण भी जल्द किए जाने की संभावना है। 77वें गणतंत्र दिवस पर इसकी झलक ने साफ संकेत दिया कि भारत भविष्य के समुद्री युद्धों के लिए खुद को पूरी तरह तैयार कर रहा है।

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