कहते हैं कि पिता के कंधे सिर्फ घर की जिम्मेदारियां ही नहीं उठाते, बल्कि वो बच्चों के ढहते हुए सपनों को संजीवनी देने का दम भी रखते हैं। उत्तर प्रदेश के हाथरस से आई एक तस्वीर ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। यह कहानी किसी फिल्म की पटकथा नहीं, बल्कि एक गरीब मजदूर पिता के संघर्ष और उसकी दिव्यांग बेटी के अडिग हौसले की हकीकत है। सोशल मीडिया पर इस समय एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने न केवल लोगों का दिल जीत लिया है, बल्कि समाज के सामने बेटियों की शिक्षा की एक बहुत बड़ी मिसाल पेश की है। यह भावुक कर देने वाली दास्तां हाथरस के रहने वाले प्यारेलाल और उनकी बहादुर बेटी की है। यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 के दौरान जब परीक्षा केंद्रों पर गहमागहमी थी, तब हाथरस के एक सेंटर पर नजारा कुछ अलग ही था। वहां एक पिता अपनी जवान बेटी को अपनी पीठ पर बैठाकर लाया था। बेटी चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ है, लेकिन उसकी आंखों में शिक्षा की जो चमक है, उसे उसके पिता बुझने नहीं देना चाहते।
एक दर्दनाक हादसे ने छीन लिए थे पैर, पर नहीं टूटा हौसला
प्यारेलाल की बेटी पहले सामान्य बच्चों की तरह ही स्कूल जाती थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जब वह नौवीं कक्षा में थी, तब एक दर्दनाक हादसे में उसने अपने दोनों पैर खो दिए। एक पल में उस मासूम की पूरी दुनिया बदल गई। चलना-फिरना तो दूर, बिस्तर से उठना भी दूभर हो गया। किसी भी साधारण परिवार के लिए यह एक ऐसा सदमा होता जो भविष्य के सारे रास्ते बंद कर देता। लेकिन प्यारेलाल ने हार नहीं मानी। उन्होंने ठान लिया था कि उनकी बेटी की दिव्यांगता उसके सपनों की राह में रोड़ा नहीं बनेगी।
आज वह बेटी 10वीं और 12वीं की दहलीज पर है और अपने भविष्य को संवारने के लिए बोर्ड की परीक्षाएं दे रही है। हादसे के बाद से ही प्यारेलाल अपनी बेटी के लिए उसके पैर बन गए हैं। परीक्षा केंद्र तक जाने के लिए न तो उनके पास कोई बड़ी गाड़ी है और न ही सुख-सुविधाएं, बस है तो एक पिता का अटूट विश्वास।
मजदूरी कर संवार रहे हैं बेटी का भविष्य
प्यारेलाल पेशे से एक साधारण मजदूर हैं। दिन भर पसीना बहाकर वह जो कमाते हैं, उससे घर का चूल्हा जलता है। आर्थिक तंगहाली के बावजूद उन्होंने कभी बेटी की पढ़ाई को बोझ नहीं समझा। मजदूरी कर पिता संवार रहे हैं बेटी का भविष्य, यह बात हाथरस की गलियों में अब हर कोई गर्व से कह रहा है। परीक्षा के दिनों में प्यारेलाल काम छोड़कर पहले अपनी बेटी को सेंटर तक पहुँचाते हैं।
वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे परीक्षा केंद्र तक पीठ पर बिठाकर ले जाते दिखे पिता को देखकर वहां मौजूद अन्य छात्र और अभिभावक भी ठिठक गए। उस समय प्यारेलाल के चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि एक संतोष था कि वह अपनी बेटी को उसके लक्ष्य के एक कदम और करीब ले जा रहे हैं।
हाथरस में पिता ने पेश की अद्भुत मिसाल
यह केवल एक पिता द्वारा बेटी को स्कूल पहुँचाने का मामला नहीं है, बल्कि यह बेटियों की शिक्षा की अहमियत का एक बड़ा संदेश है। आज भी हमारे समाज के कई हिस्सों में बेटियों की पढ़ाई को नजरअंदाज कर दिया जाता है, और अगर बेटी दिव्यांग हो, तो उसे अक्सर घर की चारदीवारी में कैद कर दिया जाता है। लेकिन प्यारेलाल ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो शारीरिक अक्षमता और गरीबी कभी भी शिक्षा के आड़े नहीं आ सकती।
संघर्ष, हौसले और पिता-बेटी के अदम्य जज्बे की कहानी आज हर उस शख्स के लिए प्रेरणा है जो छोटी-छोटी मुश्किलों से हार मान लेता है। परीक्षा केंद्र पर मौजूद शिक्षकों और अधिकारियों ने भी पिता के इस समर्पण की सराहना की। लोगों का कहना है कि प्यारेलाल जैसे पिता समाज के असली नायक हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई जज्बे की तस्वीर
जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर आया, लोग प्यारेलाल की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। यूपी बोर्ड परीक्षा के बीच हाथरस की यह तस्वीर इस समय चर्चा का केंद्र बनी हुई है। नेटिजन्स इसे “इंसानियत और प्रेम का सबसे ऊंचा उदाहरण” बता रहे हैं। वीडियो में जिस तरह से पिता अपनी बेटी को संभालते हुए सीढ़ियां चढ़ रहे हैं, वह किसी को भी भावुक करने के लिए काफी है।