Varanasi। सिख पंथ के दसवें गुरु, श्री गुरु गोविंद सिंह जी के 359वें प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में रविवार को वाराणसी में एक भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। इस शोभायात्रा में सिख समाज के हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की।
शोभायात्रा का शुभारंभ और मार्ग
दोपहर करीब 12:30 बजे, गुरुबाग स्थित गुरुद्वारा से शोभायात्रा का आगाज हुआ। शोभायात्रा ने सात किलोमीटर लंबा सफर तय करते हुए सिगरा, साजन तिराहा, मलदहिया, लहुराबीर, कबीरचौरा, और मैदागिन से होते हुए शाम 6:30 बजे गुरुद्वारा नीचीबाग में समापन किया। इस दौरान श्रद्धालु पूरे रास्ते में शबद कीर्तन करते हुए चलते रहे, जो वातावरण को भक्तिमय बना रहा था।

शोभायात्रा की साज-सज्जा और आकर्षण
इस शोभायात्रा में गुरु ग्रंथ साहिब की सवारी गाड़ी को फूल-मालाओं और विद्युत झालरों से बेहद आकर्षक तरीके से सजाया गया था। मार्ग में कई कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया, जिनमें अमृतसर से आई गतका पार्टी का शस्त्र कला प्रदर्शन प्रमुख था। उनकी करतबबाजी, जैसे आंख बंद करके नारियल फोड़ना, दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
स्वच्छता का संदेश और श्रद्धालुओं की भागीदारी
इस शोभायात्रा में श्रद्धालुओं ने ‘स्वच्छ काशी, सुंदर काशी’ का संदेश दिया। शोभायात्रा के दौरान, लोग मार्ग की सफाई करते हुए और पुष्प वर्षा करते हुए चल रहे थे। खासकर, बच्चों ने स्वच्छता का संदेश फैलाया, उनके हाथों में ‘स्वच्छ काशी, सुंदर काशी’ का बैनर था और वे सड़क की सफाई करते हुए आगे बढ़ रहे थे। यह दृश्य शोभायात्रा की पवित्रता और गरिमा को और भी अधिक बढ़ा रहा था।

आगामी कार्यक्रमों की जानकारी
गुरु गोविंद सिंह जी का प्रकाशोत्सव 27 दिसंबर को मनाया जाएगा। इस अवसर पर 26 दिसंबर को गुरुद्वारा गुरुबाग में रात्रि सात बजे से दस बजे तक गुरु का अटूट लंगर आयोजित किया जाएगा। वहीं 27 दिसंबर को गुरुद्वारा गुरुबाग में सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक लंगर सेवा चलेगी। इसके अतिरिक्त, 27 दिसंबर को गुरुद्वारा नीचीबाग में रागी जत्था संगत को निहाल करेगा। इस दौरान भाई राय सिंह और भाई बलजीत सिंह कथा-कीर्तन के माध्यम से संगत को निहाल करेंगे।
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समाप्ति के उपरांत श्रद्धालुओं की सेवा
शोभायात्रा के समापन के बाद, श्रद्धालुओं के लिए गुरुद्वारा नीचीबाग में विशेष आरती का आयोजन किया गया। गुरुबाग और नीचीबाग के मुख्य ग्रंथी भाई रंजीत सिंह और भाई जगतार सिंह ने बताया कि इस दिन की धार्मिक महत्वता और गुरु गोविंद सिंह जी के उपदेशों का पालन करते हुए कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
यह शोभायात्रा न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक थी, बल्कि यह वाराणसी के लोगों में भाईचारे, स्वच्छता और सामाजिक एकता का संदेश भी दे रही थी।







