GRP मोबाइल बरामदगी अभियान: यात्रियों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
ट्रेन से सफर करने वालों के लिए मोबाइल फोन सिर्फ एक डिवाइस नहीं, बल्कि जरूरी दस्तावेज, संपर्क और यादों का जरिया भी होता है। ऐसे में यात्रा के दौरान मोबाइल गुम हो जाए तो परेशानी बढ़ जाती है। इसी बीच GRP ने बरेली जंक्शन पर एक खास अभियान चलाकर 56 गुम मोबाइल फोन बरामद किए और उन्हें उनके असली मालिकों को सौंप दिया।
इन मोबाइलों की कुल कीमत करीब 10 लाख रुपये आंकी गई है। लंबे समय से फोन की तलाश कर रहे यात्रियों के लिए यह खबर राहत देने वाली रही।

कैसे चला मोबाइल बरामदगी अभियान
यह पूरी कार्रवाई एक सुनियोजित अभियान के तहत की गई। GRP बरेली जंक्शन की टीम ने सर्विलांस और तकनीकी मदद से गुमशुदा मोबाइल ट्रेस किए। कई राज्यों—उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार और झारखंड—में छापेमारी कर फोन रिकवर किए गए।
अधिकारियों के मुताबिक, रेलवे अपर पुलिस महानिदेशक प्रकाश डी. के मार्गदर्शन और पुलिस महानिरीक्षक आर.के. भारद्वाज के निर्देशन में यह अभियान चलाया गया। पुलिस अधीक्षक रेलवे आशुतोष शुक्ला के आदेश पर टीम ने लगातार काम किया।

सर्विलांस और तकनीक का इस्तेमाल
आज के समय में तकनीक अपराध रोकने में बड़ी भूमिका निभा रही है। इस अभियान में भी GRP सर्विलांस टीम ने अहम योगदान दिया। मोबाइल की लोकेशन ट्रैक कर उसे बरामद किया गया।
पुलिस उपाधीक्षक रेलवे मुरादाबाद अनिल कुमार वर्मा के निर्देशन में प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार वर्मा और उनकी टीम ने दिन-रात मेहनत की। टीम में उप निरीक्षक अनुराग प्रताप सिंह, हेड कांस्टेबल तेजप्रकाश सिंह, मुख्तार आलम, मोहित शुक्ला, कपिल कुमार और अक्षय कुमार शामिल रहे।
साथ ही सर्विलांस शाखा मुरादाबाद के आरक्षी संदीप कुमार, कांस्टेबल मोहम्मद आलम, शिव कुमार और इरफान खान की भी अहम भूमिका रही।

कार्यक्रम में लौटाए गए मोबाइल
शुक्रवार को थाना परिसर में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां GRP मोबाइल रिकवरी के तहत बरामद किए गए फोन संबंधित मालिकों को विधिवत सौंपे गए।
जिन लोगों को लगा था कि उनका फोन अब कभी नहीं मिलेगा, उनके चेहरे पर फोन पाकर साफ खुशी दिख रही थी। कई यात्रियों ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनका मोबाइल दोबारा मिल सकेगा।
रेलवे पुलिस ने इस मौके पर लोगों को भरोसा दिलाया कि यात्रियों की सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा उनकी प्राथमिकता है।

यात्रियों के लिए क्या है संदेश
मोबाइल गुम होने पर अक्सर लोग सोचते हैं कि अब उसे ढूंढ पाना मुश्किल है। लेकिन GRP शिकायत दर्ज कराने से फोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
अधिकारियों ने अपील की है कि जैसे ही मोबाइल या अन्य सामान गुम हो, तुरंत संबंधित थाने में सूचना दें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, उतनी ही जल्दी कार्रवाई संभव होगी।
कई मामलों में देरी के कारण मोबाइल दूसरे राज्यों तक पहुंच जाते हैं। समय रहते रिपोर्ट करने से ट्रेस करना आसान हो जाता है।
लगातार जारी रहेगा अभियान
रेलवे पुलिस का कहना है कि यह एक बार की कार्रवाई नहीं है। GRP अभियान आगे भी जारी रहेगा। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर ऐसे अभियान चलाए जाते रहेंगे।
रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में हर दिन हजारों लोग सफर करते हैं। ऐसे में मोबाइल गुम होने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। लेकिन इस तरह की कार्रवाई से यात्रियों में भरोसा बढ़ता है कि उनकी शिकायत पर काम हो रहा है।
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रेलवे पुलिस की भूमिका
अक्सर लोग समझते हैं कि रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा सिर्फ औपचारिकता है, लेकिन GRP रेलवे पुलिस की जिम्मेदारी काफी बड़ी होती है। यात्रियों की सुरक्षा, चोरी और गुमशुदगी के मामलों की जांच, और अपराधियों पर नजर रखना—ये सब उनकी ड्यूटी का हिस्सा है।
इस मोबाइल बरामदगी अभियान ने दिखाया है कि सही दिशा में प्रयास किए जाएं तो गुम सामान भी वापस मिल सकता है।
रेलवे पुलिस का कहना है कि वे तकनीकी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि अपराध पर नियंत्रण रखा जा सके।
कुल मिलाकर, इस अभियान से यह साफ है कि अगर समय पर शिकायत दर्ज कराई जाए और पुलिस को पूरी जानकारी दी जाए, तो गुम मोबाइल वापस मिल सकता है। GRP की इस पहल ने न सिर्फ 56 लोगों को उनका फोन लौटाया, बल्कि यात्रियों का भरोसा भी मजबूत किया है।
यात्रियों के लिए यही सलाह है कि सफर के दौरान अपने सामान का ध्यान रखें और किसी भी तरह की समस्या होने पर तुरंत रेलवे पुलिस से संपर्क करें।
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