स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में काकोरी कांड के नायक पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को Gorakhpur सेंट्रल जेल में 19 दिसंबर 1927 को फांसी दी गई थी उन्हीं की याद में गोरखपुर सेंट्रल जेल में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एसपी जेल दिलीप पाण्डेय जेलर अरुण कुमार कुशवाहा ने गोरखपुर जिला जेल स्थित पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई । पंडित राम प्रसाद बिस्मिल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रांतिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी थे जिन्हें 30 वर्ष की आयु में ब्रिटिश सरकार ने फांसी दे दी थी । वह काकोरी कांड जैसी कई घटनाओं में शामिल थे।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण था उस गोरखपुर जेल में सामूहिक सुखना, वंदना और आरती का आयोजन। इस ऐतिहासिक स्थल पर पहुंचकर प्रतिभागियों ने दीप प्रज्वलन किया और पुष्प अर्पित करते हुए उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपनी जान की आहुति दी। श्रद्धांजलि देने के बाद उपस्थित जनसमूह ने फांसी स्थल पर जाकर उन महान बलिदानियों के राष्ट्र के प्रति दिए गए योगदान को याद किया।
कार्यक्रम के संयोजक का संदेश
कार्यक्रम के संयोजक बृजेश राम त्रिपाठी ने इस अवसर पर काकोरी कांड के अमर बलिदानियों के जीवन को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। त्रिपाठी ने स्वतंत्रता संग्राम में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला ख़ान और ठाकुर रोशन सिंह के योगदान, उनके साहस, त्याग, अनुशासन और राष्ट्रसेवा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह बलिदानी हमारे लिए आदर्श हैं और हमें उनके बताए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है।

उपस्थित गणमान्य लोग
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में गोरखपुर जिले के कई प्रमुख लोग उपस्थित थे। जिला कारागार के जेल अधीक्षक डीके पांडे, जेलर अरुण कुमार कुशवाहा, पार्षद अशोक मिश्रा, हरि नारायणधार दुबे, एडवोकेट शंकर शरण दुबे, पूर्व सैनिक रमेश मनी त्रिपाठी, अखिलेश त्रिपाठी, प्रदीप त्रिपाठी, देवेश आनंद सहित दर्जनों की संख्या में लोग इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उपस्थित थे। सभी ने एकजुट होकर स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया।

बलिदानियों के योगदान पर चर्चा
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला ख़ान और ठाकुर रोशन सिंह के योगदान को इस कार्यक्रम में विस्तार से चर्चा में लाया गया। बिस्मिल का जीवन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान पलों का प्रतीक है, उन्होंने अपने शौर्य और साहस से देशवासियों को प्रेरित किया। अशफाकउल्ला ख़ान और ठाकुर रोशन सिंह ने भी अपने जीवन में देश की सेवा और बलिदान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इन वीर सपूतों के जीवन ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम को गति दी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी संघर्ष और त्याग का संदेश दिया।
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