गोंडा के सुदाई पुरवा गांव में 9 बीघा जमीन के विवाद में हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा की बेरहमी से हत्या कर दी गई। सगे भाई और पट्टीदारों ने लाठी-डंडों से हमला किया। पुलिस ने 3 आरोपियों को जेल भेजा, मुख्य आरोपी भाई अभी भी फरार।
उत्तर प्रदेश के गोंडा से एक ऐसी खबर आई है जिसने भाई-भाई के पवित्र रिश्ते और समाज की संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ 9 बीघा जमीन का विवाद इतना बढ़ा कि अपनों ने ही अपनों का खून बहा दिया। लखनऊ हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा की उनके ही सगे भाई और पट्टीदारों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस खौफनाक मंजर का एक दिल दहला देने वाला वीडियो भी सामने आया है, जिसमें साफ दिख रहा है कि कैसे कानून को ताक पर रखकर एक बुजुर्ग वकील पर जानलेवा हमला किया गया। गोंडा के सुदाई पुरवा गांव में हुए इस हत्याकांड के बाद पूरे इलाके में तनाव फैला हुआ है। पुलिस ने स्थिति को बिगड़ते देख गांव को छावनी में तब्दील कर दिया है। हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील की हत्या की इस खबर ने न केवल गोंडा बल्कि लखनऊ के कानूनी गलियारों में भी आक्रोश भर दिया है।
क्या दिख रहा है वायरल वीडियो में?
जो वीडियो सामने आया है, वह इस पूरे कत्ल की कहानी खुद बयां कर रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि एक ट्रैक्टर विवादित खेत की जुताई कर रहा है। वहां करीब 10-12 लोग हाथों में लाठी-डंडे, हॉकी और धारदार हथियार लेकर खड़े हैं। वीडियो के बैकग्राउंड में आवाज आ रही है— “देखिए, हमने इस जमीन का बैनामा कराया है और इसे दबंगई से जोता जा रहा है।” तभी वीडियो में 67 वर्षीय वकील सुभाष चंद्र मिश्रा नजर आते हैं। वहां मौजूद एक शख्स हॉकी लेकर उनके पास पहुँचता है। देखते ही देखते बहस हाथापाई में बदल जाती है और फिर शुरू होता है मौत का तांडव। हमलावर बेधड़क लाठियां बरसाने लगते हैं। वीडियो के अंत में चीख-पुकार मचती है और आवाज आती है— “पुलिस आ गई, भागो!” साथ ही यह भी सुनाई देता है कि “ट्रैक्टर चढ़ा दिया।” यह वीडियो अब पुलिस के लिए जांच का सबसे बड़ा और अहम सबूत बन चुका है।
30 साल पुराना विवाद और एक ‘वसीयत’ की कहानी
इस पूरे खूनी संघर्ष की जड़ें 30 साल पुरानी हैं। अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा के पिता पारस मिश्रा के चार बेटे थे। विवाद की शुरुआत तब हुई जब उनके चाचा जगदंबा मिश्रा ने अपनी 9 बीघा जमीन की वसीयत अपने तीन भतीजों (सुभाष, दिनेश और अभय) के नाम कर दी। उन्होंने अपने एक भतीजे अरुण मिश्रा (जो पेशे से क्लर्क हैं) के नाम जमीन नहीं की, क्योंकि अरुण को पिता की जगह अनुकंपा पर सरकारी नौकरी मिल चुकी थी। चाचा की मौत के बाद जमीन उनकी पत्नी रामावती के नाम हुई। लेकिन खेल तब बिगड़ा जब करीब दो साल पहले सगे छोटे भाई अरुण मिश्रा ने चाची को बहला-फुसलाकर वह जमीन अपने और गांव के कुछ पट्टीदारों के नाम लिखवा ली। जमीन का बैनामा होते ही विवाद सड़कों पर आ गया। वरिष्ठ वकील सुभाष चंद्र मिश्रा ने इसके खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया, जहाँ से उन्हें जमीन पर कब्जा लेने का आदेश मिला।
इधर कोर्ट का आदेश और खूनी रविवार
शनिवार को सुभाष चंद्र मिश्रा कोर्ट का लिखित आदेश लेकर करनैलगंज कोतवाली पहुँचे थे। पुलिस ने उन्हें कब्जा लेने की अनुमति दी। रविवार को जब वे अपने बेटों और भाइयों के साथ खेत जोतने पहुँचे, तो उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि वहां मौत उनका इंतजार कर रही है। विपक्षी पक्ष के 15-20 लोग पहले से ही घात लगाए बैठे थे। आरोप है कि जैसे ही ट्रैक्टर चला, हमलावरों ने पथराव और फायरिंग शुरू कर दी। एक गोली तो वकील के बेटे के कान के पास से सनसनाती हुई निकल गई। इसके बाद लाठी-डंडों से उन पर तब तक हमला किया गया जब तक कि वे अधमरे नहीं हो गए। गोंडा मेडिकल कॉलेज ले जाते समय रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके बेटे अभिषेक और दो भतीजे भी इस हमले में गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने बयां की दरिंदगी
अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में जो खुलासे हुए हैं, वे दिल बैठाने वाले हैं। डॉक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के साथ पीएम किया, जिसमें शरीर पर 8 गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। उनकी मौत का मुख्य कारण सिर पर लगी गहरी चोट थी, जिससे दिमाग की नसें फट गईं और अंदरूनी ब्लीडिंग के कारण उनकी जान चली गई।
पुलिस ने की कार्यवाई: 3 गिरफ्तार, सगा भाई अब तक फरार
इस हत्याकांड के बाद गोंडा पुलिस एक्शन मोड में है। एसपी विनीत जायसवाल ने आरोपियों की धरपकड़ के लिए चार टीमें गठित की हैं। पुलिस ने 24 घंटे के भीतर मुख्य आरोपियों में शामिल पूर्व प्रधान हरि शरण मिश्रा, राम केवल मिश्रा और संतोष कुमार मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि मुख्य साजिशकर्ता और सगा छोटा भाई अरुण मिश्रा अभी भी फरार है। पुलिस कई ठिकानों पर दबिश दे रही है, लेकिन वह अभी भी गिरफ्त से बाहर है। वकीलों के आक्रोश को देखते हुए आरोपियों को बड़ी गोपनीयता के साथ कोर्ट में पेश किया गया।
अधिवक्ता को नम आंखों से दी गई मुखाग्नि
करनैलगंज के सरयू घाट पर जब अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा का पार्थिव शरीर पहुँचा, तो हर आंख नम थी। उनके बड़े बेटे अभिषेक मिश्रा, जो खुद भी एक वकील हैं, ने कांपते हाथों से अपने पिता को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के दौरान स्थानीय विधायक बावन सिंह सहित हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। लोगों का कहना है कि एक ऐसा व्यक्ति जिसने पूरी उम्र दूसरों को न्याय दिलाने में लगा दी, उसे खुद इस तरह के अन्याय का सामना करना पड़ा।