गोंडा जिले में इस वर्ष नवरात्रि पर्व बड़ी धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। पूरे जिले में श्रद्धालुओं ने माता दुर्गा की आराधना के लिए लगभग ढाई हजार दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना की थी। नौ दिनों तक श्रद्धालु सुबह-शाम माता रानी की पूजा, अर्चन और भजन-कीर्तन में लीन रहे। घरों से लेकर पूजा पंडालों तक हर ओर भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला।
दशमी के दिन इन प्रतिमाओं का विधिवत विसर्जन किया गया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, भक्तों के जयकारे और अबीर-गुलाल की रंगत ने पूरे जिले को उत्सवमय बना दिया। गोंडा मुख्यालय स्थित खैरा मंदिर के पोखरे पर हजारों प्रतिमाओं के विसर्जन का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इस दौरान मौजूद रही, जिसने पूरे माहौल को और भी भव्य बना दिया।
दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ-साथ खैरा रामलीला मैदान में दशहरा उत्सव का आयोजन भी हुआ। परंपरा के अनुसार पहले मेघनाद का और उसके बाद रावण का दहन किया गया। रावण दहन के समय हजारों लोग मैदान में मौजूद रहे और जैसे ही अग्नि की लपटों में रावण की प्रतिमा धधक उठी, पूरा वातावरण “जय श्रीराम” और “राम-लक्ष्मण हनुमान की जय” के नारों से गूंज उठा। आतिशबाजी और रोशनी से सजा आसमान इस क्षण को और भी यादगार बना गया।
जिले भर में दुर्गा विसर्जन और दशहरा उत्सव को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी थी। गोंडा पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त रूप से पूरे जिले में विशेष सुरक्षा प्रबंधन किया था, ताकि सभी आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सकें। जगह-जगह पुलिस बल की तैनाती, ड्रोन कैमरों से निगरानी और गोताखोरों की मौजूदगी ने इस बार के पर्व को पूरी तरह सुरक्षित बना दिया।
गोंडा में नवरात्रि और दशहरा उत्सव सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समन्वय का प्रतीक भी है। पूजा पंडालों में सभी वर्ग और समुदाय के लोग श्रद्धा और उत्साह के साथ शामिल हुए। छोटे-बड़े सभी ने मां दुर्गा की भक्ति में भाग लिया और दशहरा उत्सव में प्रभु श्रीराम की लीलाओं का आनंद उठाया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि गोंडा जिले की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर साल यहां नवरात्रि और दशहरा का आयोजन नए उत्साह और भव्यता के साथ किया जाता है। इस बार भी पर्व ने जिले को एकजुटता, भक्ति और सांस्कृतिक गौरव का संदेश दिया।
