Lucknow Gomti Green Corridor Phase 2 : लखनऊ के लिए राहत भरी खबर आई है। शहरवासियों को ट्रैफिक जाम से जल्द निजात मिलने जा रही है, क्योंकि गोमती ग्रीन कॉरिडोर का दूसरा चरण दिसंबर 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही रोजाना एक लाख से अधिक वाहन बिना रुके सफर कर सकेंगे। यह 28 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर 2100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार किया जा रहा है, जो लखनऊ के करीब दस लाख लोगों के सफर को आसान बनाएगा।
लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को चार चरणों में बना रहा है। पहले फेज में आईआईएम रोड से पक्का पुल तक का काम लगभग पूरा हो चुका है, और वहां वाहनों की आवाजाही भी शुरू हो गई है। अब दूसरे फेज की बारी है, जो पक्का पुल से पिपराघाट तक तैयार किया जा रहा है। यह हिस्सा दिसंबर 2025 तक पूरा हो जाएगा। तीसरा चरण पिपराघाट से शहीद पथ तक और चौथा शहीद पथ से किसान पथ तक बनाया जाएगा। पूरी परियोजना 2027 तक पूरी होने की संभावना है।
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प्रोजेक्ट की कुल लागत 2078 करोड़ रुपये
गोमती ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट की कुल लागत 2078 करोड़ रुपये आंकी गई है। हाल ही में 15वें वित्त आयोग ने इसके लिए 70 करोड़ रुपये अतिरिक्त बजट मंजूर किया है। वहीं, आवास विभाग ने दो पुलों के निर्माण के लिए 60 करोड़ रुपये जारी किए हैं। दूसरे फेज में डालीगंज, निशातगंज, हनुमान सेतु और कुकरैल क्षेत्रों में तेजी से काम हो रहा है। यहां पिलर और पाइलिंग का काम लगभग पूरा होने की कगार पर है।
एलडीए के इंजीनियरों के अनुसार, निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजना पूरा हो जाएगी। इस फेज की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी कुकरैल नदी पर 240 मीटर लंबा चार लेन पुल। यह पुल निशातगंज से कुकरैल तक के बांध को चौड़ा करेगा, जिससे भारी वाहनों की आवाजाही में आसानी होगी। इससे गोमतीनगर से पुराने लखनऊ तक की दूरी आधी हो जाएगी।
ट्रैफिक दबाव में 40% तक कमी | Lucknow Gomti Green Corridor Phase 2
यह कॉरिडोर लखनऊ के भीड़भाड़ वाले इलाकों जैसे आईआईएम रोड, पक्का पुल, डालीगंज, हनुमान सेतु, गोमतीनगर, पिपराघाट और किसान पथ को जोड़ेगा। वर्तमान में इन क्षेत्रों में संकरी सड़कों और जाम के कारण लोग परेशानी झेलते हैं। अनुमान है कि प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद शहर के प्रमुख रास्तों पर ट्रैफिक का दबाव 40 प्रतिशत तक कम हो जाएगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट लोगों का समय और ईंधन दोनों बचाएगा। साथ ही पर्यावरणीय दृष्टिकोण से यह ग्रीन कॉरिडोर प्रदूषण कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एलडीए का लक्ष्य है कि दिसंबर 2025 तक फेज 2 चालू कर दिया जाए। शेष दो चरण 2027 तक पूरे करने की योजना है।
यह प्रोजेक्ट न केवल सड़क संपर्क का विस्तार करेगा बल्कि लखनऊ को जाम और प्रदूषण से राहत देकर एक स्वच्छ व तेज़ यातायात प्रणाली भी प्रदान करेगा। दस लाख से अधिक लोग प्रत्यक्ष रूप से इस कॉरिडोर से लाभान्वित होंगे।