भारतीय सर्राफा बाजार के इतिहास में 20 मार्च 2026 का दिन निवेशकों के लिए किसी बड़े झटके से कम साबित नहीं हो रहा है। आज सुबह जैसे ही बाजार खुला, सोने-चांदी की कीमतों में ऐसी सुनामी आई कि देखने वालों के होश उड़ गए। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और हाजिर बाजार, दोनों ही जगहों पर कीमती धातुओं की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। चांदी में आज 31,462 रुपये प्रति किलोग्राम की रिकॉर्ड तोड़ गिरावट आई है, जिसके बाद इसकी कीमत 2,28,300 रुपये के स्तर पर आ गई है। सोने का हाल भी कुछ अलग नहीं है, जहाँ प्रति 10 ग्राम पर 11,328 रुपये की बड़ी चपत लगी है। बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक दबाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता ने मिलकर ‘सोने की लंका’ को हिलाकर रख दिया है।
फेडरल रिजर्व का फैसला और डॉलर की ‘दहाड़’
इस भारी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा और तात्कालिक कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ताजा फैसला माना जा रहा है। फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने (Status Quo) का निर्णय लिया है, जिसने बाजार की उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया जो जल्द ही रेट कट (Rate Cut) की आस लगाए बैठे थे। जब ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो निवेशक सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों से पैसा निकालकर डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स की ओर रुख करते हैं। डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती ने सीधे तौर पर सोने और चांदी की चमक को फीका कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव गिरकर 4,600 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गए हैं, जिसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर दिख रहा है।
इजरायल-ईरान तनाव और ‘स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज’ का संकट
कीमतों में आई इस गिरावट की एक और गहरी परत इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है। हालांकि, आमतौर पर युद्ध की स्थिति में सोने के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है। ‘स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज’ में व्यापारिक गतिविधियों के रुकने और समुद्री रास्तों पर पाबंदी की वजह से वैश्विक आयात-निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। तेल की कीमतों में आए उछाल और वैश्विक सप्लाई चेन के चरमराने से निवेशकों के बीच नकदी (Cash) जुटाने की होड़ मच गई है। बड़े फंड हाउसेस और निवेशक अपने ‘मार्जिन कॉल’ को पूरा करने के लिए सोने और चांदी की जमकर बिकवाली कर रहे हैं। इस ‘पैनिक सेलिंग’ ने कीमतों को पाताल में धकेल दिया है।
MCX पर चांदी की ‘फ्री फॉल’ और औद्योगिक मांग में कमी
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की स्थिति सबसे ज्यादा नाजुक बनी हुई है। मई वायदा अनुबंध में चांदी देखते ही देखते 25,000 रुपये से ज्यादा टूट गई। चांदी न केवल एक कीमती धातु है, बल्कि इसका उपयोग बड़े पैमाने पर औद्योगिक कार्यों (Industrial Use) में भी होता है। वैश्विक आर्थिक मंदी की आहट और सप्लाई चेन में व्यवधान के कारण चांदी की औद्योगिक मांग में भारी कमी आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सप्लाई रूट बहाल नहीं होते, तब तक चांदी की कीमतों में स्थिरता आना मुश्किल है। चांदी का इस तरह से टूटना रिटेल ज्वेलर्स और उन छोटे निवेशकों के लिए चिंता का विषय है जिन्होंने हाल ही में ऊंचे दामों पर खरीदारी की थी।
प्रॉफिट बुकिंग या मार्केट करेक्शन: क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
बाजार के दिग्गज विश्लेषकों का मानना है कि सोने और चांदी की कीमतें पिछले कुछ महीनों से अपने उच्चतम स्तर (All-time High) पर थीं। ऐसे में एक बड़े ‘मार्केट करेक्शन’ की उम्मीद पहले से ही जताई जा रही थी। मार्च के शुरुआती हफ्तों में आई बेतहाशा तेजी के बाद, अब निवेशक मुनाफावसूली (Profit Booking) कर रहे हैं। इजरायल-ईरान युद्ध की आशंकाओं ने जो डर पैदा किया था, वह अब कीमतों में पहले ही समाहित (Priced-in) हो चुका है। अब बाजार की नजरें पूरी तरह से इस बात पर टिकी हैं कि युद्ध और कितना खिंचता है और क्या फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में अपने रुख में कोई नरमी लाता है।
आम खरीदारों और निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
कीमतों में आई इस ऐतिहासिक गिरावट ने आम जनता के लिए शादी-ब्याह के सीजन से पहले एक मौका भी खोल दिया है। जो लोग सोने को 1.60 लाख रुपये के स्तर पर खरीदने से कतरा रहे थे, उनके लिए 1.45 लाख रुपये के आसपास का भाव आकर्षक हो सकता है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों की सलाह है कि इस समय बाजार में ‘वोलाटाइल’ (अस्थिर) स्थिति बहुत ज्यादा है। गिरावट और भी गहरी हो सकती है, इसलिए एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय ‘बाय ऑन डिप्स’ (गिरावट पर किश्तों में खरीद) की रणनीति अपनाना ज्यादा सुरक्षित होगा। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम नहीं होता, तब तक कीमतों में हर दिन बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।



