सनातन धर्म में Kartik Purnima के दिन गंगा स्नान का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। इस दिन भक्तगण हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज, बरेली, गढ़मुक्तेश्वर जैसे पवित्र गंगा घाटों पर स्नान करते हैं। ऐसा माना जाता है कि गंगा में स्नान करने से सभी पाप समाप्त हो जाते हैं। इस दिन भक्तों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए, यूपी के गंगा घाटों पर सुरक्षा के विशेष उपाय किए गए हैं।
कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का महत्व
आज देशभर में कार्तिक पूर्णिमा धूमधाम से मनाई जा रही है, और इस दिन गंगा स्नान का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। लाखों श्रद्धालु अपनी आस्था को लेकर पवित्र गंगा में डुबकी लगाने के लिए हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज, बरेली, गढ़मुक्तेश्वर जैसे प्रमुख गंगा घाटों पर पहुंचे हैं। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा में स्नान करने से पापों का नाश होता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन श्रद्धालु अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए गंगा में डुबकी लगाते हैं और पुण्य की प्राप्ति का आशीर्वाद लेते हैं। इस धार्मिक अवसर पर गंगा घाटों पर भारी भीड़ उमड़ी है, और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो।
हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
हरिद्वार में इस दिन हर की पौड़ी पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ था, जबकि वाराणसी और प्रयागराज में भी गंगा स्नान के लिए लाखों लोग पहुंचे। काशी में तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। अस्सी घाट से लेकर राजघाट तक भक्तों की भीड़ देखने को मिली। सभी श्रद्धालु गंगा में स्नान कर पुण्य अर्जित करने के बाद मां गंगा से आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा घाटों पर एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु आकर पवित्र जल में डुबकी लगाते हुए अपने परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना कर रहे थे।

बरेली में रामगंगा में स्नान, श्रद्धालुओं की भारी भीड़
कार्तिक पूर्णिमा के दिन बरेली में भी लाखों श्रद्धालुओं ने रामगंगा में डुबकी लगाई। रामगंगा घाट पर सुबह से ही भक्तों का आना शुरू हो गया था, और सूरज के निकलते ही यहां भक्तों की भारी भीड़ जुट गई। बरेली प्रशासन ने भी विशेष व्यवस्थाएं की थीं ताकि भक्तों को स्नान करने में कोई परेशानी न हो। रामगंगा घाट पर भक्तों ने पवित्र नदी में स्नान कर अपने पापों का प्रक्षालन किया और मां गंगा से अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
देव दीपावली: गंगा घाटों पर दीपों की जगमगाहट
कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली का पर्व मनाया जाता है, जिसमें विशेष रूप से काशी में गंगा घाटों पर दीपों की रोशनी से अद्भुत दृश्य बनते हैं। देव दीपावली, दीपावली के 15 दिन बाद आती है, और इस दिन मान्यता है कि देवता खुद धरती पर आकर दिवाली मनाते हैं। इस दिन काशी में विशेष रूप से देव दीपावली की धूम होती है। गंगा घाटों पर दीपों की रोशनी से अद्भुत दृश्य बनते हैं, जो श्रद्धालुओं के मन को शांति और खुशी से भर देते हैं। काशी में इस दिन गंगा की लहरों पर दीप जलाए जाते हैं, जो वहां आने वाले हर व्यक्ति को एक दिव्य अनुभव का अहसास कराते हैं।
गंगा स्नान का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व विशेष रूप से बढ़ जाता है, और इस दिन को लेकर श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था और विश्वास देखने को मिलता है। इस दिन को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहता है और सुरक्षा, साफ-सफाई और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस बार प्रशासन ने सभी गंगा घाटों पर स्नान के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न पड़े। साथ ही, गंगा घाटों पर भारी संख्या में पुलिस और स्वयंसेवी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं ताकि किसी प्रकार का अप्रिय घटनाक्रम न हो।
आज का दिन धार्मिक आस्था का प्रतीक है, जहां लाखों श्रद्धालु अपने जीवन के पवित्रता की कामना करते हुए गंगा में स्नान कर रहे हैं। यह दिन हर व्यक्ति के जीवन में एक नया आशीर्वाद लेकर आता है, जो उनके जीवन को और भी खुशनुमा बनाता है। कार्तिक पूर्णिमा का यह पर्व निश्चित रूप से आस्था, विश्वास और सांस्कृतिक धरोहर का पर्व है, जो भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को और भी मजबूत करता है।







