G RAM G क्या है? मनरेगा की जगह लेने वाले नए कानून की पूरी ABCD

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नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान केंद्र सरकार एक बड़ा और दूरगामी असर वाला विधेयक लोकसभा में पेश करने की तैयारी में है। यह विधेयक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह लेने वाला है, जिसे पिछले करीब 20 वर्षों से ग्रामीण रोजगार की रीढ़ माना जाता रहा है। सरकार की ओर से इस नए कानून का नाम ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ रखा गया है।

बीजेपी ने इस विधेयक के मद्देनज़र अपने सभी लोकसभा सांसदों को 15 से 19 दिसंबर तक सदन की कार्यवाही में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने के लिए व्हिप भी जारी किया है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यह नया G RAM G क्या है और मनरेगा की तुलना में इसमें क्या-क्या बदलेगा।

G RAM G का फुल फॉर्म क्या है?

G RAM G का पूरा नाम है—
विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)

अंग्रेज़ी में इसे
Viksit Bharat – Guarantee for Employment and Livelihood Mission (Rural)
कहा जा रहा है, जिसे संक्षेप में VB G RAM G नाम दिया गया है।

सरकार का दावा है कि यह योजना विकसित भारत 2047 के विज़न के अनुरूप तैयार की गई है।

मनरेगा की जगह क्यों लाया जा रहा नया कानून?

केंद्र सरकार के मुताबिक, मनरेगा ने पिछले दो दशकों में ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन अब समय के साथ इसमें संरचनात्मक बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। सरकार का कहना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, तकनीक और काम के स्वरूप में आए बदलावों को ध्यान में रखते हुए एक नया, अधिक व्यापक और आधुनिक कानून लाया जा रहा है।

यदि यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो जाता है और राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है, तो महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 को औपचारिक रूप से रद्द (Repeal) कर दिया जाएगा और उसकी जगह G RAM G लागू होगा।

नए कानून से क्या बदलेगा? (ABCD में समझिए)

A – काम के दिनों में बढ़ोतरी

मनरेगा में जहां ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलती थी, वहीं नए विधेयक में इसे बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रस्ताव है। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण परिवारों की आय में इजाफा होगा।

B – विकसित भारत 2047 से जुड़ाव

नया कानून सीधे तौर पर विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ा गया है। इसमें ग्रामीण बुनियादी ढांचे, जल संरक्षण, सड़क, तालाब, बागवानी और सामुदायिक विकास कार्यों पर ज्यादा जोर देने की बात कही गई है।

C – कानून का नया ढांचा

मनरेगा एक अधिकार आधारित कानून था, जिसमें काम मांगने पर रोजगार देना सरकार की कानूनी जिम्मेदारी थी। नए बिल में रोजगार की गारंटी तो दी जा रही है, लेकिन इसके स्वरूप और नियमों को लेकर अभी कई बातें स्पष्ट नहीं हैं। मजदूरी दर, काम का स्वरूप और राज्यों की भूमिका नए कानून के तहत तय होगी।

D – नाम और पहचान में बदलाव

नए कानून में महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। सरकार का तर्क है कि यह बदलाव नाम का नहीं, बल्कि व्यवस्था को आधुनिक बनाने का प्रयास है, जबकि विपक्ष इसे ऐतिहासिक विरासत से दूरी के रूप में देख रहा है।

संसद में पेश होने की स्थिति क्या है?

इस विधेयक की प्रतियां पहले ही लोकसभा सांसदों को वितरित की जा चुकी हैं। सरकार की योजना इसे मौजूदा शीतकालीन सत्र में ही संसद के पटल पर रखने की है। अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो मनरेगा की जगह यह नई योजना पूरे देश में लागू होगी।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह कदम ग्रामीण रोजगार को एक “नई परिभाषा” देगा और पारंपरिक मजदूरी मॉडल से आगे बढ़कर आजीविका आधारित दृष्टिकोण को मजबूत करेगा।

सरकार पर क्यों उठ रहे सवाल?

नए विधेयक के लोकसभा में पेश होने से पहले ही इस पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार आखिर महात्मा गांधी के नाम को क्यों हटा रही है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया और इतिहास के सबसे महान नेताओं में से एक हैं।

प्रियंका गांधी ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि सरकार को गांधी जी के नाम से इतनी आपत्ति क्यों है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार एक मजबूत अधिकार आधारित कानून को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

अब आगे क्या?

फिलहाल सबकी नजर संसद की कार्यवाही पर टिकी है। अगर यह विधेयक पास होता है, तो ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में यह अब तक का सबसे बड़ा बदलाव होगा। सरकार इसे सुधार और विस्तार बता रही है, जबकि विपक्ष इसे मनरेगा की आत्मा पर हमला मान रहा है।

असली तस्वीर तब साफ होगी, जब नया कानून ज़मीन पर लागू होगा और यह देखा जाएगा कि G RAM G वास्तव में ग्रामीण मजदूरों की ज़िंदगी को कितना बेहतर बना पाता है।

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