ईस्ट एशिया समिट में जयशंकर का पश्चिमी देशों पर कटाक्ष, बोले- ‘उपदेश देने वाले खुद नियम तोड़ते हैं’

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भारत ने ईस्ट एशिया समिट के मंच से वैश्विक पाखंड पर जोरदार प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट किया कि दुनिया के कुछ ताकतवर देश उपदेश देने में तो आगे हैं, लेकिन स्वयं उन नियमों का पालन नहीं करते। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा व्यापार को जानबूझकर सीमित किया जा रहा है, जिससे बाजार में असंतुलन और सप्लाई चेन पर भरोसा कमजोर हो रहा है। जयशंकर ने टेक्नोलॉजी, प्राकृतिक संसाधनों और वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धा के बारे में भी गंभीर चेतावनी दी। उनका कहना था कि दुनिया अब मल्टीपोलर हो रही है और ऐसे में नियम केवल चुनिंदा देशों के फायदे के लिए नहीं होने चाहिए।

जयशंकर ने विशेष रूप से पश्चिमी देशों के बाजार और संसाधनों के संदर्भ में विरोधाभास उजागर किया। उन्होंने कहा कि कई देश खुला बाजार और फ्री ट्रेड की बात करते हैं, लेकिन असल में एनर्जी फ्लो और एक्सेस पर रोक लगा देते हैं, जिससे पूरी दुनिया में संकट पैदा होता है। उन्होंने यह भी कहा कि टेक्नोलॉजी, टैलेंट और मार्केट का असली खेल अब किसी से छुपा नहीं है। भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि दुनिया को बदलते हालात के अनुसार सहयोग और समझ के आधार पर आगे बढ़ना होगा। गाजा या यूक्रेन के संघर्षों के उदाहरण देते हुए जयशंकर ने कहा कि युद्ध से भूख और बाजार संकट बढ़ते हैं, जिसका सबसे अधिक बोझ आम जनता पर पड़ता है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर जयशंकर ने आतंकवाद पर भारत के सख्त रुख की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद एक निरंतर खतरा है और आत्मरक्षा के अधिकार पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। भारत ने हमेशा स्पष्ट किया है कि किसी भी देश द्वारा उसके अधिकारों पर हमला स्वीकार्य नहीं होगा। इसके साथ ही, उन्होंने ऊर्जा दक्षता, शिक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण सेक्टरों में भारत के प्रयासों का जिक्र किया और इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। गुजरात के लोथल में प्रस्तावित EAS Maritime Heritage Festival और भारत में आयोजित 7वीं Maritime Security Conference का जिक्र करते हुए जयशंकर ने क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता दिखाई।

जयशंकर ने प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय सहायता में भारत की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भूकंप या किसी आपदा के समय भारत सबसे पहले मदद पहुंचाने वाला देश रहा है। उन्होंने तिरलाईटरल हाईवे प्रोजेक्ट, साइबर अपराध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उनका संदेश स्पष्ट था कि क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा, साइबर संरक्षण और शिक्षा के क्षेत्र में सभी देशों को मिलकर काम करना होगा। जयशंकर ने कहा कि यह केवल भारत का प्रयास नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और दुनिया की जिम्मेदारी है कि वैश्विक चुनौतियों का सामना एकजुट होकर किया जाए।

ईस्ट एशिया समिट में जयशंकर के बयान ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अब वैश्विक मंच पर केवल उपदेश सुनने वाला देश नहीं, बल्कि अपनी नीति और दृष्टिकोण को मजबूती से पेश करने वाला सक्रिय खिलाड़ी बन चुका है। वैश्विक पाखंड, ऊर्जा संकट और तकनीकी प्रतिस्पर्धा पर उठाए गए मुद्दों ने स्पष्ट किया कि भारत समान नियम, सहयोग और शांति के पक्ष में है। उनका मानना है कि अगर दुनिया को स्थिर, सुरक्षित और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, तो नियम और सिद्धांत सभी के लिए समान होने चाहिए, न कि केवल चुनिंदा देशों के लिए।

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