देश में दवाओं की गुणवत्ता की निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए केंद्रीय और राज्य स्तर पर औषधि नियामक संस्थाएं निरंतर सक्रिय हैं। इन प्रयासों के तहत, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) हर महीने मानक के अनुरूप न होने वाली (NSQ) और संदिग्ध (Spurious) दवाओं की सूची जारी करता है।
अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं ने 63 दवा नमूनों को गुणवत्ता मानकों पर खरा न उतरने वाला पाया है। इसके अलावा, राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं ने 148 दवा नमूनों को NSQ श्रेणी में रखा है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि किसी दवा नमूने का NSQ पाया जाना केवल उस विशेष बैच तक सीमित होता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि अन्य बैचों या ब्रांडों की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ता।

इस रिपोर्ट में एक और चिंताजनक पहलू सामने आया है, जिसमें बिहार से तीन और दिल्ली से दो दवा नमूने संदिग्ध (Spurious) पाए गए हैं। जांच में यह सामने आया कि ये दवाएं अवैध निर्माताओं द्वारा बनाई गई थीं, जिन्होंने अन्य स्थापित कंपनियों के ब्रांड नाम का गलत इस्तेमाल किया। फिलहाल यह मामला जांच के तहत है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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CDSCO और राज्य औषधि नियामकों के संयुक्त प्रयास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गुणवत्ता मानकों से नीचे की और संदिग्ध दवाएं बाजार से हटा दी जाएं, ताकि केवल सुरक्षित और प्रभावी दवाएं ही जनता तक पहुंच सकें। विभिन्न स्तरों पर नियामकों की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि देश की नियामक प्रणाली स्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए लगातार सुदृढ़ हो रही है।