नई दिल्ली, भारत: सरकार की डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना के तहत समर्थित सेमीकंडक्टर डिज़ाइन प्रोजेक्ट्स तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं और इसके ठोस नतीजे अब सामने आने लगे हैं। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत अब तक 16 चिप डिज़ाइन टेप-आउट पूरे हो चुके हैं, 6 ASIC आधारित सेमीकंडक्टर चिप्स विकसित किए गए हैं और 10 पेटेंट फाइल किए जा चुके हैं। इसके साथ ही, इन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से 1,000 से अधिक विशेषीकृत इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया गया है या उन्हें रोजगार मिला है, जबकि सरकारी सहायता के मुकाबले तीन गुना से अधिक निजी निवेश भी आकर्षित हुआ है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत लागू की गई डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना का उद्देश्य भारत में एक आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी चिप डिज़ाइन इकोसिस्टम तैयार करना है। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की ओर से रविवार को जारी एक प्रेस रिलीज़ में बताया गया कि DLI योजना के तहत समर्थित 24 चिप डिज़ाइन प्रोजेक्ट्स वीडियो सर्विलांस, ड्रोन डिटेक्शन, एनर्जी मीटरिंग, माइक्रोप्रोसेसर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित सिस्टम-ऑन-चिप जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर केंद्रित हैं।

सरकार का मानना है कि हेल्थकेयर, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन, डिफेंस, स्पेस और उभरते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सेमीकंडक्टर चिप्स बेहद महत्वपूर्ण हो चुके हैं। देश में डिजिटलाइजेशन और ऑटोमेशन के तेज़ी से बढ़ने के साथ-साथ सेमीकंडक्टर की वैश्विक मांग भी लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के ज़रिए घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और सप्लाई चेन को मज़बूत करने की दिशा में काम कर रही है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग दुनिया के कुछ ही भौगोलिक क्षेत्रों में सीमित है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन बेहद संवेदनशील और रुकावटों के प्रति नाज़ुक हो जाती है। ऐसे में वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग बेस में विविधता लाने की तत्काल ज़रूरत है और भारत इस परिदृश्य में एक भरोसेमंद और रणनीतिक विकल्प के रूप में उभर रहा है। इसी रणनीति का एक अहम हिस्सा DLI योजना को माना जा रहा है, जो भारत की फैबलेस सेमीकंडक्टर क्षमता को मज़बूत करने की दिशा में काम कर रही है।
डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना को MeitY द्वारा सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत लागू किया गया है, जिसके ज़रिए घरेलू स्टार्टअप्स और MSMEs को फाइनेंशियल इंसेंटिव के साथ-साथ एडवांस्ड डिज़ाइन इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच दी जा रही है। इस योजना के अंतर्गत स्टार्टअप्स और MSMEs सेमीकंडक्टर प्रोडक्ट डिज़ाइन और डिप्लॉयमेंट के लिए वित्तीय सहायता और डिज़ाइन टूल्स का लाभ उठा सकते हैं, जबकि अन्य घरेलू कंपनियां सेमीकंडक्टर डिज़ाइन को बाज़ार में उतारने के लिए इंसेंटिव के लिए पात्र हैं।
DLI योजना पूरे सेमीकंडक्टर डिज़ाइन लाइफसाइकिल को सपोर्ट करती है, जिसमें डिज़ाइन और डेवलपमेंट से लेकर डिप्लॉयमेंट तक के सभी चरण शामिल हैं। इसमें इंटीग्रेटेड सर्किट्स, चिपसेट, सिस्टम-ऑन-चिप, सिस्टम लेवल डिज़ाइन और IP कोर का विकास भी शामिल है। सरकार का कहना है कि स्वदेशी सेमीकंडक्टर कंटेंट और बौद्धिक संपदा को बढ़ावा देकर इस योजना का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना, सप्लाई चेन की मजबूती बढ़ाना और देश के भीतर वैल्यू एडिशन को प्रोत्साहित करना है।

दिसंबर 2021 में लॉन्च होने के बाद से DLI योजना ने भारत में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन इकोसिस्टम को मजबूत आधार दिया है। कंपनियों, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों को वित्तीय सहायता, उन्नत डिज़ाइन टूल्स तक पहुंच और प्रोटोटाइपिंग सपोर्ट मिलने से इनोवेटर्स को अपने आइडिया को वास्तविक सिलिकॉन चिप में बदलने में आसानी हुई है। इसके साथ ही, चिप डिज़ाइन के लिए साझा राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण ने इस इकोसिस्टम आधारित दृष्टिकोण को और मजबूती दी है।
सरकार के अनुसार, इन सहायक उपायों के कारण घरेलू स्टार्टअप इकोसिस्टम को ठोस लाभ मिला है। DLI योजना के तहत समर्थित कंपनियां अब इनोवेशन से आगे बढ़कर एग्जीक्यूशन के चरण में पहुंच रही हैं, जहां पेटेंट फाइलिंग, टेप-आउट और सफल चिप निर्माण जैसे महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किए गए हैं। इसके साथ ही, बड़ी संख्या में कुशल इंजीनियरों को इस क्षेत्र में प्रशिक्षित कर मानव संसाधन आधार भी मज़बूत किया गया है।
76,000 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ भारत का सेमीकंडक्टर मिशन सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ डिज़ाइन इकोसिस्टम में निवेश को समर्थन देता है। DLI योजना इसी व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है, जो डिज़ाइन से लेकर फैब्रिकेशन और प्रोडक्टाइजेशन तक एंड-टू-एंड सपोर्ट प्रदान करती है। MeitY के तहत कार्यरत प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संगठन C-DAC को इस योजना की नोडल एजेंसी बनाया गया है।
सरकार का कहना है कि डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के सबसे रणनीतिक और मूल्य-सघन हिस्से, यानी चिप डिज़ाइन, में स्थापित करने की दिशा में एक अहम भूमिका निभा रही है और आने वाले वर्षों में इसके और व्यापक नतीजे सामने आने की उम्मीद है।







