भारत के लिए गर्व का क्षण है, जब UNESCO ने दीपावली को अपनी अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल कर लिया। यह महत्वपूर्ण निर्णय यूनेस्को की अंतरराष्ट्रीय समिति की बैठक में लिया गया, जिससे भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई मान्यता मिली।
दिल्ली इस समय दीपावली के रंगों से सजी हुई है। लाल किले से लेकर इंडिया गेट तक, हर जगह रंगोली और लाइटों की सजावट है। दरअसल, भारत सरकार ने दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल करने के लिए प्रस्ताव भेजा था, और मंगलवार को यूनेस्को की टीम दिल्ली आई थी। इस दौरान, यूनेस्को की समिति ने दीपावली को अपनी सांस्कृतिक धरोहर में शामिल करने का फैसला लिया, जो भारत के लिए गर्व का पल बन गया।
दिल्ली में विशेष रोशनी कार्यक्रम:
दिल्ली के प्रमुख स्थानों जैसे लाल किला और चांदनी चौक को रोशन किया जाएगा और सरकारी इमारतों पर दीये और लाइट्स लगाए जाएंगे। यह पहल दिल्ली को दीपावली के दीयों से फिर से रोशन करने का उद्देश्य रखती है। मुख्य कार्यक्रम लाल किले के परिसर में होगा, जबकि आसपास के क्षेत्रों में रंगोली, रोशनी और आतिशबाजी की व्यवस्था की जाएगी।
वैश्विक पहचान और प्रभाव:
दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल करने का मतलब सिर्फ भारत के लिए सम्मान नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे:
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दीपावली को एक वैश्विक पहचान मिलेगी।
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दुनिया भर में सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ेगा।
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पर्यटन और शोध को बढ़ावा मिलेगा।
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भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर मजबूती मिलेगी।

भारत की अन्य सांस्कृतिक परंपराएँ:
दीपावली से पहले भी भारत की कई सांस्कृतिक परंपराएँ यूनेस्को की सूची में शामिल हो चुकी हैं, और अब इनकी कुल संख्या 16 हो गई है। इनमें पहले से मौजूद परंपराओं में शामिल हैं:
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कुंभ मेला
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योग
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वैदिक मंत्रोच्चार
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रामलीला
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कोलकाता की दुर्गा पूजा
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गुजरात का गरबा
इस वर्ष, 150 देशों के 700 से अधिक प्रतिनिधियों ने अमूर्त धरोहरों पर विचार किया। 78 देशों से 67 प्रस्ताव यूनेस्को की सूची में शामिल करने के लिए आए थे, जिनमें से भारत का प्रस्ताव 24वें स्थान पर था, जिसे मंजूरी मिल गई।
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भारत की सांस्कृतिक कूटनीति में एक कदम आगे:
दीपावली के यूनेस्को की सूची में शामिल होने से न केवल इस पर्व को वैश्विक पहचान मिली है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान को भी दुनिया भर में और मजबूती मिली है। दीपावली, जो अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का प्रतीक है, अब एक वैश्विक धरोहर के रूप में सम्मानित हुई है।







