नई दिल्ली: पटियाला हाउस स्थित विशेष एनआईए अदालत ने बुधवार को डॉ. अदील अहमद, डॉ. शाहीन सईदा, डॉ. मुज़म्मिल, आमिर राशिद अली, जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश, सोयब और मुफ्ती इरफान की न्यायिक हिरासत 8 जनवरी तक बढ़ा दी है। सभी आरोपियों को उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद अदालत में पेश किया गया था।
विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के विशेष लोक अभियोजक की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने का आदेश दिया। यह सुनवाई बंद कक्ष (इन-कैमरा) में की गई। एनआईए ने सभी सातों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की थी।
अदालत ने एनआईए जांच के बाद पुलवामा (जम्मू-कश्मीर) के डॉ. मुज़म्मिल शकील गनई, अनंतनाग (जम्मू-कश्मीर) के डॉ. अदील अहमद राथर, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) की डॉ. शाहीन सईद और शोपियां (जम्मू-कश्मीर) के मुफ्ती इरफान अहमद वागे को न्यायिक हिरासत में भेजा था। इससे पहले एनआईए ने दो अन्य आरोपियों—आमिर राशिद अली, जिनके नाम पर विस्फोट में इस्तेमाल की गई कार पंजीकृत थी, और जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश, जिसने इस घातक हमले में शामिल आतंकवादी को तकनीकी सहायता प्रदान की थी—को गिरफ्तार किया था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा हमले के तुरंत बाद जांच एनआईए को सौंपे जाने के बाद, आतंकवाद निरोधक एजेंसी विभिन्न राज्य पुलिस बलों के साथ मिलकर आतंकी मॉड्यूल के हर सदस्य को चिन्हित करने और गिरफ्तार करने में जुटी हुई है। 10 दिसंबर को अदालत ने एनआईए की पूछताछ के बाद आमिर राशिद अली और जासिर बिलाल वानी को न्यायिक हिरासत में भेजा था, जिसके बाद अन्य चार आरोपियों को भी न्यायिक हिरासत में रिमांड किया गया।
गौरतलब है कि 10 नवंबर को शाम करीब 7 बजे दिल्ली में एक चलती ह्यूंडई i20 कार में हुए विस्फोट में 15 लोगों की मौत हो गई थी और दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए थे। यह विस्फोट कथित आत्मघाती हमलावर उमर उन नबी द्वारा अंजाम दिया गया था।
एनआईए के अनुसार, आमिर राशिद अली दिल्ली आया था ताकि कार की खरीद की व्यवस्था कर सके, जिसे बाद में वाहन-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) के रूप में इस्तेमाल कर विस्फोट किया गया। एनआईए ने फॉरेंसिक जांच के जरिए वाहन-आधारित IED चलाने वाले मृत चालक की पहचान उमर उन नबी के रूप में की है, जो पुलवामा जिले का निवासी था और फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी के जनरल मेडिसिन विभाग में सहायक प्रोफेसर था।
एनआईए का आरोप है कि जासिर बिलाल वानी ने संशोधित ड्रोन के जरिए आतंकी हमले करने के लिए तकनीकी सहायता दी थी और वह रॉकेट बनाने की भी कोशिश कर रहा था। वह उमर उन नबी के साथ आतंकी साजिश में निकटता से जुड़ा हुआ था। एनआईए टीम ने जम्मू-कश्मीर घाटी में कार्रवाई करते हुए श्रीनगर के निवासी जासिर बिलाल वानी को गिरफ्तार किया था।
एनआईए ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि जांच से यह सामने आया है कि जासिर ने घातक कार बम विस्फोट से पहले ड्रोन संशोधित कर आतंकी हमलों की तकनीकी तैयारी में मदद की और रॉकेट बनाने का प्रयास किया। एजेंसी के मुताबिक, अनंतनाग जिले के काज़ीगुंड का निवासी यह आरोपी हमले का सक्रिय सह-षड्यंत्रकारी था और उसने उमर उन नबी के साथ मिलकर इस आतंकी नरसंहार की योजना बनाई थी।
एनआईए ने दोहराया कि हमले में शामिल सभी आरोपियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है और कानून के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।