नई दिल्ली। भारत की आजादी के शताब्दी वर्ष यानी 2047 तक देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ ही भारतीय सेना को दुनिया की सबसे आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत शक्ति बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक में ‘रक्षा बल विजन 2047: भविष्य के लिए तैयार भारतीय सेना का रोडमैप’ का अनावरण किया। एकीकृत रक्षा स्टाफ (IDS) मुख्यालय द्वारा तैयार किया गया यह विजन दस्तावेज़ अगले ढाई दशकों में भारतीय रक्षा क्षेत्र की पूरी तस्वीर बदलने वाला है।
यह योजना केवल हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेना के पूरे संगठनात्मक ढांचे, युद्ध लड़ने के तरीके और तीनों सेनाओं (थल, नभ और जल) के बीच एक अभूतपूर्व तालमेल (एकीकरण) की परिकल्पना करती है।
अत्याधुनिक और बहु-क्षेत्रीय बल: विजन दस्तावेज़ की मुख्य विशेषताएं
रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘रक्षा बल विजन 2047’ को तेजी से बदलते भू-रणनीतिक और तकनीकी परिदृश्य को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें उन रणनीतिक सुधारों और संगठनात्मक परिवर्तनों का खाका खींचा गया है, जो शत्रुओं को रोकने और संघर्ष के हर मोर्चे पर त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए आवश्यक हैं।
इस विजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना को एक ‘बहु-क्षेत्रीय और चुस्त बल’ (Multi-domain and Agile Force) के रूप में रूपांतरित करना है। इसका मतलब है कि भविष्य की सेना न केवल जमीन, पानी और हवा में लड़ेगी, बल्कि अंतरिक्ष (Space) और साइबर सुरक्षा (Cyber Security) के मोर्चे पर भी उतनी ही ताकतवर होगी। वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत के विस्तारित रणनीतिक हितों की रक्षा करना इस दस्तावेज़ का प्राथमिक लक्ष्य है।
आत्मनिर्भरता और नवाचार: स्वदेशी तकनीक पर पूरा जोर
राजनाथ सिंह ने विजन दस्तावेज़ के जरिए यह साफ कर दिया है कि भविष्य की भारतीय सेना विदेशी हथियारों पर निर्भर नहीं रहेगी। दस्तावेज़ में ‘रक्षा आत्मनिर्भरता’ को सर्वोपरि रखा गया है। इसमें स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास, नवाचार (Innovation) और आधुनिक प्रशिक्षण ढांचे पर विशेष जोर दिया गया है। उन्नत प्रौद्योगिकियों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स को सैन्य बल का हिस्सा बनाने की योजना है, ताकि भविष्य की युद्ध चुनौतियों का सामना किया जा सके।
थियेटर कमांड की ओर कदम: समन्वय और सहयोग
इस विजन का एक क्रांतिकारी पहलू तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को बढ़ाना है। योजना, संचालन और क्षमता विकास में सुधार के लिए तीनों सेनाओं को एक छत के नीचे लाने और उनके संसाधनों का एकीकृत उपयोग करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह विजन दस्तावेज़ विश्व स्तरीय रक्षा बल के निर्माण के लिए आवश्यक सैन्य क्षमताओं और रणनीतिक साझेदारियों के विकास का मार्गदर्शन करेगा।
सुनियोजित रोडमैप: अल्पकालिक से दीर्घकालिक लक्ष्य
विजन 2047 कोई एक दिन का लक्ष्य नहीं है, बल्कि इसे तीन चरणों में बांटा गया है:
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अल्पकालिक (Short-term): तत्काल सुरक्षा जरूरतों को पूरा करना।
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मध्यम (Medium-term): क्षमता वृद्धि और संगठनात्मक सुधार।
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दीर्घकालिक (Long-term): 2047 तक पूर्ण आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता।
साउथ ब्लॉक में आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित सेना के कई शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। थल सेना के उप-प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह की उपस्थिति ने सेना के उस संकल्प को दोहराया जो इस रोडमैप को जमीन पर उतारने के लिए तैयार है।
निश्चित रूप से, राजनाथ सिंह द्वारा अनावरण किया गया यह विजन दस्तावेज़ भारतीय सैन्य इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो भारत को न केवल एक आर्थिक महाशक्ति बल्कि एक अभेद्य सामरिक शक्ति के रूप में भी वैश्विक पटल पर स्थापित करेगा।
