“दत्तात्रेय होसबाले का गोरखपुर प्रवास: संघ के 100 वर्ष और हिंदू सम्मेलन”

Gorakhpur

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Gorakhpur में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(RSS)ने महानगर के मालवीय नगर के श्री राम बस्ती खोराबार खेल मैदान में हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने हिस्सा लिया। इस तीन दिवसीय हिंदू सम्मेलन में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने स्वयंसेवकों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और हिंदू एकता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, विचार परिवार के सदस्य और स्थानीय लोग शामिल हुए। सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में संत स्वामी सच्चिदानंद भी मौजूद रहे।

1. हिंदू एकता और भारत की वैश्विक नेतृत्व के लिए दत्तात्रेय होसबाले का दृष्टिकोण

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने गोरखपुर में आयोजित हिंदू सम्मेलन में अपने विचार साझा करते हुए हिंदू समाज की एकता और देश के भविष्य पर जोर दिया। उन्होंने भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए पंच परिवर्तन के महत्व पर बात की और यह भी कहा कि हिंदूओं की संख्या बढ़ाने के लिए समाज को जागरूक करना आवश्यक है। होसबाले ने नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहते हुए संघ की शाखाओं के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को एकजुट होने का आह्वान किया। उनके अनुसार, हिंदू धर्म मानवता का धर्म है, जिसे हमारे पूर्वजों ने आक्रांताओं से बचाया है, और इस धर्म की रक्षा के लिए सभी को जागरूक होना चाहिए।

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2. हिंदू धर्म और संस्कृति की रक्षा: एकता की आवश्यकता

उन्होंने हिंदू धर्म को न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि धर्म और संस्कृति को बचाए रखना जरूरी है क्योंकि इसके बिना जीवन और समाज का कोई महत्व नहीं है। होसबाले ने यह भी कहा कि भगवान एक ही हैं, उपासना के तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन लक्ष्य एक ही है। वे इस बात पर जोर देते हैं कि हमारे पूर्वजों ने ऐसी संस्कृति का निर्माण किया, जिसे भगवान भी पसंद करते थे। उन्होंने यह उदाहरण दिया कि सूर्य प्रणाम, सूर्य नमस्कार और प्राणायाम जैसे शारीरिक क्रियाकलापों की शुरुआत हिंदू धर्म से हुई, जो अब पूरी मानवता के लिए लाभकारी साबित हो रहे हैं।

3. हिंदू परिवारों को जागरूक करना: समाज में जागृति का मार्ग

बुधवार को गोरखपुर के मालवीय नगर में आयोजित हिंदू सम्मेलन में होसबाले ने यह भी कहा कि हिंदू एकता और परिवारों को जागरूक करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उनके अनुसार, केवल स्वदेशी जीवन शैली अपनाने से ही हम स्वतंत्र हो सकते हैं, और इसके बिना देश की प्रगति संभव नहीं है। उन्होंने देश में धर्म परिवर्तन की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई और कहा कि हमें यह समझना होगा कि सभी लोग हमारे भाई-बंधु हैं, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति से संबंधित हों। धर्म परिवर्तन को लेकर होसबाले ने कहा कि यह जिम्मेदारी हिंदू समाज की है कि वे यह सुनिश्चित करें कि अगली पीढ़ी को क्या दिया जाएगा।

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4. हिंदू धर्म का वैश्विक स्वागत: भारत की भविष्यवाणी

हिंदू धर्म को लेकर होसबाले ने कहा कि धर्म के नियम समान होते हैं, चाहे वह किसी भी धर्म का हो। बौद्ध, जैन, और सिख धर्म की भी मूल भावना एक ही है। उनका मानना था कि यदि हम राम, शिव और कृष्ण के बताए हुए धर्म का पालन करेंगे, तो हम सही मार्ग पर चलेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू धर्म का स्वागत पूरी दुनिया कर रही है, और अब रूस, अरब देशों और अमेरिका में मंदिर बन रहे हैं। इस प्रकार, भारत दुनिया में एक नई दिशा में अग्रसर हो रहा है।

5. हिंदू जागृति के साथ वैश्विक एकता की ओर एक कदम

होसबाले ने हिंदू समाज में एकता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यदि हिंदू जागेगा तो मानवता जागेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिंदू समाज को एकजुट होने की जरूरत है ताकि हम दुनिया में अपने विचारों को फैलाने और अपने समाज को मजबूत बनाने में सफल हो सकें। उनके अनुसार, अगर हम हिंदू समाज को जागरूक करते हैं तो यह पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद होगा। उनका कहना था कि हिंदू समाज को अब केवल अपनी संस्कृति बचाने के बजाय दुनिया के लिए एक मिसाल बनानी होगी।

6. जातिवाद की दीवार को तोड़ना: समानता और एकता की ओर एक कदम

उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति जो सफाई और सेवा करता है, वह कभी भी अछूत नहीं हो सकता। श्रीराम के उदाहरण से उन्होंने यह सिद्ध किया कि समाज में जात-पात की भावना को समाप्त किया जाना चाहिए। समाज को आदर्श और अनुशासन में रहकर चलना होगा ताकि हम एक समृद्ध और समर्थ भारत बना सकें।

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7. सशक्त राष्ट्र निर्माण के लिए सामाजिक अनुशासन

सफाई और सेवा करने की भावना को लेकर होसबाले ने यह स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति दूसरी जाति से नीचे नहीं हो सकता। उनका मानना था कि हमें अपने समाज को सुरक्षित रखना चाहिए और समाज में समानता का माहौल बनाना चाहिए। सेवानिवृत्त अपर जिला जज प्रभाकर मिश्र ने हिंदू सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए संघ की विचारधारा पर प्रकाश डाला। उनका कहना था कि संघ कोई राजनीतिक संगठन नहीं है, बल्कि यह समाज को संगठित करने और राष्ट्र के प्रति समर्पित रहने का एक विचार है।

8. संघ का 100 वर्षीय सफर: भारत के भविष्य के लिए एकजुट दृष्टिकोण

संघ शताब्दी वर्ष के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में होसबाले ने कहा कि समाज में एकता लाने के लिए हमें जाति, भाषा, पंथ, और ऊंच-नीच के भेदभाव को खत्म करना होगा। संघ का उद्देश्य समाज में बदलाव लाना है और इसके लिए धर्म के मार्ग पर चलना आवश्यक है। उनका कहना था कि भारत को धर्म और संस्कृति के आधार पर विश्वगुरु बनना है, और इसके लिए हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहकर कार्य करना होगा।

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