चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ बना गंभीर खतरा, आंध्र तट से आज रात टकराएगा
Cyclone Montha LIVE: पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर बन रहा चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ अब एक गंभीर रूप ले चुका है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, यह तूफान 15 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा में बढ़ते हुए मंगलवार शाम या रात में आंध्र प्रदेश के काकीनाडा तट के पास समुद्र से टकरा सकता है। फिलहाल इसकी हवाओं की रफ्तार 90 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि झोंके 110 किमी प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना है। इस बीच समुद्र बेहद उग्र हो चुका है और तटीय क्षेत्रों में ऊंची लहरें उठ रही हैं। NDRF और SDRF की 140 से अधिक टीमें पांच राज्यों में तैनात की गई हैं। आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु में स्कूलों को बंद रखने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। तटीय इलाकों से हजारों लोगों को राहत शिविरों में सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

तीन राज्यों में रेड अलर्ट, मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त चेतावनी
आईएमडी ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु के कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। आंध्र में काकीनाडा, मछलीपट्टनम और कालिंगपट्टनम के आसपास के तटीय इलाकों में सबसे अधिक खतरा बताया जा रहा है। वहीं ओडिशा के गंजम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट, कालाहांडी और मलकानगिरी जिलों में अगले 48 घंटे तक भारी बारिश और तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।
मौसम विभाग की भुवनेश्वर शाखा की निदेशक डॉ. मनोरमा मोहंती ने बताया कि ‘मोंथा’ की तीव्रता फिलहाल गंभीर चक्रवाती तूफान की श्रेणी में है, और इसके उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते रहने की संभावना है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। सभी बीच पर्यटकों के लिए बंद कर दिए गए हैं और स्थानीय प्रशासन ने समुद्र किनारे के क्षेत्रों में नजरदारी बढ़ा दी है।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने आपदा प्रबंधन विभाग के साथ हाई-लेवल बैठक की, जिसमें सभी प्रभावित जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। राज्य में राहत और बचाव कार्यों की तैयारियों की समीक्षा की गई है, ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
कई ट्रेनें और उड़ानें रद्द
चक्रवात ‘मोंथा’ के खतरे को देखते हुए दक्षिण मध्य रेलवे और पूर्वी तट रेलवे ने अगले दो दिनों के लिए 100 से अधिक ट्रेनें रद्द कर दी हैं। विशाखापत्तनम से गुजरने वाली करीब 43 ट्रेनें फिलहाल बंद हैं। वहीं इंडिगो और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अपनी कई उड़ानें रद्द की हैं। सोमवार को दिल्ली-विजाग की एक उड़ान को भुवनेश्वर डायवर्ट किया गया। विजवाड़ा और विशाखापत्तनम एयरपोर्ट पर भी कई सेवाएं रोक दी गई हैं।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से घरों में रहने की अपील की है और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। एनडीआरएफ की टीमें तटीय इलाकों में लगातार गश्त कर रही हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम जारी है। सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को अस्थायी राहत शिविरों में बदला गया है, जहां भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।

आंध्र प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी असर
आईएमडी के महानिदेशक डॉ. एम. मोहापात्रा ने बताया कि आंध्र प्रदेश को इस तूफान से सबसे अधिक नुकसान की आशंका है। तट से टकराने के बाद ‘मोंथा’ की तीव्रता थोड़ी कम होगी, लेकिन इसके ओडिशा और छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ने की संभावना बनी हुई है। 28 से 30 अक्टूबर के बीच इन राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने का अनुमान है।
तमिलनाडु के चेन्नई, तिरुवल्लूर, रानीपेट और कांचीपुरम में सोमवार को हुई भारी बारिश ने पहले ही जनजीवन प्रभावित कर दिया है। चेन्नई में कई जगह जलभराव की स्थिति बनी हुई है और बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। मौसम विभाग ने राज्य में भी अगले 48 घंटे तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
सरकार ने आपात स्थिति में लोगों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। बिजली कंपनियों और स्वास्थ्य विभाग को चौबीसों घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने अस्पतालों, पेट्रोल पंपों और आवश्यक सेवाओं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने की योजना तैयार की है।
राहत-बचाव कार्य तेजी से जारी
आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों का दौरा कर रही हैं। निचले इलाकों से लोगों को निकालकर स्कूलों और सामुदायिक भवनों में अस्थायी शिविरों में रखा जा रहा है। फायर सर्विस और पुलिस विभाग के अधिकारी तैनात हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता भेजी जाएगी। वहीं राज्यों के मुख्यमंत्री भी स्थिति की पल-पल की समीक्षा कर रहे हैं। मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल सरकारी स्रोतों से मिली जानकारी पर भरोसा करें।
मोंथा के कारण अगले कुछ दिनों तक दक्षिणी और पूर्वी भारत के मौसम पर व्यापक असर रहने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्री तापमान में वृद्धि और मौसमी बदलावों के चलते ऐसे चक्रवातों की तीव्रता बढ़ रही है। फिलहाल पूरे तटीय क्षेत्र में सतर्कता का माहौल है और प्रशासन किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए तैयार है।