उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र से आज एक बहुत ही उत्साहजनक खबर सामने आई है। लखनऊ के लोकभवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में CM Yogi आदित्यनाथ ने 1228 नवनियुक्त नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस मौके पर उन्होंने न केवल युवाओं को बधाई दी, बल्कि यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में यूपी की स्वास्थ्य सेवाएं कितनी बदल चुकी हैं। अब वह दौर पीछे छूट गया है जब इलाज के लिए लोगों को बड़े शहरों की ओर भागना पड़ता था। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि सरकार का लक्ष्य हर नागरिक को उसके घर के पास ही बेहतर इलाज मुहैया कराना है।
स्वास्थ्य सेवाओं का हो रहा है कायाकल्प
कार्यक्रम के दौरान CM Yogi ने प्रदेश में डिजिटल हेल्थ की प्रगति पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि ‘यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज’ के तहत अब तक यूपी के करीब 9.25 करोड़ लोग जुड़ चुके हैं। इतना ही नहीं, 14 करोड़ से ज्यादा डिजिटल हेल्थ आईडी (आभा कार्ड) भी बनाए जा चुके हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब मरीजों का मेडिकल रिकॉर्ड डिजिटल होगा, जिससे देश में कहीं भी इलाज कराना आसान हो जाएगा। ग्रामीण इलाकों के लिए CM Yogi ने टेलीमेडिसिन और टेली-कंसल्टेशन की सुविधा पर जोर दिया, जो अब 976 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर उपलब्ध है।

‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज’ का सपना हुआ सच
उत्तर प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में आए बदलावों का जिक्र करते हुए CM Yogi ने “वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज” की अवधारणा को साझा किया। पहले जहां प्रदेश के गिने-चुने जिलों में ही मेडिकल कॉलेज हुआ करते थे, वहीं अब हर जिले में मेडिकल और नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। सहारनपुर से लेकर आजमगढ़ और बिजनौर तक, सभी कॉलेज अब एक समान पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली के तहत काम कर रहे हैं। CM Yogi का मानना है कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी और प्रदेश को बेहतर डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ मिल सकेंगे।

मेडिकल सीटों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
अगर हम आंकड़ों की बात करें, तो CM Yogi के नेतृत्व में यूपी ने एक लंबी छलांग लगाई है। प्रदेश में एमबीबीएस की सीटें जो पहले मात्र 5390 थीं, वे अब बढ़कर 12700 हो गई हैं। इसी तरह पीजी सीटों की संख्या भी 1221 से बढ़कर 5056 तक पहुँच गई है। नर्सिंग और पैरामेडिकल क्षेत्र में भी हजारों सीटें बढ़ाई गई हैं। CM Yogi ने बताया कि गोरखपुर और रायबरेली में एम्स पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। साथ ही, महाराजगंज और शामली जैसे जिलों में पीपीपी मॉडल के तहत नए अस्पताल और कॉलेज सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं।

प्रदेश के बड़े संस्थानों की बड़ी उपलब्धियां
मुख्यमंत्री ने यूपी के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों की तारीफ करते हुए कहा कि आज किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) एनआईआरएफ रैंकिंग में चिकित्सा विश्वविद्यालयों की श्रेणी में देशभर में आठवां स्थान प्राप्त कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। CM Yogi ने बताया कि एसजीपीजीआई लखनऊ में अब किडनी और डायबिटीज के मरीजों के लिए एक ही छत के नीचे इलाज की सुविधा शुरू हो गई है। इसके अलावा, लोहिया संस्थान में लिवर और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी जटिल सुविधाएं अब आम जनता के लिए सुलभ हैं। कैंसर मरीजों के लिए भी कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी कैंसर संस्थान में आधुनिक तकनीक से जांच और रिसर्च का काम शुरू हो चुका है, जो टाटा ट्रस्ट के मुंबई अस्पताल की तर्ज पर काम कर रहा है।

युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
नियुक्ति पत्र बांटते समय CM Yogi ने कहा कि ये 1228 नर्सिंग अधिकारी केवल कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ती सुविधाओं के साथ-साथ युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों के द्वार भी खुले हैं। CM Yogi ने चयनित अभ्यर्थियों से अपील की कि वे सेवा भाव के साथ काम करें और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखें। सरकार का प्रयास है कि आने वाले समय में यूपी न केवल उत्तर भारत, बल्कि पूरे देश के लिए एक मेडिकल हब के रूप में उभरे।
CM Yogi का विजन यूपी को एक स्वस्थ और समृद्ध प्रदेश बनाने का है। ‘डिजिटलीकरण’ से लेकर ‘मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर’ तक, हर मोर्चे पर काम होता दिख रहा है। 22 नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण और बढ़ती सीटों से यह उम्मीद जगी है कि भविष्य में डॉक्टरों की कमी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। अगर इसी गति से काम होता रहा, तो उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं वाकई एक मिसाल बनेंगी।
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