CM Yogi जापान दौरे पर, 11 हजार करोड़ के समझौते
उत्तर प्रदेश के लिए औद्योगिक मोर्चे पर एक अहम दिन रहा। CM Yogi के जापान दौरे के पहले ही दिन करीब 11 हजार करोड़ रुपये के निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। अलग-अलग जापानी कंपनियों के साथ हुए इन करारों से प्रदेश में विनिर्माण और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि यह पहल उत्तर प्रदेश को औद्योगिक हब बनाने की दिशा में एक और कदम है। CM Yogi ने निवेशकों से मुलाकात कर प्रदेश की संभावनाओं को सामने रखा।

CM Yogi ने कहा –
उत्तर प्रदेश में आपका निवेश सुरक्षित है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में एक सुरक्षित वातावरण है, स्केल है…
उत्तर प्रदेश में आपका निवेश सुरक्षित है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में एक सुरक्षित वातावरण है, स्केल है…
उस स्केल को स्किल में बदलने का सामर्थ्य भी है… pic.twitter.com/HzMgZoMvRh
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) February 25, 2026
उत्तर प्रदेश की 56 फीसदी आबादी वर्किंग फोर्स है, सस्ता और अच्छा मैनपावर हर एक सेक्टर के लिए उत्तर प्रदेश के अंदर उपलब्ध है…
उत्तर प्रदेश की 56 फीसदी आबादी वर्किंग फोर्स है,
सस्ता और अच्छा मैनपावर हर एक सेक्टर के लिए उत्तर प्रदेश के अंदर उपलब्ध है… pic.twitter.com/Thg3xXdcqb
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) February 25, 2026
9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अपनी अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने में सफलता प्राप्त की है…
9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अपनी अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने में सफलता प्राप्त की है… pic.twitter.com/UHzxsVPDX8
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) February 25, 2026
भारत और जापान का संबंध, सूर्य की प्रथम किरण से प्रारंभ होकर और सूर्यवंश की धरा उत्तर प्रदेश को एक आत्मीय संवाद के साथ जोड़ता है…
भारत और जापान का संबंध,
सूर्य की प्रथम किरण से प्रारंभ होकर और सूर्यवंश की धरा उत्तर प्रदेश को एक आत्मीय संवाद के साथ जोड़ता है… pic.twitter.com/Jv9wteaKZE
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) February 25, 2026
किन कंपनियों से हुआ करार
इस दौरे के दौरान कुबोता कारपोरेशन, मिंडा कारपोरेशन, जापान एविएशन इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री (जेएई), नागासे एंड कंपनी लिमिटेड, सीको एडवांस, ओएंडओ ग्रुप, फूजी जैपनीज जेवी और फूजीसिल्वरटेक कंक्रीट प्रा. लि. जैसी कंपनियों के साथ समझौते हुए।
CM Yogi की मौजूदगी में हुए इन समझौतों में कृषि यंत्र निर्माण, औद्योगिक मशीनरी, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, जल और पर्यावरण अवसंरचना, हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इससे उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश को नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है।

कुबोता और अन्य कंपनियों की भूमिका
कुबोता कारपोरेशन, जिसकी स्थापना 1890 में हुई थी और जिसका मुख्यालय ओसाका में है, कृषि और औद्योगिक मशीनरी के क्षेत्र में जानी जाती है। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, इंजन और जल प्रबंधन समाधान इसके प्रमुख उत्पाद हैं। एस्कॉर्ट्स कुबोता लिमिटेड के साथ सहयोग के जरिए कंपनी भारत में पहले से सक्रिय है।
CM Yogi ने अपने संबोधन में कहा कि फार्म मैकेनाइजेशन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इस तरह का सहयोग प्रदेश के किसानों और युवाओं के लिए फायदेमंद होगा।
मिंडा कारपोरेशन, जो स्पार्क मिंडा समूह का हिस्सा है, ऑटोमोटिव कंपोनेंट निर्माण में अग्रणी है। वहीं जापान एविएशन इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री ऑटोमोटिव और एयरोस्पेस के लिए एडवांस कनेक्टर्स बनाती है। नागासे एंड कंपनी लिमिटेड केमिकल्स और एडवांस्ड मैटेरियल्स के क्षेत्र में काम करती है।
प्रिंटिंग, हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट में भी निवेश
सीको एडवांस स्क्रीन प्रिंटिंग इंक और कोटिंग सॉल्यूशंस के लिए जानी जाती है। इसके उत्पाद ऑटोमोबाइल डीकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स पैनल और औद्योगिक ग्राफिक्स में उपयोग होते हैं। कंपनी भारत में अपनी विनिर्माण इकाई के जरिए पहले से आपूर्ति कर रही है।
इसके अलावा ओ एंड ओ ग्रुप ने हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश का समझौता किया है। CM Yogi का मानना है कि इससे प्रदेश में रोजगार के नए अवसर बनेंगे और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी।
भारत-जापान सहयोग को नई रफ्तार
विशेषज्ञों का कहना है कि CM Yogi का यह दौरा भारत और जापान के बीच औद्योगिक सहयोग को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। पहले दिन ही इतने बड़े निवेश समझौते होना यह दिखाता है कि विदेशी कंपनियों का भरोसा बढ़ रहा है।
प्रदेश सरकार लगातार निवेश आकर्षित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रयास कर रही है। CM Yogi ने साफ कहा है कि उत्तर प्रदेश में निवेशकों को बेहतर सुविधाएं और पारदर्शी व्यवस्था दी जाएगी।
जापान दौरे का पहला दिन उत्तर प्रदेश के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आया है। CM Yogi की पहल से हुए ये समझौते आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर असर डाल सकते हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि ये निवेश जमीन पर कितनी तेजी से उतरते हैं और उद्योगों को कितना फायदा मिलता है।
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