चित्रकूट। प्रभु श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में विजयदशमी की पूर्व संध्या पर श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब नगर पालिका परिषद चित्रकूटधाम द्वारा भव्य रामदल शोभायात्रा का आयोजन किया गया। परंपरागत आस्था और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजते हुए यह शोभायात्रा रामलीला भवन पुरानी बाजार से प्रारंभ होकर पूरे नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई पुनः रामलीला भवन तक पहुँची। शोभायात्रा में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और भक्त हनुमान की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। गाजे-बाजे की धुनों, हाथियों और घोड़ों की सजावट तथा रंग-बिरंगी झांकियों ने पूरे नगर का वातावरण भक्तिमय बना दिया।
शोभायात्रा में बाहरी कलाकारों ने भगवान श्रीराम की लीलाओं का मंचन प्रस्तुत किया, जिसे देखने के लिए सड़कों पर अपार जनसमूह उमड़ा। नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया और श्रद्धालुओं ने इस अद्भुत नजारे को अपने कैमरे और मोबाइल में कैद किया। स्थानीय नागरिकों ने इस आयोजन को सामाजिक एकता और धार्मिक आस्था का प्रतीक बताया। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हुए, जिनमें उत्साह और भक्ति का अद्वितीय संगम दिखाई दिया।
नगर पालिका परिषद चित्रकूटधाम के अधिशाषी अधिकारी लाल जी यादव ने बताया कि यह शोभायात्रा रामलीला की 164 वर्षों से चली आ रही गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष विजयदशमी से पूर्व यह यात्रा आयोजित कर नगरवासियों में धार्मिक उत्साह और सांस्कृतिक जुड़ाव का संदेश दिया जाता है। रामलीला कमेटी के सदस्य अशोक केशरवानी ने भी बताया कि यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि चित्रकूट की सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत बनाए रखता है।
शोभायात्रा में शामिल लोगों का कहना था कि यह दृश्य केवल आस्था ही नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का जीवंत प्रमाण है। इस शोभायात्रा ने नगर की सड़कों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया और हर कोई प्रभु श्रीराम के जयघोष में शामिल होकर भावविभोर हो उठा। इस अवसर पर श्रद्धालु “जय श्रीराम” और “सियावर रामचंद्र की जय” के उद्घोष कर वातावरण को गुंजायमान करते रहे।
इस भव्य आयोजन ने चित्रकूट की धार्मिक महत्ता को एक बार फिर उजागर किया और यह संदेश दिया कि आस्था, परंपरा और संस्कृति जब एक साथ आती है तो समाज में नई ऊर्जा और एकता का संचार होता है। विजयदशमी से पहले निकाली गई यह रामदल शोभायात्रा न केवल धार्मिक उत्सव का प्रतीक है बल्कि समाज में प्रेम, सद्भाव और सांस्कृतिक गौरव का संदेश भी देती है।







