Chhattisgarh Naxal Surrender : छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ के इनामी रामधेर मज्जी सहित 12 नक्सलियों ने किया सरेंडर

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Chhattisgarh Naxal Surrender : छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। लंबे समय से वांछित और एक करोड़ रुपये के इनामी कुख्यात नक्सली कमांडर रामधेर मज्जी ने अपने 12 साथियों के साथ बकरकट्टा में पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। यह कदम राज्य में चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। मज्जी, जिसे नक्सली संगठन में हिडमा के समकक्ष माना जाता था, सीपीआई (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का प्रभावशाली सदस्य (CCM) था और उसके नाम पर कई बड़े हमलों की साजिश रचने का आरोप था।

रामधेर मज्जी और उसके गैंग के सरेंडर के बाद MMC ज़ोन (महाराष्ट्र–मध्य प्रदेश–छत्तीसगढ़) को आधिकारिक रूप से नक्सलमुक्त घोषित किया गया है। यह वही क्षेत्र है जो लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों का सबसे महत्वपूर्ण और सक्रिय इलाका रहा था। पिछले एक दशक में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए समन्वित ऑपरेशनों, खुफिया तंत्र के मजबूत होने और स्थानीय समर्थन के चलते नक्सली संरचना कमजोर पड़ती गई, जिसका परिणाम यह ऐतिहासिक आत्मसमर्पण है।

सरेंडर करने वाले 12 माओवादी कैडरों में तीन डिविजनल वाइस कमांडर (DVCM), दो असिस्टेंट कमांडर (ACM) और कई प्राथमिक सदस्य शामिल हैं। उनके पास से भारी मात्रा में हथियार भी बरामद किए गए, जिनमें AK-47 राइफल, 30 कार्बाइन, INSAS, .303 राइफल और SLR जैसे घातक हथियार शामिल हैं। यह न केवल उनकी सक्रियता का प्रमाण है, बल्कि इस बात का भी संकेत है कि वे किसी बड़े हमले की तैयारी में थे।

सरेंडर किए गए माओवादी कैडरों की सूची :-

  • रामधेर मज्जी (CCM) – AK-47
  • चंदू उसेंडी (DVCM) – 30 कार्बाइन

  • ललिता (DVCM)

  • जानकी (DVCM) – INSAS

  • प्रेम (DVCM) – AK-47

  • रामसिंह दादा (ACM) – .303

  • सुकेश पोट्टम (ACM) – AK-47

  • लक्ष्मी (PM) – INSAS

  • शीला (PM) – INSAS

  • सागर (PM) – SLR

  • कविता (PM) – .303

  • योगिता (PM) – बिना हथियार

इससे पहले 18 नवंबर को सुरक्षा बलों ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए कुख्यात नक्सली कमांडर माडवी हिडमा को आंध्र प्रदेश–छत्तीसगढ़ सीमा पर मारेदुमिल्ली जंगलों में मुठभेड़ के दौरान ढेर कर दिया था। हिडमा PLGA बटालियन–1 का प्रमुख था और 2010 के ताड़मेटला हमले तथा 2013 के झीरम घाटी नरसंहार सहित 26 से अधिक बड़े हमलों का मास्टरमाइंड था। उस पर भी एक करोड़ रुपये का इनाम था। हिडमा की मौत और अब मज्जी के आत्मसमर्पण ने माओवादी संगठन की रीढ़ को तोड़कर रख दिया है।

हिडमा की मौत के बाद संगठन में नेतृत्व का संकट गहरा गया था। मज्जी भी शीर्ष कमांडर की जिम्मेदारियाँ संभालने की कोशिश में संगठन के भीतर कई टकरावों का सामना कर रहा था। लगातार सुरक्षाबलों के दबाव, क्षेत्र में सड़क निर्माण और विकास कार्य, तथा स्थानीय आदिवासी समुदायों के जागरूक होने से नक्सलियों के समर्थन में भारी गिरावट आई है। यही वजह है कि कई नक्सली अब जंगल छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का विकल्प चुन रहे हैं।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रामधेर मज्जी का सरेंडर न केवल एक ऑपरेशनल जीत है बल्कि माओवादी आंदोलन की विचारधारा को भी गहरी चोट पहुंचाता है। मज्जी जैसे हार्डकोर नेता का आत्मसमर्पण अन्य नक्सली कैडरों के मनोबल को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा, और इससे आने वाले महीनों में और सरेंडर होने की संभावना बढ़ जाएगी।

राज्य सरकार और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने इसे “ऐतिहासिक मोड़” बताया है। पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण के बाद सभी नक्सलियों को पुनर्वास योजना के तहत आवश्यक सुरक्षा और सहायता दी जाएगी। सरकार का कहना है कि उनका लक्ष्य केवल ऑपरेशन चलाना नहीं, बल्कि नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करना और प्रभावित क्षेत्रों को शांति और विकास के मार्ग पर लाना है।

यह भी पढ़े – मध्य प्रदेश के बालाघाट में KB डिविजन के 10 नक्सलियों ने किया सरेंडर

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