Chandauli जिले के पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर शुक्रवार को आरपीएफ, बचपन बचाओ आंदोलन और चाइल्ड लाइन हेल्प डेस्क की संयुक्त टीम ने एक अहम अभियान के तहत अप अजमेर सियालदह एक्सप्रेस ट्रेन के जनरल कोच से आठ नाबालिगों को बरामद किया। इनमें से छह नाबालिग बिहार के थे, जो काम करने के लिए जयपुर जा रहे थे, जबकि दो किशोर बंगाल से अपने घरवालों से नाराज होकर निकले थे। RPF ने सभी को सुरक्षित उतारकर पोस्ट डीडीयू जंक्शन लाया और चाइल्ड लाइन व बचपन बचाओ आंदोलन के सहयोग से काउंसलिंग कराई। बाद में बच्चों को चाइल्ड लाइन को सौंप दिया गया।
क्या था पूरा मामला?
आरपीएफ पीडीडीयू पोस्ट के निरीक्षक प्रदीप कुमार रावत ने बताया कि ऑपरेशन “नन्हें फरिश्ते” और “ऑपरेशन आहट” के तहत नाबालिगों को तस्करों से मुक्त कराने के लिए विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी क्रम में शुक्रवार को स्टेशन पर विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया, जिसमें अप और डाउन ट्रेनों की जांच की गई।

सुबह अप अजमेर सियालदह एक्सप्रेस प्लेटफार्म संख्या आठ पर पहुंची। इस दौरान आरपीएफ एसआई अर्चना मीणा, अश्वनी कुमार, एएसआर्ई शाहिद खान, सतीश सिंह, आरक्षी अशोक यादव, बचपन बचाओ आंदोलन की सहायक परियोजना अधिकारी चंदा गुप्ता और चाइल्ड हेल्प डेस्क टीम की सीमा यादव समेत अन्य टीम के सदस्य जनरल कोच में पहुंचे और जांच की।
नाबालिगों के बारे में जानकारी
इस दौरान टीम ने आठ नाबालिगों को बरामद किया। सभी की उम्र 13 से 16 वर्ष के बीच थी। इनमें से छह किशोर कैमूर, बिहार के थे, जिन्होंने बताया कि वे काम करने के लिए जयपुर जा रहे थे। वहीं, दो किशोर 24 साउथ परगना, पश्चिम बंगाल के थे, जिन्होंने बताया कि वे घरवालों से नाराज होकर अजमेर काम करने जा रहे थे।
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काउंसलिंग और घर वापस भेजने की प्रक्रिया
सभी किशोरों को ट्रेन से उतारकर पोस्ट पर लाया गया और उनकी काउंसलिंग की गई। उनके परिवार वालों को इस मामले की सूचना दी गई और फिर चाइल्ड लाइन को सुपुर्द किया गया, ताकि इन नाबालिगों को उनके घर तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके।







