फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI), अमेरिका से मिले इनपुट के आधार पर, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने नोएडा में संचालित एक अत्याधुनिक वर्चुअल एसेट-आधारित साइबरक्राइम नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। यह नेटवर्क 2022 से अमेरिकी नागरिकों को निशाना बना रहा था। छापेमारी के दौरान CBI ने 1.88 करोड़ रुपये नकद, 34 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए और ऑपरेशन के दौरान छह मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया।
CBI की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 2022 से 2025 के बीच आरोपी अमेरिकी सरकारी एजेंसियों—DEA, FBI और SSA—के अधिकारियों की नकली पहचान बनाकर अमेरिकी नागरिकों को ठग रहे थे। वे पीड़ितों को धमकाते थे कि उनके सोशल सिक्योरिटी नंबर (SSN) का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग डिलीवरी में हुआ है और उनकी सभी संपत्तियाँ फ्रीज कर दी जाएँगी।
डर का माहौल बनाकर आरोपियों ने पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया कि उनका पैसा खतरे में है और उन्हें अपनी धनराशि सुरक्षित रखने के लिए उसे तुरंत ट्रांसफर करना होगा। इस तरह पीड़ितों से लगभग 8.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर क्रिप्टो वॉलेट्स और विदेशी बैंक खातों में जमा करा लिए गए, जिन पर आरोपियों का नियंत्रण था।
CBI ने यह मामला 9 दिसंबर को दर्ज कर जांच शुरू की। इसके बाद दिल्ली, नोएडा और कोलकाता में आरोपियों से जुड़े कई ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें महत्वपूर्ण सबूत मिले।
नोएडा में चल रहे एक अवैध कॉल सेंटर में छापा मारकर CBI ने छह लोगों को आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर मौके से गिरफ्तार किया और कॉल सेंटर को ध्वस्त कर दिया।
बुधवार और गुरुवार को की गई तलाशी में पता चला कि यह अंतरराष्ट्रीय साइबर वित्तीय अपराध नेटवर्क वर्चुअल एसेट्स और बैंक ट्रांसफर के माध्यम से अवैध कमाई को इधर-उधर भेज रहा था। अवैध कॉल सेंटर और आरोपियों के ठिकानों से 1.88 करोड़ रुपये नकद, 34 इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस—मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क—सहित कई आपत्तिजनक दस्तावेज मिले।
CBI के अनुसार, अपराध की कमाई का पता लगाने के लिए आगे की कार्रवाई जारी है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े नेटवर्क की जांच भी जारी है।
ऑपरेशन चक्र के तहत CBI इंटरपोल और विदेशी जांच एजेंसियों के साथ समन्वय कर बड़े पैमाने पर संगठित साइबर वित्तीय अपराध सिंडिकेट्स पर तेज़ी से कार्रवाई कर रही है। इस अभियान के तहत कई बड़े ट्रांसनेशनल नेटवर्कों को ध्वस्त किया गया है।




