साहित्य
हर किसी को हमने

हर किसी को हमने……!

दुनिया भर के लोगों ने, दिन के उजाले में…. उसका मुस्कुराता मुखड़ा देखा… किसी ने क्या समझा…क्या पाया… मालूम नहीं मुझको….पर हाँ…! मैंने तो अक्सर ही….बंद कमरे में…. उसको खामोश रोते देखा….. ताउम्र तन्हाई में ही काटी जिंदगी मानो या ना मानो….सच है कि….. उसने तो यहाँ….न कोई शिकवा… न कोई गिला देखा…. साथ उसके

Read More »