भारत की सबसे चर्चित एड-टेक कंपनी BYJU’s एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह किसी नए फंडिंग राउंड या प्रोडक्ट लॉन्च की नहीं, बल्कि एक बड़े कानूनी विवाद की है। कंपनी के संस्थापक बायजू रवींद्रन ने अमेरिकी दिवालिया अदालत (US Bankruptcy Court) द्वारा जारी उस डिफ़ॉल्ट जजमेंट को चुनौती देने का फैसला किया है, जिसमें उन्हें BYJU’s Alpha और GLAS Trust की याचिका पर 1 बिलियन डॉलर से अधिक की राशि चुकाने का जिम्मेदार ठहराया गया है। बायजू की कानूनी टीम ने साफ कहा है कि वे इस निर्णय के खिलाफ शीघ्र ही अपील दायर करेंगे और अपने पक्ष में सबूत अदालत में पेश करेंगे।
रवींद्रन की ओर से जारी प्रेस बयान में दावा किया गया है कि GLAS Trust ने कोर्ट को गलत और भ्रामक जानकारी दी, जिसके चलते यह आदेश “जल्दबाज़ी में” दिया गया। बयान के अनुसार, कोर्ट ने यह फैसला उस समय सुनाया जब GLAS ने सितंबर 2025 में नुकसान से जुड़े अपने दावे वापस ले लिए थे, मगर उसके बावजूद डिफ़ॉल्ट जजमेंट सुना दिया गया।
‘हमें अपना बचाव पेश करने का मौका तक नहीं दिया गया’ — BYJU’s
BYJU’s की कानूनी टीम ने सबसे गंभीर आरोप यह लगाया है कि अदालत ने पहले दिए गए “कॉन्टेम्प्ट” आदेश के आधार पर बायजू को अपना बचाव पेश करने का अधिकार ही नहीं दिया, जिसके कारण उन्हें मजबूरन अपील की ओर जाना पड़ रहा है।
रवींद्रन की टीम का कहना है कि उन्हें अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया देने और जरूरी दस्तावेज जमा कराने के लिए पर्याप्त समय भी नहीं दिया गया। कंपनी ने GLAS Trust पर आरोप लगाया कि उसने अदालत को इस बात की जानकारी नहीं दी कि अल्फा लोन का पैसा न तो रवींद्रन ने और न ही BYJU’s के किसी फाउंडर ने निजी उपयोग में लिया, बल्कि यह पूरा फंड कंपनी Think & Learn Pvt Ltd (TLPL) के संचालन और विकास में लगाया गया।
‘डेलावेयर कोर्ट को गुमराह किया गया’ — BYJU’s के वकील
BYJU’s के वरिष्ठ कानूनी सलाहकार जे माइकल मैकनट ने कहा कि अदालत के फैसले में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया है।
उन्होंने कहा:
“यह एक डिफ़ॉल्ट फैसला है। कोर्ट ने बायजू को अपनी बात रखने का अवसर ही नहीं दिया और बिना सुनवाई के इतना बड़ा आदेश जारी कर दिया। हम पूरी कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।”
मैकनट का यह भी कहना है कि GLAS Trust और उससे जुड़े पक्षों ने जानबूझकर गलत जानकारी देकर फैसले को प्रभावित किया, ताकि BYJU’s फाउंडर्स की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जा सके और कंपनी के नियंत्रण पर दबाव बनाया जा सके।
US Federal Court में होंगे बड़े दावे — BYJU’s की तैयारी
प्रेस रिलीज़ में बड़ा खुलासा करते हुए BYJU’s ने बताया कि डेलावेयर अदालत के आदेश और बीते महीनों में कंपनी और फाउंडर्स के खिलाफ लगातार चलाए गए अभियानों के चलते वे US Federal Law के तहत रैकेटियरिंग और “obstruction of justice” के आरोप में 2.5 बिलियन डॉलर से ज्यादा के प्रतिदावा (counter claims) दाखिल करेंगे।
कंपनी ने कहा कि यह कार्रवाई GLAS Trust और उन सभी पक्षों के खिलाफ की जाएगी जिन्होंने BYJU’s और उसके फाउंडर्स को बदनाम करने की कोशिश की।
भारत में भी कानूनी कार्रवाई तेज़ — RP की भूमिका पर सवाल
BYJU’s ने यह भी कहा कि भारत में चल रही कानूनी प्रक्रिया के तहत भी GLAS Trust और TLPL के Resolution Professional से फंड के वास्तविक उपयोग पर जवाब मांगा गया है, मगर RP ने अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
कंपनी का कहना है कि यदि अल्फा लोन का पैसा TLPL में उपयोग हुआ, तो BYJU’s के फाउंडर्स पर व्यक्तिगत आरोप लागू ही नहीं होते।
कोर्ट ने बायजू को 1.07 बिलियन डॉलर चुकाने का आदेश क्यों दिया?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डेलावेयर बैंकरप्सी कोर्ट ने आरोप लगाया था कि BYJU’s Alpha से जुड़े फंड का इस्तेमाल और उसकी लोकेशन छिपाई गई, जिसके चलते कोर्ट ने डिफ़ॉल्ट जजमेंट सुनाते हुए रवींद्रन को $1.07 बिलियन चुकाने का आदेश दिया।
हालांकि BYJU’s इस आरोप को सिरे से खारिज करता रहा है और कंपनी का दावा है कि ऐसे किसी भी लेन-देन में निजी लाभ शामिल नहीं था।
कंपनी की गिरती स्थिति और बढ़ते कानूनी मोर्चे
पिछले दो वर्षों में BYJU’s वित्तीय, कानूनी और संचालन संबंधी कई संकटों से गुजर रही है।
- वेंचर कैपिटल निवेश में भारी गिरावट
- कारोबार में तेज रफ्तार से गिरावट
- कई देशों में नियामकीय जांच
- संस्थापक परिवार पर कानूनी कार्रवाई
सब मिलकर BYJU’s को अपने अब तक के सबसे खराब दौर में धकेल चुके हैं।
ऐसे में यह नया फैसला कंपनी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, लेकिन रवींद्रन पक्ष ने इसे “कानूनी रूप से गलत” बताते हुए जोरदार मुकाबला करने की घोषणा की है।
वैश्विक एड-टेक में BYJU’s की छवि दांव पर
BYJU’s कभी भारत की सबसे बड़ी स्टार्टअप वैल्यूएशन वाले प्लेटफ़ॉर्म के रूप में जाना जाता था, लेकिन आज स्थिति बिल्कुल उलट है। कानूनी विवाद, आंतरिक प्रबंधन विवाद, निवेशकों की नाराजगी और लगातार हो रही जांचों से कंपनी की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
US अदालत में अपील के बाद आने वाला आदेश BYJU’s और उसके संस्थापक की वैश्विक विश्वसनीयता तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।







