बुलंदशहर: गणतंत्र दिवस पर 77 छात्रों द्वारा 77 घंटे में लिखा जायेगा संविधान

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बुलंदशहर के बेसिक शिक्षा विभाग में संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक अनूठी पहल शुरू की गई है। जिलाधिकारी श्रुति के निर्देशन में बेसिक शिक्षा विभाग ने निकुंज टीम के सहयोग से 77 छात्रों का चयन किया है, जो लगातार 77 घंटे तक संविधान लिख रहे हैं। इस पहल को अपने आप में एक संभावित कीर्तिमान माना जा रहा है। बेसिक शिक्षा अधिकारी लक्ष्मीकांत पांडे ने बताया कि संविधान लेखन का कार्य विभाग परिसर में प्रारंभ हो चुका है और पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड की जा रही है। इस रिकॉर्डिंग को विभिन्न संस्थाओं को कीर्तिमान दर्ज कराने के लिए भेजा जाएगा, ताकि विभाग और छात्रों को सम्मान एवं पुरस्कार के लिए अग्रसारित किया जा सके। यह कार्यक्रम 23 जनवरी सुबह 9 बजे शुरू हुआ है और 26 जनवरी दोपहर 2 बजे तक पूरा किया जाएगा। 

बुलंदशहर में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा एक प्रेरणादायक और अनोखी पहल की जा रही है। इस कार्यक्रम के तहत छात्र-छात्राएं अपने हाथों से भारतीय संविधान लिखकर लोकतांत्रिक चेतना और संवैधानिक मूल्यों का संदेश दे रहे हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर में आयोजित इस विशेष आयोजन में 77 विद्यार्थियों की एक टीम भाग ले रही है, जो लगातार 77 घंटे तक बिना रुके संविधान लेखन का कार्य कर रही है।

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यह अभिनव कार्यक्रम 23 जनवरी की सुबह 9 बजे प्रारंभ हुआ, जो 26 जनवरी को दोपहर 2 बजे तक चलेगा। इस दौरान विद्यार्थी संविधान की प्रस्तावना से लेकर विभिन्न अनुच्छेदों को सावधानीपूर्वक अपने हाथों से लिख रहे हैं। आयोजन का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संविधान के प्रति जागरूक करना, लोकतंत्र की मूल भावना से जोड़ना और राष्ट्र निर्माण में उनकी जिम्मेदार भूमिका को सशक्त करना है।

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बेसिक शिक्षा विभाग का मानना है कि इस तरह की रचनात्मक गतिविधियां बच्चों में संविधान के प्रति सम्मान और समझ विकसित करती हैं, साथ ही उन्हें अपने अधिकारों और कर्तव्यों का बोध कराती हैं। संविधान लेखन कार्यक्रम को देखने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। पूरे परिसर में उत्साह, अनुशासन और देशभक्ति का वातावरण बना हुआ है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर की गई यह पहल न केवल आयोजन को विशेष बना रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को संविधान के महत्व से जोड़ने का सार्थक प्रयास भी मानी जा रही है।

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