उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने अपने चुनावी मिशन को लेकर सक्रियता तेज कर दी है। बुधवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय पर बसपा अध्यक्ष मायावती ने मुस्लिम भाईचारा कमेटी की अहम बैठक बुलाई, जिसमें प्रदेश के सभी 18 मंडलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का मकसद था—2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम समाज को बीएसपी के साथ मजबूती से जोड़ना। इस बैठक में मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि मुस्लिम समाज के बिना यूपी में सत्ता परिवर्तन की कल्पना अधूरी है। उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है जब बहुजन और मुस्लिम समाज एकजुट होकर बीजेपी जैसी ताकतों को चुनौती दे।
मुस्लिम भाईचारा संगठन का नया ढांचा
मायावती ने इस बैठक में खुलासा किया कि पार्टी ने उत्तर प्रदेश के सभी 18 मंडलों में दो सदस्यीय मुस्लिम भाईचारा संगठन का गठन किया है। ये संगठन पार्टी के मिशन को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम करेंगे। हर मंडल के ये प्रतिनिधि न केवल समाज को पार्टी के मिशन से जोड़ेंगे, बल्कि नए सदस्य भी बनाएंगे। मायावती ने कहा कि इस संगठन की प्रगति रिपोर्ट सीधे उनके संज्ञान में लाई जाएगी ताकि मिशन की गति बनी रहे।
उन्होंने मुस्लिम पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि बीएसपी ही एकमात्र ऐसी पार्टी रही है जिसने अपने शासनकाल में मुस्लिम समाज के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने याद दिलाया कि बीएसपी सरकार में हर समुदाय की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की गई और कानून-व्यवस्था का ऐसा उदाहरण पेश किया जिसे आज तक कोई सरकार दोहरा नहीं सकी।
“अन्य पार्टियों के दावे हवा-हवाई हैं”
मायावती ने विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस केवल दिखावे की राजनीति करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये पार्टियाँ मुस्लिम समाज के वोटों का इस्तेमाल तो करती हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उनके हितों को पूरी तरह नजरअंदाज कर देती हैं। मायावती ने कहा, “दलित, पिछड़े और मुस्लिम समाज को बार-बार इस्तेमाल किया गया, मगर हक और सम्मान किसी ने नहीं दिया। अब वक्त है कि समाज अपने हित में सही फैसला ले।”
उन्होंने 2007 की याद दिलाते हुए कहा कि जब बीएसपी को सीमित समर्थन के बावजूद मुस्लिम समाज का भरोसा मिला, तब पार्टी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। इसके विपरीत, सपा और कांग्रेस को पूरे समर्थन के बावजूद बीजेपी को हराने में सफलता नहीं मिली। मायावती ने यह भी जोड़ा कि “बीएसपी हमेशा मजलूमों की हिफाजत के लिए खड़ी रही है, जबकि अन्य पार्टियों की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का फर्क है।”
मायावती और आकाश आनंद की नई छवि
बैठक के दौरान एक और बात ने सभी का ध्यान खींचा—मायावती का बदला हुआ अंदाज़। वर्षों बाद वे हल्के स्काई ब्लू रंग के सूट में नजर आईं। सामान्यतः वे बादामी रंग का सूट पहनती हैं, जबकि खास मौकों पर पिंक रंग का। लेकिन इस बैठक में उन्होंने एक नया रंग चुना, जिसे पार्टी कार्यकर्ताओं ने “परिवर्तन के संकेत” के रूप में देखा।
उनके साथ उनके भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद भी मौजूद थे, जिन्होंने मायावती के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। आकाश भी नीले रंग के कुर्ते में नजर आए, जिससे दोनों का तालमेल पार्टी के “एकजुट परिवार” के संदेश को और मजबूत करता दिखा। बैठक में मौजूद पदाधिकारियों ने कहा कि यह न केवल एक राजनीतिक बैठक थी, बल्कि एक “नए युग” की शुरुआत भी थी, जिसमें बीएसपी खुद को युवाओं और अल्पसंख्यकों के साथ पुनर्गठित कर रही है।
बसपा का बढ़ता जोश और आगामी रणनीति
बीएसपी की यह बैठक ऐसे समय में हुई जब 9 अक्टूबर को लखनऊ में कांशीराम स्मारक स्थल पर आयोजित महारैली में लाखों की भीड़ उमड़ी थी। उस रैली के बाद से पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर है। मायावती इस ऊर्जा को बनाए रखने के लिए लगातार बैठकों का सिलसिला चला रही हैं—पहले प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक, फिर राष्ट्रीय स्तर की और अब मुस्लिम भाईचारा कमेटी की।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में बीएसपी प्रदेशभर में “भाईचारा संवाद” अभियान शुरू करने जा रही है, जिसमें दलित-मुस्लिम एकता पर विशेष जोर दिया जाएगा। मायावती का स्पष्ट लक्ष्य है—2027 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी को फिर से सत्ता में लाना। इसके लिए वे न केवल संगठन को मजबूत कर रही हैं, बल्कि पार्टी की छवि को भी नया रूप दे रही हैं—एक ऐसी पार्टी के रूप में जो शांति, समानता और सामाजिक न्याय की बात करती है।
