Sydney के प्रसिद्ध बॉन्डी बीच पर रविवार शाम हुई भीषण गोलीबारी ने ऑस्ट्रेलिया को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले में अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है, जिनमें एक हमलावर भी शामिल है। न्यू साउथ वेल्स (NSW) पुलिस ने सोमवार को इसकी पुष्टि की। पुलिस के अनुसार, इस दिल दहला देने वाले हमले को अंजाम देने वाले संदिग्ध पिता और पुत्र थे।
14 लोगों की मौके पर ही मौत, 40 घायल लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा था
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 14 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतकों की उम्र 10 वर्ष से लेकर 87 वर्ष के बीच बताई गई है, जिससे इस घटना की भयावहता और अधिक स्पष्ट होती है। सोमवार सुबह तक करीब 40 घायल लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा था, जिनमें से पांच की हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, न्यू साउथ वेल्स पुलिस आयुक्त मैल लैन्यन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि दोनों संदिग्ध हमलावरों में एक 50 वर्षीय व्यक्ति और उसका 24 वर्षीय बेटा शामिल था। 50 वर्षीय हमलावर की मौके पर ही मौत हो गई थी। पुलिस के अनुसार, उसके पास वैध हथियार लाइसेंस था और वह कानूनी रूप से छह बंदूकों का मालिक था। दूसरे संदिग्ध की भूमिका और उसकी स्थिति को लेकर जांच जारी है।
रविवार शाम 6:47 बजे हनुक्का कार्यक्रम के दौरान गोलीबारी हुई
यह गोलीबारी रविवार शाम करीब 6 बजकर 47 मिनट पर हुई, जब बॉन्डी बीच पर कम से कम एक हजार लोग यहूदी त्योहार हनुक्का के पहले दिन के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए एकत्र हुए थे। इसी दौरान दोनों हमलावरों ने भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं, जिससे अफरा-तफरी मच गई। समुद्र तट, जो आमतौर पर पर्यटकों और स्थानीय लोगों से गुलजार रहता है, कुछ ही पलों में चीख-पुकार और दहशत के मंजर में तब्दील हो गया।
यह भी पढ़ें : सिडनी के बॉन्डी बीच पर आतंकी हमला, 12 की मौत, हनुक्का समारोह में फायरिंग
घटना को आतंकवादी हमला घोषित किया गया है
पुलिस आयुक्त लैन्यन ने बताया कि रविवार रात ही इस घटना को आतंकवादी हमला घोषित कर दिया गया था। हालांकि, हमले के पीछे की मंशा और प्रेरणा को लेकर जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला वैचारिक नफरत, यहूदी विरोधी भावना या किसी अन्य उग्र विचारधारा से प्रेरित था या नहीं। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “ऑस्ट्रेलिया नफरत और हिंसा के आधार पर बंटेगा नहीं। हम इसका डटकर सामना करेंगे और यहूदी समुदाय सहित पूरे देश के साथ एकजुटता दिखाएंगे।” इससे पहले प्रधानमंत्री ने बयान में कहा था कि यह हमला “शुद्ध बुराई” का उदाहरण है और सरकार यहूदी विरोधी सोच को खत्म करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी।
ऑस्ट्रेलिया में 1996 के बाद सबसे घातक सामूहिक गोलीबारी
यह घटना ऑस्ट्रेलिया में 1996 के बाद सबसे घातक सामूहिक गोलीबारी मानी जा रही है। उल्लेखनीय है कि 1996 में तस्मानिया के पोर्ट आर्थर में हुई गोलीबारी में 35 लोगों की जान गई थी, जिसके बाद देश में हथियार कानूनों में बड़े और सख्त बदलाव किए गए थे। बॉन्डी बीच की यह त्रासदी एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया में सार्वजनिक सुरक्षा, हथियार नियंत्रण और कट्टरपंथी हिंसा के मुद्दों पर गंभीर बहस को जन्म दे रही है।