Bihar News : बिहार में पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध, किसानों के लिए नया नियम और पर्यावरण सुरक्षा

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Bihar News : बिहार सरकार ने हाल ही में पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और वायु प्रदूषण नियंत्रण को सुनिश्चित करना है। राज्य में फसल अवशेषों को जलाने की परंपरा काफी पुरानी है, लेकिन इसके गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभावों को देखते हुए सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है।

किसानों के लिए यह नियम साफ कर देता है कि अगर कोई किसान अपने खेत में फसल अवशेष यानी पराली जलाते पाया जाता है, तो उसका किसान पंजीकरण ब्लॉक कर दिया जाएगा। साथ ही, कृषि विभाग की सभी योजनाओं और लाभों से वह वंचित रहेगा। यह निर्णय BNS के अनुभाग 152 के तहत भी लागू होगा।

किसानों के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान

कृषि विभाग किसानों को पराली प्रबंधन के लिए जागरूक कर रहा है। पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक प्रचार और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। किसानों को समझाया जा रहा है कि पराली जलाने से न केवल पर्यावरण प्रभावित होता है, बल्कि खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी कम हो जाती है। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य यह है कि किसान फसल अवशेष को जलाने के बजाय सही तरीके से प्रबंधित करें। इसके लिए कई आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग किया जा सकता है, जो न केवल पराली का प्रबंधन करते हैं बल्कि मिट्टी में पोषक तत्व भी लौटाते हैं।

कंबाइन हार्वेस्टर संचालन के लिए नियम

बिहार के जिले में सभी कंबाइन हार्वेस्टर के मालिक और चालक को संचालन के लिए शपथ पत्र या आवेदन पत्र देना अनिवार्य है। केवल पास जारी होने के बाद ही फसल कटाई की अनुमति होगी। यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि फसल कटाई के दौरान भी पर्यावरण और किसानों के हितों का ध्यान रखा जाए।

पराली प्रबंधन के लिए सरकार का सहयोग

बिहार सरकार किसानों को पराली प्रबंधन में मदद करने वाले कृषि यंत्रों पर 40% से 70% तक अनुदान देती है। इनमें स्ट्रा बेलर, सुपर-हैप्पी सीडर, जीरो टिल सीड-कम फर्टिलाईजर ड्रिल, रीपर कम वाईनडर, स्ट्रा रीपर, रोटरी मल्वर, स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (SMS)शामिल हैं। इन यंत्रों का उपयोग करके किसान न केवल पराली को जलाने से रोक सकते हैं, बल्कि उसे खेत में मिला कर मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ा सकते हैं।

पौष्टिक तत्वों की प्राप्ति

एक टन पराली को जलाने के बजाय मिट्टी में मिलाने से किसान नाइट्रोजन 20-30 किलोग्राम, पोटाश 60-100 किलोग्राम, सल्फर 5-7 किलोग्राम और आर्गेनिक कार्बन 600 मिलीग्राम जैसे पोषक तत्व प्राप्त कर सकते हैं। इससे फसल की पैदावार बढ़ती है और खेत की मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ रहती है।

सकारात्मक पहल और किसानों के लिए फायदे

पराली को जलाने के बजाय सही तरीके से प्रबंधित करना किसानों के लिए कई फायदे लेकर आता है।

  1. मिट्टी की उर्वरा शक्ति में वृद्धि

  2. फसल पैदावार में सुधार

  3. सरकार के अनुदान और योजनाओं का लाभ

  4. पर्यावरण और स्वास्थ्य की सुरक्षा

  5. आधुनिक कृषि यंत्रों की सहायता से काम की सरलता

कृषि विभाग लगातार किसानों के पास जाकर उन्हें प्रशिक्षित कर रहा है कि कैसे पराली को स्ट्रा बेलर या SMS यंत्र से खेत में मिलाया जा सकता है। इसके लिए जिला स्तर पर डेमो और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।

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