भागलपुर। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का रंग अब पूरी तरह चुनावी प्रतीकों से भर गया है। निर्वाचन आयोग ने सभी प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं, जिसके साथ ही मैदान में प्रचार का शोर बढ़ गया है। इस बार चुनाव मैदान में ऐसे-ऐसे प्रतीक सामने आए हैं जो मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बन चुके हैं — कहीं बैटरी टार्च से अंधेरे को रोशन करने की तैयारी है, तो कहीं गैस सिलेंडर और बांसुरी मतदाताओं को आकर्षित कर रहे हैं।
गोपालपुर में ‘टार्च’ जलाएंगे नरेंद्र नीरज
गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र में निर्दलीय प्रत्याशी नरेंद्र कुमार नीरज को इस बार “बैटरी टार्च” का चुनाव चिह्न मिला है। पहले वे तीर के निशान पर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरने का फैसला किया है। नीरज का कहना है कि “अंधेरे में जनता के लिए टार्च जलाने” का प्रतीक उनके मिशन का प्रतीक है।
उधर, जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी मंकेश्वर सिंह को “स्कूल का बस्ता” मिला है, जबकि राजीव कुमार सिंह को “मोतियों का हार” और संजीव कुमार यादव को “बाल्टी” चुनाव चिह्न मिला है।
कहलगांव में सिलेंडर और एयरकंडीशनर की जंग
कहलगांव विधानसभा क्षेत्र का चुनाव भी दिलचस्प बन गया है। यहां निर्दलीय प्रत्याशी पवन कुमार यादव “गैस सिलेंडर” लेकर मैदान में उतरे हैं, जबकि महेंद्र तांती “एयरकंडीशनर” और रामचंद्र मंडल “लैपटॉप” के प्रतीक के साथ प्रचार में जुट गए हैं।
जदयू के शुभानंद मुकेश को जहां “तीर” मिला है, वहीं राजद के रजनीश भारती “लालटेन” जलाकर जनता के बीच जाएंगे।
चुनावी चिह्नों की यह विविधता मतदाताओं के लिए चुनाव को और रोचक बना रही है।
भागलपुर में बांसुरी की धुन और टॉर्च की रोशनी
भागलपुर सीट पर भी इस बार प्रतीकों की अनोखी टक्कर देखने को मिलेगी। एसजे वेदांत को “बांसुरी” चुनाव चिह्न मिला है, जबकि रवि कुमार सिंह “बैटरी टार्च” के साथ प्रचार करेंगे। रोहित पांडेय (भाजपा) “कमल” पर और अजीत शर्मा (कांग्रेस) “हाथ” के निशान पर चुनाव लड़ रहे हैं।
यहां निर्दलीय प्रत्याशियों में धनंजय पांडेय को “अंगूठी”, सुबोध मंडल को “गैस सिलेंडर”, और निशा भारती को “सेब” का चुनाव चिह्न मिला है।
सुल्तानगंज और नाथनगर में भी दिलचस्प मुकाबले
सुल्तानगंज विधानसभा से बंटी ठाकुर “हीरा” पर, जबकि सुनिल कुमार “बैटरी टार्च” के साथ जनता के बीच हैं।
नाथनगर विधानसभा में तो मानो चुनाव चिह्नों का पूरा मेले जैसा माहौल है — किसी के पास “बेबी वॉकर” है, किसी के पास “गैस सिलेंडर” तो किसी के पास “प्रेशर कूकर”।
प्रचार में नई रौनक, छठ के बाद तेज़ी
चुनाव चिह्न घोषित होने के साथ ही प्रत्याशियों ने अपने-अपने प्रचार अभियान को नई गति दे दी है। अभी जनसंपर्क अभियान पर फोकस किया जा रहा है, लेकिन छठ पूजा के बाद प्रचार का शोर और तेज़ होने वाला है। सड़कों पर प्रचार गाड़ियाँ, दीवारों पर पोस्टर और सोशल मीडिया पर चुनावी नारे अब बिहार की हर गलियों में गूंजने लगे हैं।
चुनाव चिह्न बन गए पहचान
बिहार की राजनीति में चुनाव चिह्न सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि जनता से जुड़ाव का प्रतीक बन गए हैं। “टार्च” का मतलब उम्मीद की रोशनी, “गैस सिलेंडर” घर-घर की रसोई से जुड़ी भावना, और “बांसुरी” मधुरता व शांति का प्रतीक बन गई है। मतदाता अब केवल उम्मीदवार नहीं, बल्कि उनके प्रतीकों से भी जुड़ाव महसूस कर रहे हैं।