मिडिल-ईस्ट में पिछले काफी समय से जिस तरह के हालात बने हुए हैं, उसने पूरी दुनिया की नींद उड़ा रखी है। युद्ध और आपसी संघर्ष की वजह से सबसे ज्यादा असर तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है, ऐसे में वहां जारी तनाव सीधा हमारी रसोई और जेब पर असर डालता है। लेकिन इसी बीच एक बहुत अच्छी खबर सामने आई है। जोखिम भरे रास्तों और युद्ध की आशंकाओं को पीछे छोड़ते हुए दो विशाल LPG जहाज भारत की समुद्री सीमा में दाखिल हो चुके हैं, जिससे देश की भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ी मजबूती मिली है।

मुंबई के तट पर पहुँचा BW TYR
सबसे पहले बात करते हैं गैस कैरियर BW TYR की, जिसने सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसी खतरनाक जगह को पार कर लिया है और अब मुंबई के तट पर पहुंच चुका है। यह जहाज भारत पेट्रोलियम (BPCL) के लिए गैस की एक बहुत बड़ी खेप लेकर आया है। इस जहाज की खास बात यह है कि इस पर मौजूद सभी 27 नाविक भारतीय हैं, जो सुरक्षित वतन लौट आए हैं। इस टैंकर में करीब 23,653 मीट्रिक टन प्रोपेन और 22,926 मीट्रिक टन ब्यूटेन मौजूद है। इतनी बड़ी मात्रा में ईंधन आने से घरेलू एलपीजी और औद्योगिक कामकाज के लिए गैस की किल्लत होने का डर अब खत्म हो गया है।

न्यू मैंगलोर की ओर बढ़ता BW ELM
मुंबई के बाद अब सबकी नजरें कर्नाटक के न्यू मैंगलोर बंदरगाह पर टिकी हैं, जहाँ दूसरा बड़ा जहाज BW ELM पहुंचने वाला है। ताजा जानकारी के मुताबिक, यह जहाज 1 अप्रैल की दोपहर तक बंदरगाह पर लंगर डाल देगा। यह जहाज हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के लिए ईंधन लेकर आ रहा है। इस पर भी 28 भारतीय नाविक सवार हैं, जो चुनौतीपूर्ण माहौल में अपना फर्ज निभाकर लौट रहे हैं। इस जहाज पर भी लगभग 47,000 मीट्रिक टन से ज्यादा प्रोपेन और ब्यूटेन लदा हुआ है, जो दक्षिण भारत की गैस सप्लाई चेन को सुचारू बनाए रखने में मदद करेगा।
देखा जाए तो खाड़ी देशों और ईरान के बीच चल रहे इस संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन को बाधित करने की कोशिश की है, लेकिन भारतीय तेल कंपनियों की सक्रियता और हमारे नाविकों के साहस ने एक बड़ा संकट टाल दिया है। इन दोनों जहाजों के आने से न सिर्फ बाजार में स्थिरता आएगी, बल्कि आम आदमी को भी इस बात का सुकून रहेगा कि आने वाले दिनों में रसोई गैस की कमी नहीं होने वाली है। यह वाकई भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक जीत है।
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