भारत ने Semiconductor निर्माण के क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के लिए एक नया मोड़ लिया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सिंगापुर में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब एक नई दिशा में प्रवेश कर चुका है। इस मिशन को अब न केवल सरकारी प्रोत्साहन मिल रहा है, बल्कि निजी निवेश भी बढ़ने लगा है। यह विकास भारत के लिए एक अहम मील का पत्थर है, क्योंकि यह देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर निर्माण हब बनाने की दिशा में एक कदम और करीब लाता है।
भारत के Semiconductor इकोसिस्टम में निजी निवेश की शुरुआत
वैष्णव ने अपने भाषण में कहा, “भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब उस मोड़ पर है जहां निजी पूंजी खुद बाजार में उतरने लगी है।” उनका कहना था कि भारत के पास मजबूत डिज़ाइन इकोसिस्टम और बड़ी इंजीनियरिंग प्रतिभा है, जिसने वैश्विक चिप कंपनियों के बीच भरोसा पैदा किया है। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अब निजी निवेशकों का रुझान बढ़ा है, जो पहले केवल सरकारी प्रोत्साहन पर निर्भर थे। अब निजी कंपनियां खुद भारत के सेमीकंडक्टर बाजार में निवेश कर रही हैं, जो इस क्षेत्र की वृद्धि को और भी तेज़ी से आगे बढ़ाएगा।
सिंगापुर में आयोजित इस महत्वपूर्ण फोरम में अश्विनी वैष्णव ने यह भी कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण की क्षमता को अगले दशक तक वैश्विक मानकों के बराबर लाने का लक्ष्य है। 2031-32 तक भारत का उद्देश्य सेमीकंडक्टर निर्माण में उन देशों के बराबर पहुंचना है, जिन्होंने आज वैश्विक नेतृत्व स्थापित किया है।
सरकारी प्रोत्साहन नीतियों का प्रभाव
भारत सरकार ने इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोत्साहन नीतियां बनाई हैं। हाल ही में, सरकार ने 10 अरब डॉलर (लगभग ₹83,000 करोड़) के इंसेंटिव पैकेज की घोषणा की है, जिससे कई बड़े सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं। इस पैकेज के तहत माइक्रॉन टेक्नोलॉजी जैसे बड़े नामों ने भारत में चिप निर्माण के लिए अपनी फैक्ट्रियां स्थापित की हैं। इसके अलावा, टाटा समूह समेत 10 कंपनियां भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण की तैयारी कर रही हैं, जो देश में चिप निर्माण के एक नए युग की शुरुआत को दर्शाता है।
आने वाले सालों में तीन सेमीकंडक्टर प्लांट वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने जा रहे हैं, जो भारत के सेमीकंडक्टर उत्पादन को और भी बढ़ावा देंगे। सरकार के इन कदमों से यह साफ है कि भारत अब एक मजबूत सेमीकंडक्टर निर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
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तकनीकी लोकतंत्रीकरण की ओर एक कदम
वैष्णव ने अपने संबोधन में यह भी बताया कि भारत का लक्ष्य है कि कंप्यूटिंग क्षमता और तकनीक को आम लोगों के लिए सुलभ और सस्ती बनाया जाए। उन्होंने कहा, “कॉमन और अफॉर्डेबल कंप्यूटर सुविधा तकनीक का लोकतंत्रीकरण सुनिश्चित कर रही है।” भारत में अब इस क्षेत्र में तकनीकी पहुँच को आम जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।
भारत सरकार का उद्देश्य है कि भारतीय नागरिकों को एक सशक्त और सक्षम डिजिटल वातावरण मिले, जहां वे हर प्रकार की तकनीकी सुविधाओं का लाभ उठा सकें। इस दिशा में किए गए प्रयासों से देश में तकनीकी समावेशन की प्रक्रिया को गति मिलेगी, और भारत डिजिटल दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बना पाएगा।
India’s approach of a common and affordable compute facility is ensuring democratisation of technology.
📍Bloomberg New Economy Forum, Singapore pic.twitter.com/x3Ah2rcKZu
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) November 20, 2025







