Bareka Varanasi: भारतीय रेल के इतिहास में वाराणसी की एक संस्था ने अपनी मेहनत और लगन से एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। हम बात कर रहे हैं बनारस रेल इंजन कारखाना की, जिसने हाल ही में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में उत्पादन के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यह खबर न केवल रेल प्रेमियों के लिए बल्कि हर उस भारतीय के लिए गर्व की बात है जो देश की प्रगति को करीब से देख रहा है। Bareka ने जिस रफ्तार से काम किया है, उससे साफ है कि आने वाले समय में भारतीय ट्रेनों की रफ्तार और सुरक्षा दोनों में जबरदस्त सुधार होने वाला है।
वाराणसी स्थित Bareka ने महाप्रबंधक आशुतोष पंत के नेतृत्व में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 572 रेल इंजनों का निर्माण किया है। यह अब तक का सबसे अधिक वार्षिक उत्पादन है। अगर हम पिछले साल की तुलना करें, तो 2024-25 में यहाँ 477 इंजन बने थे, जिसका मतलब है कि इस बार उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है। Bareka की यह कामयाबी यहाँ काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की दिन-रात की मेहनत का नतीजा है, जिन्होंने तकनीकी बारीकियों का ध्यान रखते हुए लक्ष्य से भी ज्यादा काम कर दिखाया।
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विद्युत और निर्यात इंजनों का मिश्रण
इस साल निर्मित 572 इंजनों में सबसे बड़ी संख्या इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव की है। Bareka ने भारतीय रेलवे के लिए 558 आधुनिक विद्युत इंजन तैयार किए हैं, जिनमें माल ढोने वाले और यात्रियों को ले जाने वाले दोनों तरह के लोको शामिल हैं। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाते हुए Bareka ने मोजांबिक को निर्यात करने के लिए 10 डीजल इंजन भी बनाए हैं। यह दिखाता है कि बनारस में बने इंजनों की मांग अब केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी बाजार में भी इनकी काफी साख बढ़ रही है।

सुरक्षा और आधुनिक तकनीक पर जोर
आज के समय में रेल यात्रा के दौरान सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए Bareka ने इंजनों में ‘कवच’ जैसी अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली और आधुनिक सिग्नल लाइट का इस्तेमाल किया है। लोको पायलटों की सुविधा के लिए कैब में वाटरलेस यूरिनल और बेहतर सीटों की व्यवस्था की गई है। इन नवाचारों के लिए Bareka को प्रोडक्शन यूनिट श्रेणी में प्रथम पुरस्कार से भी नवाजा गया है। तकनीक के साथ-साथ गुणवत्ता के मामले में भी इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का सिल्वर ग्रेड प्रमाण-पत्र मिला है, जो इसकी विश्वसनीयता पर मुहर लगाता है।

पर्यावरण और राजभाषा में भी अव्वल
उत्पादन के साथ-साथ Bareka ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी मिसाल पेश की है। यहाँ सोलर पावर प्लांट के जरिए बिजली बनाई जा रही है और वर्षा जल संचयन के लिए भी खास इंतजाम किए गए हैं। इसके अलावा, हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए भी Bareka को “रेल मंत्री राजभाषा शील्ड” मिली है। सरकार ने संस्थान की क्षमता को देखते हुए अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 642 इंजनों का और भी बड़ा लक्ष्य सौंपा है, जिसे पूरा करने के लिए यहाँ की टीम अभी से तैयारी में जुट गई है।
देखा जाए तो Bareka ने साबित कर दिया है कि अगर सही प्रबंधन और इच्छाशक्ति हो, तो किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। 572 इंजनों का निर्माण करना कोई छोटी बात नहीं है, और यह भारतीय रेल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आने वाले समय में Bareka से निकलने वाले ये इंजन न केवल देश के कोने-कोने तक माल पहुंचाएंगे, बल्कि यात्रियों के सफर को भी सुरक्षित और आरामदायक बनाएंगे। हमें उम्मीद है कि यह संस्थान भविष्य में भी ऐसे ही नए कीर्तिमान स्थापित करता रहेगा।
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