उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसने पूरे इलाके को सदमे और शोक में डुबो दिया है। रामगांव थाना क्षेत्र में विजय मौर्या नामक एक किसान ने गुस्से और तनाव के चलते ऐसा कदम उठा लिया जिसने न केवल दो मासूम किशोरों की जान ले ली, बल्कि उसके अपने पूरे परिवार को भी मौत के आगोश में धकेल दिया। यह घटना केवल एक आपराधिक कांड नहीं बल्कि मानसिक तनाव और क्रोध के खतरनाक परिणामों की सजीव मिसाल बन गई है, जिस पर समाज और प्रशासन दोनों को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विजय मौर्या ने अपने खेत में लहसुन की बुवाई कराने के लिए दो किशोरों—सूरज यादव और सनी वर्मा—को बुलाया था। लेकिन चूंकि यह नवरात्र का आखिरी दिन था और घर पर पूजा-पाठ व अन्य काम अधिक थे, इसलिए दोनों किशोरों ने खेत में काम करने से मना कर दिया। इस मामूली बात ने विजय को इतना क्रोधित कर दिया कि उसने गुस्से में आकर गड़ासे से दोनों किशोरों पर हमला कर दिया। वार इतने घातक थे कि सूरज और सनी की मौके पर ही मौत हो गई।
हत्या के बाद विजय मौर्या का गुस्सा और निराशा चरम पर पहुँच गया। उसने घर लौटकर दरवाजे बंद कर लिए और अपने ही घर में आग लगा दी। आग इतनी तेजी से फैली कि उसका पूरा परिवार, जिसमें उसकी पत्नी, बच्चे और कुछ मवेशी शामिल थे, जिंदा जलकर मौत का शिकार हो गए। स्थानीय ग्रामीणों ने घटना की सूचना पुलिस और फायर ब्रिगेड को दी। दल मौके पर पहुँचा, आग बुझाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन तब तक सब कुछ राख हो चुका था। पुलिस ने मृतकों के शवों को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में मातम का माहौल है। ग्रामीण इसे अकल्पनीय त्रासदी मान रहे हैं। उनका कहना है कि विजय मौर्या पहले से ही मानसिक दबाव में था और अक्सर गुस्से में रहने वाला इंसान था। इस त्रासदी ने यह साफ कर दिया है कि मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी और क्रोध पर नियंत्रण न होना किस तरह समाज और परिवार को बर्बादी के कगार पर पहुँचा सकता है।







