उत्तराखंड के चमोली ज़िले में स्थित बद्रीनाथ धाम में बुधवार सुबह बर्फबारी हुई, जिससे पूरा मंदिर परिसर बर्फ की सफेद चादर से ढक गया। बर्फबारी के बाद बद्रीनाथ धाम का दृश्य इतना मनमोहक हो गया कि श्रद्धालु और पर्यटक दोनों ही ठंड की परवाह किए बिना “जय बद्री विशाल” के जयकारों के साथ मंदिर पहुंचने लगे। मौसम में आए इस अचानक बदलाव से तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया है। तीर्थ यात्रियों के बीच यह खबर जैसे सर्दियों की शुरुआत का उत्सव बन गई। स्थानीय प्रशासन ने यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह दी है, वहीं मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक ऊंचाई वाले इलाकों में और बर्फबारी की संभावना जताई है।
बर्फ की चादर में लिपटा बद्रीनाथ धाम, श्रद्धालुओं का उत्साह बरकरार
बर्फबारी के बाद बद्रीनाथ धाम का नजारा पूरी तरह बदल गया है। मंदिर परिसर, आसपास की पहाड़ियां और अलकनंदा नदी का किनारा, सबकुछ जैसे किसी के सपनों के संसार की तस्वीर बन गई हो। कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्तों का जोश कम नहीं हुआ। वे ऊनी वस्त्रों और गर्म कंबलों में लिपटे हुए, हाथों में आरती की थाली लेकर भगवान बद्रीनाथ के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, बर्फबारी के बाद पर्यटकों की संख्या में भी अचानक वृद्धि हुई है।
इस वर्ष अब तक लगभग 15 लाख 90 हजार से अधिक श्रद्धालु बद्री विशाल के दर्शन कर चुके हैं। परंपरा के अनुसार, बद्रीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर 2025 को दोपहर 2:56 बजे शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। कपाट बंद होने की तिथि इस बार विजयदशमी पर तय की गई थी। तब तक धाम में दर्शन जारी रहेंगे, और श्रद्धालुओं से उम्मीद की जा रही है कि वे बढ़ती ठंड के बीच भी बड़ी संख्या में पहुंचेंगे।
केदारनाथ और हेमकुंड में भी बर्फबारी, पूरे गढ़वाल में छाया शीतलहर का असर
बद्रीनाथ के साथ ही केदारनाथ धाम में भी देर रात से बर्फबारी शुरू हो गई। मंदिर परिसर और आसपास की चोटियां बर्फ से ढक गई हैं, जिससे पूरा केदारपुरी इलाका दिव्य आभा से चमक उठा है। यह सीजन की पहली बर्फबारी है जो 23 अक्टूबर को कपाट बंद होने के बाद हुई। वहीं, हेमकुंड साहिब और नीति घाटी के कई हिस्सों में भी साहस दर्ज किया गया है। लगातार बर्फबारी के चलते तापमान में भारी गिरावट आई है और क्षेत्र में सर्द हवाओं का असर साफ महसूस किया जा रहा है।
IMD के अनुसार, पर्वतीय जिलों में अगले दो दिनों तक हल्की से मध्यम बर्फबारी जारी रह सकती है। इससे शीतलहर की स्थिति और भी बढ़ेगी, खासकर सुबह और शाम के समय। चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है। प्रशासन ने यात्रियों को सतर्क रहने और मौसम विभाग के अलर्ट के अनुसार ही यात्रा करने की अपील की है।
पर्यटन और धार्मिक यात्रा पर बर्फबारी का असर, प्रशासन ने किए इंतजाम
बर्फबारी से जहां धाम की सुंदरता में चार चांद लग गए हैं, वहीं ठंड के कारण तीर्थयात्रियों को कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन ने यात्रियों के लिए अलाव की व्यवस्था की है और आपात सेवाओं को अलर्ट पर रखा गया है। सीमांत क्षेत्रों की ओर जाने वाले पर्यटकों को मौसम की स्थिति देखकर ही आगे बढ़ने की सलाह दी जा रही है।
बद्रीनाथ के स्थानीय होटल और धर्मशालाओं में ठहरने की बुकिंग तेजी से बढ़ रही है। बर्फ से ढके मंदिर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिससे उत्तराखंड पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है। राज्य पर्यटन विभाग का कहना है कि नवंबर के शुरुआती दिनों में ऐसी प्राकृतिक सुंदरता देखने का मौका कम ही मिलता है। यह बर्फबारी न केवल धार्मिक भावनाओं को जागृत कर रही है बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी फायदेमंद साबित हो सकती है।
आने वाले दिनों में बढ़ेगी ठंड, मौसम रहेगा शुष्क
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, छह से आठ नवंबर के बीच उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है, लेकिन तापमान में गिरावट जारी रहेगी। मैदानी इलाकों में सुबह के समय कोहरा छा सकता है, जबकि पहाड़ी जिलों में शीतलहर का असर और तेज होगा।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय बद्रीनाथ धाम में शून्य डिग्री तापमान सामान्य है, पर लगातार बर्फबारी होने से यह माइनस में भी जा सकता है। ऐसे में तीर्थयात्रियों को गर्म कपड़े, ऊनी दस्ताने और थर्मल वस्त्र साथ रखने की सलाह दी गई है। स्थानीय लोग बताते हैं कि नवंबर के शुरुआती दिनों में इस तरह की बर्फबारी बहुत कम देखने को मिलती है, इसलिए यह मौसम परिवर्तन का संकेत भी है।बर्फ से ढके बद्रीनाथ धाम की यह झलक न सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है, बल्कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता का भी प्रतीक बन गई है। जैसे-जैसे कपाट बंद होने की तिथि नजदीक आ रही है, भक्तों में भगवान बद्रीनाथ के अंतिम दर्शन का उत्साह चरम पर है।








