बदायूं में औद्योगिक क्रांति की दस्तक: गंगा एक्सप्रेस-वे के पास बनेगा विशाल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर

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बदायूं के औद्योगिक भविष्य की नई इबारत

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में विकास की नई गाथा लिखी जा रही है। गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे बिनावर और दातागंज क्षेत्र में औद्योगिक गलियारा (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) तेजी से आकार ले रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए बिनावर में 1600 बीघा और दातागंज में करीब 1000 बीघा भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है। यह क्षेत्र जल्द ही देश की 200 से अधिक कंपनियों के औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरने जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद करीब 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे जिले की अर्थव्यवस्था और जीवनस्तर में बड़ा बदलाव आएगा। यूपीडा (यूपी एक्सप्रेस-वे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी) इस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी कर रही है।

निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी, 40 कंपनियों ने किया आवेदन

गंगा एक्सप्रेस-वे के जंक्शन पॉइंट पर स्थित बिनावर का घटपुरी इलाका इस परियोजना का केंद्र माना जा रहा है। यहीं से एक्सप्रेस-वे का प्रमुख मार्ग निकलेगा, जो औद्योगिक गतिविधियों को नई दिशा देगा। यूपीडा की वेबसाइट पर जारी विज्ञापन के बाद अब तक 40 कंपनियों ने अपने उद्योग स्थापित करने के लिए आवेदन किया है। प्रशासन का कहना है कि इन कंपनियों में देश की प्रमुख निर्माण, कृषि-प्रसंस्करण और मेंथा-आधारित यूनिट्स शामिल हैं। बदायूं पहले से ही मेंथा और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है, और अब यह औद्योगिक केंद्र बनने जा रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर पहचान मिलेगी।

स्थानीय उद्यमियों का कहना है कि यह योजना सिर्फ औद्योगिक नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत भी है। रोजगार मिलने से युवाओं का पलायन रुकेगा और छोटे व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा।



गांवों में बढ़ी रौनक, जमीनों के दाम चार गुना तक बढ़े

औद्योगिक गलियारा बनने की घोषणा के बाद बिनावर और दातागंज के आसपास के 40 गांवों की तस्वीर बदलने लगी है। जहां पहले जमीनें दो लाख रुपये बीघा तक बिकती थीं, वहीं अब कीमत आठ लाख रुपये तक पहुंच गई है। जिन लोगों की जमीन अधिग्रहण में नहीं गई, उनकी तो मानो ‘लॉटरी’ लग गई है। कई लोग अब खुद के छोटे उद्योग या दुकानें खोलने की तैयारी में हैं, ताकि बढ़ते ट्रैफिक और औद्योगिक गतिविधियों से लाभ कमा सकें।

स्थानीय निवासी बताते हैं कि पहले यह इलाका पूरी तरह कृषि पर निर्भर था, लेकिन अब लोग आधुनिक व्यवसायिक सोच की ओर बढ़ रहे हैं। भोजनालय, ढाबे, परिवहन सेवाएं, और मेंथा आधारित छोटी यूनिटें तेजी से स्थापित हो रही हैं। यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित हो रहा है।


40 गांवों की 50 हजार आबादी को होगा सीधा लाभ

औद्योगिक गलियारे से सीधे तौर पर 40 गांवों की करीब 50 हजार की आबादी को फायदा मिलेगा। प्रशासन के अनुसार, यहां उद्योग स्थापित होने से क्षेत्र में बिजली, सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी व्यापक विकास होगा। इससे न सिर्फ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार आएगा।

बिनावर क्षेत्र का घटपुरी जंक्शन इस परियोजना की ‘जीवनरेखा’ साबित होगा, जहां एक्सप्रेस-वे से जुड़ाव के कारण देश के बड़े शहरों से कनेक्टिविटी आसान होगी। यह क्षेत्र लॉजिस्टिक हब के रूप में भी विकसित हो सकता है। युवाओं के लिए यह बड़ा अवसर होगा क्योंकि उन्हें घर के पास ही रोजगार और व्यवसाय दोनों विकल्प मिलेंगे।

जिले के उद्यमियों को मिलेगी प्राथमिकता, बदलेगा विकास का नक्शा

जिले के उपायुक्त उद्योग अशोक कुमार उपाध्याय ने बताया कि इस औद्योगिक गलियारे में जिले के उद्यमियों को प्राथमिकता दी जाएगी। उनका कहना है कि पहले प्रयास रहेगा कि बदायूं के स्थानीय उद्योगपति ही यहां अपने प्लांट स्थापित करें, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास का लाभ अधिक लोगों तक पहुंचे। इसके बाद अन्य जिलों के उद्यमियों को अवसर दिया जाएगा।

यह परियोजना केवल उद्योगों की स्थापना तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह बदायूं को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल कर सकती है। एक्सप्रेस-वे से सीधा जुड़ाव होने के कारण दिल्ली, लखनऊ, कन्नौज और प्रयागराज जैसे बड़े शहरों तक पहुंच आसान होगी। इससे न केवल औद्योगिक निवेश बढ़ेगा बल्कि पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियां भी तेज होंगी।

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