Atal Bihari Vajpayee जी की जयंती पर लखनऊ में डॉ. कुमार विश्वास ने गाया-“भवानी सुन लो राम कहानी…”; बोले- मुख्यमंत्री को बहुत भाषाएं आती हैं

Atal Bihari Vajpayee

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भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee की जयंती की पूर्व संध्या पर लखनऊ के कन्वेंशन सेंटर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास ने अपनी काव्य प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ. विश्वास ने अपनी प्रसिद्ध कविता “भवानी सुन लो राम कहानी…” सुनाई, जिससे कार्यक्रम में मौजूद सभी लोग भावुक हो गए। कविता सुनने के बाद रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी गुनगुनाते नजर आए और ताली बजाई।

चुटीले अंदाज में कुमार विश्वास की बातें

इस कार्यक्रम में डॉ. कुमार विश्वास ने चुटीले अंदाज में कहा, “हमारे मुख्यमंत्री जी को बहुत-सी भाषाएं आती हैं, क्योंकि वह कहते हैं कि जो जिस भाषा में समझेगा, उसे उस भाषा में समझाएंगे।” इसके बाद उन्होंने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को लेकर कहा, “कुछ दिन पहले उनके अंदर का सिंह देखा क्या? अगर अटल जी विश्वविद्यालय थे, तो राजनाथ जी कुलपति हैं।”

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अटल जी का योगदान और प्रेरणा 

कार्यक्रम में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान को याद करते हुए कहा, “पाकिस्तान दौरे पर एक महिला ने अटल जी से शादी के बदले तोहफे में कश्मीर मांगा। तब अटल जी ने उससे दहेज में पाकिस्तान मांग लिया था।” इसके अलावा उन्होंने अटल जी के प्रधानमंत्री पद के सम्मान के बारे में कहा कि “कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं जिनका सम्मान उनके पद के कारण होता है, लेकिन अटल जी की वजह से प्रधानमंत्री पद का सम्मान था। अटल जी किसी भी पद पर नहीं होते तब भी उनका उतना ही सम्मान होता।”

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सीएम योगी ने दी अटल जी को ‘विकास पुरुष’ की उपाधि

सीएम योगी आदित्यनाथ ने अटल बिहारी वाजपेयी को ‘विकास पुरुष’ करार देते हुए कहा, “यह कन्वेंशन सेंटर अटल जी की ही देन है। अटल जी ने छह दशकों तक भारतीय राजनीति को नई ऊंचाई दी। वे भारतीय जनमानस के लिए कवि, पत्रकार, राजनेता और अभिभावक के रूप में सक्रिय रहे।”

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डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अटल जी को याद किया 

इस दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा, “मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे इतने महान व्यक्तित्व के स्वामी अटल जी को निकट से देखने और अनुभूत होने का अवसर मिला। वे राष्ट्रीय हितों के रक्षक और सामाजिक समरसता के प्रेरक थे।” उन्होंने अटल जी की कविताओं का भी उल्लेख किया, जिनसे उन्होंने सदन में कई बार अपने विरोधियों को परास्त किया। उनके शब्दों के तीर इतने सहज और सरल रहते कि विरोधी उनकी कविताओं के कायल बन जाते। उनकी रचनाओं में भारत की भावी पीढ़ी को प्रेरणा और त्याग का गहरा संदेश है।

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अटल जी की कविता और राजनीति में योगदान 

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि अटल जी ने अपनी कविताओं के माध्यम से न केवल राजनीति में अपनी छाप छोड़ी, बल्कि अपनी रचनाओं में भारत की भावी पीढ़ी को प्रेरणा और त्याग का गहरा संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि अटल जी की कविता “हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय” आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है। 1941 में उन्होंने कालीचरण कॉलेज में या कविता गुरुजी के सामने पढ़ी थी।

अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती का यह आयोजन न केवल उनकी काव्यकला और राजनीतिक यात्रा को याद करने का अवसर था, बल्कि यह भी दिखाता है कि उनका व्यक्तित्व राजनीति से कहीं बढ़कर था। उनके शब्दों, उनके नेतृत्व और उनके योगदान ने हमेशा देशवासियों को प्रेरित किया है, और यह कार्यक्रम उनकी यादों को ताजगी देने का एक प्रयास था।

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