अरुणाचल प्रदेश में दर्दनाक हादसा: 1000 फीट गहरी खाई में गिरा मजदूरों से भरा ट्रक, अब तक 21 की मौत

अरुणाचल

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अरुणाचल प्रदेश के अनजाने पहाड़ों में मंगलवार रात एक ऐसी दिल दहला देने वाली दुर्घटना सामने आई जिसने पूरे क्षेत्र को सदमे में डाल दिया। हयुलियांग–छगलागम रोड पर लैलांग बस्ती के पास एक ट्रक लगभग 1000 फीट गहरी खाई में गिर गया। इस ट्रक में 22 से अधिक मजदूर सवार थे, जो रोज़ाना की तरह निर्माण कार्य के लिए जा रहे थे। हादसा इतना भयावह था कि मौके से कोई भी मदद तुरंत नहीं पहुंच पाई और यह घटना देश को तब पता चली जब एक घायल मजदूर दो दिन बाद जान बचाकर पैदल ही आर्मी कैंप पहुंचा।

हादसे में एकमात्र जीवित बचे मजदूर ने दो दिनों तक घने जंगलों, खतरनाक ढलानों और झाड़ियों को पार करते हुए किसी तरह आर्मी कैंप तक पहुंचकर पूरी घटना की जानकारी दी। उसकी सूचना के बाद गुरुवार सुबह सेना की टीमें तुरंत सक्रिय हुईं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया।

रेस्क्यू अभियान और दुखद आंकड़े

सेना के जवानों, जिला प्रशासन, पुलिस और स्थानीय स्वयंसेवकों ने मुश्किल परिस्थितियों में खाई के तल तक पहुंचने का प्रयास किया। अब तक 18 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि प्रशासन ने पुष्टि की है कि ड्राइवर और क्लीनर समेत कुल 21 मजदूरों की मौत हो चुकी है। कई शव गहरी खाई और घने जंगल की वजह से पहुंच से दूर थे, जिसके कारण अभियान अभी भी जारी है।

हादसे में मारे गए सभी मजदूर असम के तिनसुकिया जिले से थे और हयुलियांग में चल रहे निर्माण कार्य में लगे हुए थे। पहाड़ों में दुर्गम सड़कों और मौसम की चुनौतियों के बीच ये मजदूर रोज़ाना की तरह काम पर जाने के लिए निकले थे, लेकिन किस्मत ने उस दिन उनका साथ नहीं दिया।

क्या ओवरलोड था ट्रक ?

स्थानीय प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्राथमिक तौर पर यह आशंका जताई जा रही है कि ट्रक ओवरलोड हो सकता है या फिर सड़क की खराब हालत दुर्घटना की वजह बनी हो। पहाड़ी इलाकों की संकरी और खतरनाक सड़कें पहले भी कई हादसों की वजह बन चुकी हैं। बरसात और भूस्खलन से क्षतिग्रस्त सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही अक्सर जोखिमपूर्ण रहती है।

मानवता को छू लेने वाली कहानी

इस हादसे में एकमात्र जीवित बचे मजदूर की हिम्मत और संघर्ष अपने आप में एक बड़ी कहानी है। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उसने दो दिन तक जंगलों में भटकते हुए मदद पहुंचाने का प्रयास जारी रखा। उसकी कोशिशों ने ही बाकी मजदूरों के शवों को खोजने में रेस्क्यू टीमों की मदद की।

बचाव अभियान जारी

खबर लिखे जाने तक सेना, स्थानीय प्रशासन और NDRF की टीमें संयुक्त रूप से बचाव अभियान में लगी हुई हैं। गहरी खाई और दुर्गम इलाके के कारण ऑपरेशन लगातार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

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