दुनिया भर में एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस (AMR) तेजी से बढ़ रही है, जो आधुनिक चिकित्सा के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। संक्रमणों का इलाज कठिन होता जा रहा है, और यह समस्या विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया में गंभीर रूप ले रही है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि अभी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में लाखों लोग प्रभावित हो सकते हैं।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार
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हर साल AMR के कारण 1 मिलियन से अधिक लोगों की मौत होती है।
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एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध बढ़ने से आम संक्रमण भी खतरनाक बन रहे हैं और स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव बढ़ रहा है।

AMR क्या है?
रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) तब होता है जब संक्रमण पैदा करने वाले रोगाणु (बैक्टीरिया, वायरस, या फंगस) उनके इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं के असर का प्रतिरोध करते हैं। ये प्रतिरोधी बैक्टीरिया फैल सकते हैं और लोगों या जानवरों को संक्रमित कर सकते हैं। इनका इलाज गैर-प्रतिरोधी बैक्टीरिया की तुलना में ज़्यादा मुश्किल होता है। रोगाणुरोधी दवाएं वे दवाएं हैं जो रोग पैदा करने वाले कीटाणुओं (बैक्टीरिया, वायरस, फंगस) को मारती हैं या उनकी वृद्धि को धीमा करती हैं। एंटीबायोटिक्स सबसे ज़्यादा इस्तेमाल की जाने वाली रोगाणुरोधी दवाएं हैं। रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) तब होता है जब संक्रमण पैदा करने वाले कुछ रोगाणु (बैक्टीरिया, वायरस, या कवक) उनके इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं के प्रभाव का प्रतिरोध करते हैं। इससे ‘उपचार विफलता’, या संक्रमण के कारण का इलाज करने में असमर्थता हो सकती है।
विश्व AMR जागरूकता सप्ताह 2025 का संदेश
“Act Now: Protect Our Present, Secure Our Future”
(अभी कार्रवाई करें, वर्तमान की सुरक्षा करें और भविष्य सुरक्षित बनाएं)
दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थिति गंभीर
- 2023 में एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंस के सबसे ज्यादा मामले इसी क्षेत्र में देखे गए।
- चुनौतियां: दवाओं तक असमान पहुंच, स्वास्थ्य प्रणाली में विविधता, एंटीमाइक्रोबियल उपयोग के अलग पैटर्न।
डब्ल्यूएचओ का समाधान सुझाव
- नवाचार, साझेदारी और मजबूत नेतृत्व के जरिए AMR से निपटना होगा।
- सभी को मिलकर कदम उठाने होंगे ताकि जीवनरक्षक दवाएं भविष्य में भी प्रभावी बनी रहें।
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