अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के भौतिकी विभाग के वैज्ञानिकों ने लिक्विड क्रिस्टल मेमोरी डिवाइस पर पेटेंट हासिल किया है, जो डेटा स्टोरेज के क्षेत्र में एक नई क्रांति ला सकता है। इस आविष्कार के पीछे डॉ. जय प्रकाश, डॉ. देपांशु वार्ष्णेय और डॉ. शिखा चौहान का योगदान है। उन्हें “A Liquid Crystal Memory Device and a Process for Making Thereof” शीर्षक के लिए यह पेटेंट प्रदान किया गया।
इस डिवाइस में वैनाडियम-डोप्ड टाइटेनियम ऑक्साइड नैनोपार्टिकल्स से मिश्रित लिक्विड क्रिस्टल का उपयोग किया गया है, जो नॉन-वोलेटाइल मेमोरी के रूप में डेटा को सुरक्षित रखता है। इसे इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल स्टोरेज डिवाइस के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में नई संभावनाएँ खुलती हैं।
डॉ. जय प्रकाश ने बताया कि यह पेटेंट अगस्त 2023 में दाखिल किया गया था और 1 अक्टूबर 2025 को भारत सरकार द्वारा मंजूर किया गया। उन्होंने कहा कि यह तकनीक विशेष रूप से बिजली की कमी वाले क्षेत्रों में उपयोगी साबित होगी और डेटा सुरक्षित रखने में मददगार होगी।
डॉ. शिखा चौहान ने कहा, “यह डिवाइस आधुनिक तकनीक की रीढ़ है। इसका उपयोग स्मार्टफोन, डेटा सेंटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किया जा सकता है, जिससे डेटा स्टोरेज की क्षमता और स्थिरता में सुधार होगा।” उन्होंने यह भी बताया कि यह तकनीक भविष्य में भारतीय शोध और प्रौद्योगिकी को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में मदद करेगी।
इस अवसर पर डॉ. जय प्रकाश ने कहा कि पेटेंट मिलने से एएमयू के वैज्ञानिक और शोधकर्ता समुदाय को प्रोत्साहन मिलेगा और विश्वविद्यालय को इनोवेशन और तकनीकी अनुसंधान के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
यह आविष्कार विशेष रूप से उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साबित होगा, जहां स्मार्ट डेटा स्टोरेज और ऊर्जा की बचत की आवश्यकता है। लिक्विड क्रिस्टल तकनीक के माध्यम से डेटा को स्थायी रूप से स्टोर किया जा सकता है और इसे बार-बार पढ़ा या लिखा जा सकता है।
भविष्य में इस तकनीक का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उद्योग, स्मार्टफोन, कंप्यूटर, डेटा सेंटर और दूरसंचार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर किया जा सकता है। इससे न केवल डेटा स्टोरेज की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि ऊर्जा की खपत में भी कमी आएगी।







