उत्तर प्रदेश के Ambedkar Nagar जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगती। इजरायल और हमास के बीच छिड़े भीषण युद्ध के बीच फंसे Ambedkar Nagar के निवासी अखिलेश कुमार अब सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। शनिवार को जब अखिलेश अपनी पत्नी किरण देवी के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला से मुलाकात की, तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू और चेहरे पर राहत साफ झलक रही थी। यह पूरी कहानी एक आम नागरिक के संकट और सरकार की संवेदनशीलता की मिसाल पेश करती है।
रोजगार की तलाश और युद्ध का खौफ
Ambedkar Nagar के अकबरपुर क्षेत्र के रहने वाले अखिलेश कुमार बेहतर भविष्य और रोजगार के सपने लेकर इजरायल गए थे। वे वहां नेटान्या शहर में काम कर रहे थे, लेकिन अचानक छिड़े युद्ध ने सब कुछ बदल दिया। बम धमाकों और सायरन की गूंज के बीच अखिलेश का मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा। उनके नियोक्ता (Employer) ने भी इस कठिन समय में उनका साथ नहीं दिया, जिससे वे गहरे तनाव में आ गए। Ambedkar Nagar में बैठा उनका परिवार उनकी सुरक्षा को लेकर दिन-रात दुआएं मांग रहा था।
जनता दर्शन: उम्मीद की आखिरी किरण
अखिलेश की स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि वे खुद घर लौटने की स्थिति में नहीं थे। ऐसे में उनकी पत्नी किरण देवी ने हिम्मत नहीं हारी। वह Ambedkar Nagar में आयोजित होने वाले ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम में पहुंचीं और जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला के सामने अपने पति की सुरक्षित वापसी के लिए भावुक अपील की। किरण ने बताया कि उनके पति युद्धग्रस्त इलाके में फंसे हैं और उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। Ambedkar Nagar के डीएम ने इस मामले को न केवल गंभीरता से लिया, बल्कि इसे तुरंत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाया।
मुख्यमंत्री योगी का मानवीय दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जैसे ही इस युवक के बारे में जानकारी मिली, उन्होंने अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर उत्तर प्रदेश शासन ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से संपर्क साधा। जिला प्रशासन की सक्रियता और अंतरराष्ट्रीय समन्वय का नतीजा यह हुआ कि इजरायल स्थित भारतीय दूतावास सक्रिय हो गया। तेल अवीव में भारतीय राजदूत और वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों ने अखिलेश की लोकेशन ट्रेस की और उन्हें निकालने की योजना बनाई।
जॉर्डन के रास्ते चला विशेष ऑपरेशन
चूंकि युद्ध के कारण इजरायल के कई हवाई अड्डे बंद थे या वहां से उड़ानें मिलना मुश्किल था, इसलिए एक वैकल्पिक रणनीति तैयार की गई। Ambedkar Nagar प्रशासन और विदेश मंत्रालय के सहयोग से अखिलेश को सड़क मार्ग के जरिए इजरायल की सीमा से निकालकर पड़ोसी देश जॉर्डन पहुंचाया गया। 2 अप्रैल को उन्हें विशेष वाहन से सुरक्षित तरीके से जॉर्डन सीमा तक लाया गया। Ambedkar Nagar के इस युवक के लिए जॉर्डन के वीजा और अंतरराष्ट्रीय एयर टिकट की व्यवस्था सरकार ने सुनिश्चित की।
घर वापसी का लंबा सफर
जॉर्डन की राजधानी अम्मान से अखिलेश कुमार ने रॉयल जॉर्डनियन की फ्लाइट पकड़ी और 3 अप्रैल की सुबह वे मुंबई पहुंचे। मुंबई हवाई अड्डे पर भी अधिकारियों ने उन्हें पूरा सहयोग दिया और एयर इंडिया की उड़ान से उन्हें लखनऊ भेजा गया। लखनऊ एयरपोर्ट पर आए उनके परिजनों ने उन्हें गले लगा लिया। इसके बाद प्रशासन की टीम ने उन्हें सुरक्षित तरीके से Ambedkar Nagar के ग्राम हाजपुरा, तहसील जलालपुर स्थित उनके घर तक पहुंचाया।
डीएम और सरकार का जताया आभार
शनिवार को कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी से मुलाकात के दौरान अखिलेश बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, “मैं अपने जीवन के सबसे कठिन दौर में था, वहां हर उम्मीद धुंधली हो गई थी। आज अगर मैं अपने परिवार के बीच हूँ, तो इसका श्रेय डीएम और योगी सरकार की कोशिशों को जाता है।” उनकी पत्नी किरण ने भी कहा कि डीएम साहब ने उनकी एक छोटी सी अपील को जिस तरह प्राथमिकता दी, वह उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था।
गांव में जश्न का माहौल
जैसे ही अखिलेश के Ambedkar Nagar स्थित गांव पहुंचने की खबर मिली, वहां खुशी का ठिकाना नहीं रहा। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि युद्ध के मैदान से उनका साथी इतनी जल्दी और सुरक्षित वापस आ जाएगा। यह घटना जिला प्रशासन की कार्यशैली और केंद्र व राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरी है।
अखिलेश की यह कहानी हमें सिखाती है कि संकट चाहे सात समंदर पार ही क्यों न हो, अगर शासन और प्रशासन संवेदनशील हो, तो हर नागरिक सुरक्षित महसूस कर सकता है। Ambedkar Nagar जिला प्रशासन ने इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन को जिस तरह से अंजाम दिया, उसकी चर्चा आज पूरे प्रदेश में हो रही है।
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