इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चाइनीज मांझे को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। जौनपुर में एक डॉक्टर की दर्दनाक मौत के बाद कोर्ट ने पूरे प्रदेश में चाइनीज मांझे के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इसे इंसानों और पक्षियों, दोनों के लिए जानलेवा बताया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक बार फिर राज्य सरकार को चाइनीज मांझा बनाने, उसकी बिक्री और उपयोग पर कड़ी पाबंदी लगाने का आदेश दिया है। यह आदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। इस याचिका में जौनपुर के अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव और अन्य दो ने अदालत में अपील की थी कि चाइनीज मांझा से हुई दुर्घटनाओं की वजह से जानमाल का नुकसान हो रहा है।
क्या है चाइनीज मांझा और क्यों है यह खतरनाक?
चाइनीज मांझा एक प्रकार का रेजर की तरह तेज धार वाला पतंग उड़ाने का धागा होता है। इसमें शीशे के पाउडर और गोंद का मिश्रण होता है, जो इसे अत्यधिक खतरनाक बना देता है। यह धागा किसी भी मानव या पक्षी के शरीर को आसानी से घायल कर सकता है, यहां तक कि यह गला भी काट सकता है। पिछले कुछ वर्षों में, कई लोगों और पक्षियों की इस मांझे से चोटें आई हैं, और कुछ तो अपनी जान भी गंवा चुके हैं।
2015 में हुआ था प्रतिबंध
हाई कोर्ट ने पहली बार 2015 में चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि इस पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए, लेकिन इसके बावजूद चाइनीज मांझे का निर्माण, बिक्री और उपयोग जारी रहा। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि जौनपुर में हुई चाइनीज मांझा से हुई कई दुर्घटनाओं के बाद इस विषय पर पुनः अदालत में याचिका दाखिल की गई।
हाई कोर्ट का ताजातरीन आदेश
कोर्ट ने अपने ताजातरीन आदेश में कहा कि चाइनीज मांझा मानव जीवन के लिए तो खतरनाक है ही, बल्कि यह पक्षियों के लिए भी एक गंभीर खतरा बन गया है। आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि पतंग उड़ाने के मौसम में राज्य सरकार का यह कर्तव्य है कि चाइनीज मांझा के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह से रोक लगाए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि जिलों में चाइनीज मांझा न बने, न बिके और न ही उसका उपयोग हो। इसके अलावा, अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह पूर्व में दिए गए आदेशों का पालन सुनिश्चित करे और चाइनीज मांझा से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए।
चाइनीज मांझा है क्या ?
⦁ चाइनीज मांझा नायलॉन या पॉलिएस्टर की पतली डोर से बनता है
⦁ मांझे को कांच और धातु के बेहद बारीक पाउडर से बनाया जाता है
⦁ कांच का बारीक पाउडर, एल्युमिनियम, स्टील या टंगस्टन कार्बाइड जैसे धातु के कण मांझे में होते हैं
⦁ कई बार मांझे में सिलिकॉन या पॉलिमर भी मिलाया जाता है ताकि कण लंबे समय तक चिपके रहें
⦁ गले पर लगते ही चाइनीज मांझा नसें काट सकता है
हाल की घटनाएं, अदालत ने राज्य सरकार को दी कड़ी चेतावनी
गुरुवार को यूपी के जौनपुर में एक डॉक्टर की चाइनीज मांझे से गला कटते ही मौके पर ही तड़प-तड़प कर उसकी मौत हो गई थी जिसके बाद ये निर्णय लिया गया। 11 दिसंबर 2025 को एक शिक्षक संदीप तिवारी की चाइनीज मांझा से गला कटने के कारण मृत्यु हो गई। इसी तरह, 15 सितंबर 2015 को उत्तम दुबे की भी चाइनीज मांझा से गला कटने के कारण मौत हो गई थी। इन घटनाओं ने इस मुद्दे को और अधिक गंभीर बना दिया है और अदालत को यह मामला पुनः सुनवाई के लिए लाने की प्रेरणा दी है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि जब भी पतंग उड़ाने का मौसम अपने चरम पर हो, राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह चाइनीज मांझा पर पूरी तरह से रोक लगाए। यह आदेश न केवल मानव जीवन, बल्कि पक्षियों के जीवन को भी सुरक्षित रखने के लिए दिया गया है।
परिणाम और प्रभाव
इस आदेश का व्यापक प्रभाव हो सकता है। यदि राज्य सरकार इसे गंभीरता से लागू करती है, तो चाइनीज मांझा के इस्तेमाल में कमी आएगी और इससे होने वाली दुर्घटनाओं में भी कमी आ सकती है। इसके अलावा, यह आदेश अन्य राज्यों में भी इस मुद्दे पर विचार करने के लिए एक उदाहरण बन सकता है। चाइनीज मांझा जो अब त्योहार की खुशी नहीं, मौत का खतरा बन चुका है। इस आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को जिला प्रशासन के माध्यम से ठोस कदम उठाने होंगे। इससे न केवल लोगों की जान बच सकेगी, बल्कि पक्षियों और जानवरों के जीवन को भी खतरे से बचाया जा सकेगा।
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