उत्तर प्रदेश के Aligarh जिले में शनिवार देर रात प्रकृति का कहर देखने को मिला। तेज हवाओं के साथ हुई अचानक बूंदाबांदी और ओलावृष्टि ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। Aligarh के कई इलाकों में गेहूं की फसल कटाई के लिए पूरी तरह तैयार खड़ी थी, जिसे इस बेमौसम बारिश ने भारी नुकसान पहुँचाया है। खेतों में काटकर रखे गए गेहूं के गट्ठर पानी में भीग गए हैं, जिससे किसानों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

मोदी सरकार ने लिया संज्ञान
Aligarh के किसानों की इस बदहाली को देखते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तुरंत संज्ञान लिया है। उन्होंने कृषि मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रभावित राज्यों और Aligarh जिला प्रशासन से संपर्क कर फसल क्षति की विस्तृत समीक्षा करें। मंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में मोदी सरकार पूरी तरह उनके साथ है और नुकसान का उचित आकलन किया जाएगा।

फसलों की गुणवत्ता पर मंडराया खतरा
बारिश और ओलावृष्टि के कारण Aligarh के खेतों में पानी भर गया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि गेहूं के दानों में नमी आने से वे काले पड़ सकते हैं, जिससे मंडियों में किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा, भीगने की वजह से पशुओं के चारे (भूसे) की गुणवत्ता भी खराब होने का डर है। Aligarh के किसान अब अपनी बर्बादी का मंजर देखकर जिला प्रशासन से जल्द से जल्द गिरदावरी (सर्वेक्षण) कराकर मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन ने प्रभावित किसानों को जल्द मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। अन्य तहसीलों में भी सर्वे जारी है। एडीएम वित्त एवं राजस्व प्रमोद कुमार ने बताया कि लेखपाल और राजस्व निरीक्षकों की टीमें खेतों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। प्रशासन का लक्ष्य सही आंकड़े जुटाकर शासन के निर्देशानुसार बिना देरी सहायता राशि किसानों तक पहुंचाना है। किसानों ने भी जल्द राहत की मांग की है।
प्रकृति के आगे बेबस किसान
देर रात जब Aligarh के आसमान से ओले गिरने शुरू हुए, तो किसान बेबस होकर अपनी फसल को भीगते देखते रह गए। फिलहाल Aligarh के आसमान पर अभी भी काले बादल छाए हुए हैं, जिससे किसानों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। यदि अगले 24 घंटों में फिर से बारिश होती है, तो नुकसान का प्रतिशत और भी बढ़ सकता है।
Aligarh में हुई इस ओलावृष्टि ने अन्नदाता को दाने-दाने के लिए मोहताज कर दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कितनी जल्दी सर्वेक्षण पूरा कर पीड़ित किसानों तक मदद पहुँचाता है।
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