अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) रायबरेली ने बुधवार को अपना पहला दीक्षांत समारोह आयोजित किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर कुल 73 नवप्रशिक्षित डॉक्टरों को डिग्रियां प्रदान की गईं। साथ ही क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से तीन अत्याधुनिक चिकित्सा इकाइयों का उद्घाटन भी किया गया।
समारोह में वर्ष 2019-20 बैच के 48 एमबीबीएस विद्यार्थियों और जनवरी 2023 बैच के 25 पीजी रेजीडेंट्स को औपचारिक रूप से उपाधियां दी गईं। एमबीबीएस में सर्वोच्च प्रदर्शन के लिए डॉ. हर्ष कुशवाहा को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।


‘चरक शपथ’ और मानवता की सेवा का संदेश
संस्थान के अध्यक्ष डॉ. आर. वी. रमणी ने सभी विद्यार्थियों को ‘चरक शपथ’ दिलाई और उन्हें निष्ठा, ईमानदारी तथा संवेदनशीलता के साथ सेवा करने की प्रेरणा दी। उन्होंने गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की ‘गीतांजलि’ का उल्लेख करते हुए युवाओं से निर्भीक होकर मानवता की भलाई में योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सलिला श्रीवास्तव ने फॉरेंसिक रेडियोलॉजी यूनिट, वीडियो-यूरोडायनामिक्स सुविधा और नई एंडोस्कोपी इकाई का उद्घाटन किया।
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फॉरेंसिक रेडियोलॉजी यूनिट से डिजिटल रिपोर्टिंग की गति और सटीकता में सुधार होगा।
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वीडियो-यूरोडायनामिक्स तकनीक बच्चों में जटिल मूत्र रोगों के सटीक निदान में सहायक सिद्ध होगी।
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नई एंडोस्कोपी यूनिट बुजुर्ग और उच्च जोखिम वाले मरीजों को सुरक्षित व त्वरित जांच की सुविधा देगी।

डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में अग्रणी भूमिका
संस्थान की कार्यकारी निदेशिका डॉ. अमिता जैन ने बताया कि एम्स रायबरेली डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब तक 2 लाख से अधिक ई-संजीवनी टेली-परामर्श और 1 लाख से अधिक ‘आभा’ पंजीकरण पूरे किए जा चुके हैं। आज का दिन हमारे लिए बहुत ही खास है। आज एम्स रायबरेली अपने पहले दीक्षांत समारोह के माध्यम से संस्थान से पासआउट पहले बैच के MBBS में गोल्ड मेडल लाने वाले हर्ष कुशवाहा सहित कुल 73 छात्रों को डिग्री वितरित किया जा रहा है। इसमे MBBS(48), MD&MS (25) के छात्र शामिल है।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि “स्वस्थ भारत के बिना विकसित भारत की कल्पना नहीं की जा सकती।” उन्होंने संस्थान द्वारा सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और डिजिटल स्वास्थ्य पहलों की सराहना की।
इस अवसर पर संयुक्त सचिव अंकिता मिश्रा बुंदेला, जिलाधिकारी हर्षिता माथुर सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। यह समारोह न केवल छात्रों के लिए उपलब्धि का क्षण था, बल्कि क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक अवसर भी साबित हुआ।
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